सफल लोगों की कुछ खास आदतें | Rare Habits of successful people in hindi

सफल लोगों की कुछ खास आदतें | Rare Habits of successful people in hindi


सफल लोगों की कुछ खास आदतें | Rare Habits of successful people in hindi


मान लीजिए कि आपको शेयर मार्केट में इंटरेस्ट है और आपके घर में 1 दिन एक अनजान कंपनी से लेटर आता है और उस लेटर में वह कहते हैं कि उन्होंने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम बनाया है जो यह बता सकता है कि अगले हफ्ते शेयर की वैल्यू बढ़ेगी या घटेगी और इसी का उदाहरण देने के लिए वह आपको एक कंपनी के शेयर का प्राइस भी बताते हैं ओर कहते हैं कि अगले हफ्ते उस कंपनी के शेयर का प्राइस बढ़ने वाला है लेकिन आप इस लेटर पर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि हो सकता है यह लेटर कोई धोखा हो, और उसे नज़रअंदाज़ करके आप अपने काम में लग जाते हैं।


लेकिन आप सिर्फ जानने के लिए उस कंपनी के शेयर प्राइस अगले हफ्ते देख लेते हैं और आपको पता चलता है कि उसका शेयर का प्राइस सच में बड़ा हुआ था। अगले हफ्ते फिर आपके पास उसी कंपनी का लेटर आता है और उसमें वह कहते हैं कि इस बार इस कंपनी का शेयर प्राइस गिरेगा और इस बार आप और भी उत्सुकता से उस कंपनी का शेयर प्राइस देखते हैं और आपको पता चलता है कि उस कंपनी का सच में शेयर प्राइस गिरा हुआ है। अब आप उस कंपनी के नए लेटर का वेट करने लगते हैं अगले हफ्ते फिर उस कंपनी का लेटर आता है, और इस बार भी उस कंपनी की बात सच निकलती है और इसी तरह अगले दो हफ्ते में भी उस कंपनी की बात सच निकलती है। अब आपको यह यकीन नहीं होता कि टेक्नोलॉजी ने इतनी इंप्रूवमेंट कर ली है। इसके बाद अगले हफ्ते फिर आपके पास लेटर आता है और इस लेटर में वह आपसे कहते हैं कि हम हर हफ्ते आपकी मर्जी की पांच कंपनियों के पूर्वअनुमान की रिपोर्ट आपको देंगे लेकिन इसके लिए आपको हमें ₹50000 रुपये देने पड़ेंगे।

क्योंकि इस पूर्व अनुमान से आप शेयर मार्केट में बहुत ज्यादा पैसा कमा सकते हैं और 50,000 तो आप वैसे भी आसानी से कमा ही लेंगे अगर यह पूर्वानुमान सही निकले तो।


तो आप क्या सोचते हैं? क्या आप यह पेमेंट करोगे?


आपका पता नहीं.. लेकिन बहुत से लोग इसके लिए पेमेंट किए हैं और सबके पैसे डूब भी गए.. लेकिन क्यों? उन्होंने चार बार तो अपनी सीरीज में सही पूर्वानुमान लगाया था।


लेकिन असल में धोखेबाज लोग करते हैं यह हैं कि वह 10 लाख लेटर एक साथ प्रिंट करवा लेते हैं बहुत ही कम कीमत में, उनमें से आधे लेटर में यह लिखा जाता है कि स्टॉक प्राइस अगले हफ्ते कम होगा, और आधे लेटर में यह लिखा जाता है कि स्टॉक प्राइस अगले हफ्ते बढ़ेगा। इसमें से आधे लेटर का पूर्वानुमान तो गलत होगा अब अगर सच में प्राइस बढ़ेगा तो वह उन 5 लाख लोगों को लेटर नहीं भेजेंगे जिसमें उन्होंने लेटर में यह लिख कर भेजा था कि प्राइस कम होगा। अब अगली बार उन 5 लाख लोगों को लेटर दिए जाएंगे जिनका पूर्व अनुमान सही निकला था और उनमें से ढाई लाख लोगों को कहा जाएगा कि स्टॉक प्राइस बढ़ेगा और बाकी ढाई लाख लोगों को कहा जाएगा कि स्टॉक का प्राइस कम होगा और दुबारा से जब स्टॉक प्राइस का रिजल्ट आएगा तो आधे लोगों का पूर्वानुमान सही निकलेगा जबकि आधे लोगों का गलत निकलेगा।


अब शुरू में उस कंपनी ने जो 10 लाख लेटर भेजे थे उसमें से 65500 लोग ऐसे होंगे जिनका लगातार चार हफ्तों तक सही पूर्वानुमान होगा और उनमें से शायद एक आप थे इसलिए आपने उनको पेमेंट कर दिया इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बहुत सी चीजें ऐसी होती है जो बेतरतीब होती हैं और हम उसे सफलता समझ लेते हैं और खुद का ही बेवकूफ बनाने लगते हैं लेकिन सक्सेसफुल लोग हमेशा से चले आ रहे सिद्धांत पर काम करते हैं उन सिद्धांतों में सबसे पहला सिद्धांत है।


1. सफल लोग हमेशा आपने काम के प्रति दृढ़ रहते हैं।


आजकल आप किसी का भी फेवरेट रोल मॉडल पूछ लो तो ज्यादातर लोगों का जवाब एक ही होता है एलोन मस्क जिन्होंने स्पेसएक्स, न्यूरालिंक, और टेस्ला जैसी कंपनियां भी बनाई एलोन मस्क की उपलब्धियों को देखने के दो तरीके हैं हम कह सकते हैं कि इनके Genes ही अलग हैं या फिर यह बिल्कुल अलग इंसान हैं, इसलिए यह पता नहीं कैसे ऐसा कर लेते हैं?


दूसरा तरीका यह है कि इन्हें इनकी; क्वालिटी, वर्किंग शेड्यूल और टीम मैनेजमेंट की क्षमता से इन्हें देखा जाए तो और यह सोचा जाए कि इनमें से कैसे हम इन क्षमताओं को प्राप्त कर सकते हैं अगर हम पहले तरीके से सोच रहे हैं तो हम खुद को इंप्रूव नहीं कर पाएंगे लेकिन अगर हम दूसरे तरीके से सोच रहे हैं तो हम खुद में इंप्रूवमेंट कर पाएंगे और एलोन मस्क की सबसे बड़ी क्वालिटी यह है की उनकी कंपनी स्पेसएक्स की बात करें तो इस कंपनी की शुरुआत से लेकर एस्ट्रोनॉट को स्पेस स्टेशन तक पहुंचाने के लिए एलोन मस्क को 18 साल लग गए थे


अभी आपकी उम्र क्या होगी आप इसे अपनी उम्र से कम्पेयर कर सकते हैं। 18 साल.. इतने में तो एक बच्चा पैदा होकर कॉलेज भी जाने लगता है इतना टाइम लगता है एक स्पेसएक्स एट्रोनॉमी कंपनी बनाने में। सोचो अगर आप भी कोई कंपनी बनाओ तो क्या इतना समय दे सकते हो?


2. सफल लोग अपने काम बीच में छोड़ने के बजाए को अंजाम तक पहुचाते हैं।


सबसे बड़ा जो अंतर है एक सक्सेसफुल और अनसक्सेसफुल इंसान में वह यह है की किसी इंसान का कोई काम को अमल में लाना और उस काम पर action लेना। सक्सेसफुल लोग ज्यादा बातें नहीं करते हैं वह अपने काम को अमल में लाते हैं यानी उस पर एक्शन ले कर उस पर काम लगातार करते हैं। अगर कोई इंसान बार-बार चीजों को अमल में लाता है तो अपने आप ही उस इंसान के लिए सम्मान का भाव पैदा होता है। हम कभी भी उसकी बोली हुई बातों को अनदेखा नहीं करते उसके लक्ष्य को हम एक रिस्पेक्ट भरी नजरों से देखेंगे।


➡ एलन मस्क कैसे नई चीजें सीखते हैं


रोल्स रॉयस इंग्लैंड की कार है, mercedes-benz जर्मनी की कार है, लेकिन रतन टाटा चाहते थे कि हम एक कंपलीट मेड इन इंडिया कार बनाएं लेकिन सब लोगों को लगा कि यह काम तो इंपॉसिबल है और इंडियन कार कभी भी बाहरी कंपनी की वेस्टर्न कार की क्वालिटी को मैच नहीं कर पाएगी लेकिन रतन टाटा उन लोगों में से हैं जो सिर्फ बातें नहीं करते बल्कि एक एक्शन टेकर है और काम को एग्जीक्यूट भी करते हैं।


रतन टाटा ने 120 करोड़ रुपए Computer Aided design मैं इन्वेस्ट किए Telco Factory के अंदर इस प्रोजेक्ट को रतन टाटा ने 6 एकड़ जमीन भी दे दी इसके बाद रतन टाटा को ऑस्ट्रेलिया में Nissan कंपनी की unused Assembly line का पता चला लेकिन इस अनयूज़्ड असेंबली लाइन का वजन 14800kg था जिसे 650 कंटेनर में भरकर ऑस्ट्रेलिया से इंडिया तक लाना था। और वह भी बिना कुछ टूट-फूट के लेकिन फिर भी रतन टाटा ने टेल्को कंपनी के कैंपस में सुरक्षित पहुंचवा दिया यह असेंबली लाइन 500 मीटर की थी और इसमें 450 रोबोट्स थे जिनसे कार की असेंबली होती है। और आखिरकार कड़ी में मेहनत और कई संघर्षों के बाद 1998 में रतन टाटा का मेड इन इंडिया कार बनाने का सपना पूरा हुआ और वह खुद इस कार को चलाकर आए और यह समय भारतीयों को खुद पर गर्व करने का था।



3. सफल लोग चीजों को सीखने की इच्छा रखते हैं।


क्या आपको पता है, एलन मस्क को रोकेट के बारे में कुछ भी नहीं पता था। तो वह प्राइवेट स्पेस एक्सप्लोरेशन कंपनी spacex के सीईओ कैसी बन गए? उस कंपनी के सीईओ जिस कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 100 बिलियन डॉलर है। और खुद एलोन मस्क जो कि दुनिया के अमीर इंसानो में से एक हैं उनकी की नेटवर्थ 185 बिलीयन डॉलर्स है स्पेसएक्स कंपनी के फेमस इंजीनियर रॉबर्ट ज़ुब्रिन बताते हैं कि किस तरह से एलोन मस्क सिर्फ 6 सालों में एक बिल्कुल जीरों नॉलेज से रॉकेट साइंस में एक्सपर्ट बन गए और अब उन्हें हर एक चीज बिल्कुल डिटेल में पता है, मतलब सब कुछ रॉकेट साइंस के बारे में पता है।


तो अब सवाल यह आता है कि उन्होंने लर्निंग कैसे स्टार्ट की?


मान लीजिए आपको भी रॉकेट के बारे में कुछ भी नहीं पता है और आपको अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के साथ Compete करना है तो आप रॉकेट साइंस कैसे लर्न करोगे जब एलोन मस्क से पूछा गया कि आप ने खुद रॉकेट साइंस के बारे में कैसे पढ़ा? तो एलॉन मस्क ने जवाब दिया कि उन्होंने रॉकेट साइंस के ऊपर बहुत सी बुक्स पढ़ी और बहुत से स्मार्ट लोगों से बात की.. यानी इस पर उन्होंने कोई भी डिग्री नहीं ली और उनकी इसी बात पर इंटरव्यूवर बहुत हैरान हो जाते हैं।



कुछ बातें जो हमने सीखी


● सबसे पहले हमने शेयर मार्केट के पूर्वानुमान की स्टोरी देखी थी जिसमें हमने देखा था कि कैसे हम कई बार बेतरतीबी को सक्सेस का नाम दे देते हैं रियल सक्सेस क्वालिटी से आती है। जिसमें सबसे पहली क्वालिटी थी दृढ़ रहना यह क्वालिटी कहती है कि एक्स्ट्राऑर्डिनरी चीजें करने के लिए कई बार एक्स्ट्राऑर्डिनरी टाइम भी लग जाता है और हो सकता है कि वह हमारा लाइफ वर्क हो। उदाहरण के लिए एलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स मैं एस्ट्रोनॉट को स्पेस में पहुंचाने में एलोन मस्क को 18 साल लग गए थे।


● दूसरी क्वालिटी थी, अपने काम को अंजाम तक पहुंचाना इसमें हमने देखा था कि कैसे रतन टाटा ने सभी लोगों के मना करने के बावजूद भी भारत की खुद की सेल्फी मेड कार बनाकर हमें दी अगर कल को रतन टाटा हमें कुछ भी प्रॉमिस करते हैं तो हमें पता है कि वह जरूर उस पर एक्शन लेंगे या एग्जीक्यूट करेंगे चाहे फिर वह नैनो कार हो, जैगुआर या लैंड रोवर हो रतन टाटा हमारे उन दोस्तों की तरह नहीं है जो सिर्फ कहते हैं और कोई एक्शन ही नहीं लेते।


● चीज़ों को सीखते रहना - जिसमें हमने एलोन मस्क की स्टोरी देखी थी कि कैसे उनकी पिछली कंपनी पेपाल 1.5 बिलीयन डॉलर्स में बिकी थी लेकिन इसके बाद भी एलोन मस्क ने रॉकेट साइंस को सीखने के लिए बिलकुल जीरो से स्टार्ट किया था। उन्होंने रॉकेट साइंस के बारे में बहुत सारी बुक्स पढ़ी और बहुत से एक्सपर्ट से इसके बारे में बात करी।


तो दोस्तों अगर आप भी बिना उपयोगी चीजों में टाइम वेस्ट करने के बजाय लर्निंग पर अपना टाइम लगा लो तो आप भी काफी कुछ सीख सकते हो, और अपनी ज़िंदगी मे एक अच्छा मुकाम पा सकते हो 🙂





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