अपने नकारात्मक belief सिस्टम को सकारात्मक में बदलें | Change Your belief system in hindi

अपने नकारात्मक belief सिस्टम को सकारात्मक में बदलें | Change Your belief system in hindi





रेडियो पर केवल एक बात सुनकर बच्चे की पूरी जिंदगी बदल गई इस बच्चे का नाम है Hasil adkins। बात तब की है जब hasil adkins 7 - 8 साल के बच्चे थे adkins को बचपन से ही गाने बजाने का शौक था एक दोपहर वह रेडियो पर गाने सुन रहे थे। गाना खत्म होने के बाद रेडियो जॉकी ने कहा कि यह गाना पेश किया है हेंक विलियम्स ने इस बात को सुनकर उस बच्चे को लगा कि इस गाने को गाने से लेकर सारे इंस्ट्रूमेंट बजाने वाला सिर्फ एक ही शख्स है जिसका नाम है हेंक विलियम्स। 


उस दिन से छोटे से adkins के मन में यह बात बैठ गई की रेडियो पर गाने के लिए आपको ही सब कुछ करना पड़ता है इस बात को सच मानकर छोटे adkins ने सबसे पहले पैरों से ड्रम बजाना सीखा और हाथों से गिटार वह जल्दी स्कूल से घर आकर म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजाने की और गाने की प्रैक्टिस किया करते।


दोस्तों हम जो भी सच मान लेते हैं वह हमारे लिए सच हो जाता है।


छोटे adkins को लगता कि जब हर कोई ऐसा कर सकता है तो इसमें कौन सी बड़ी बात है उनके मन में कोई डाउट नहीं था वह स्कूल से घर लौट कर घंटों प्रैक्टिस करते रहते वह धीरे-धीरे करके और भी कई तरह के म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजाने लगे और 1950 में one man band के नाम से प्रसिद्ध हुए adkins ने अपने जीवन में कोई बहुत बड़ा अवार्ड नहीं जीता लेकिन उन्होंने अपनी कहानी और म्यूजिक से कई लोगों को इंस्पायर किया।


किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि हम अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा करें छोटे से है Adkins ने कभी नहीं सोचा था कि कि मैं इतने सारे इंस्ट्रूमेंट कैसे बजाऊंगा? उसे प्रोफेशनल सिंगर बनना था इसलिए वह बिना किसी डाउट के म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट को सीखने में जुट गया।


अपनी काबिलियत के प्रति Doubtless रहना सबसे बड़ा indicator है कि आप जरूर सफल होंगे क्योंकि आप जब डाउटलेस होते हो तो आप खाली नहीं बैठ सकते जो भी आपको सही लगता है वह आप करते जाते हैं। adkins को लगता कि कई सारे इंस्ट्रूमेंट एक साथ बजाना नॉर्मल बात है मुझे भी बजाना चाहिए इसलिए सारे इंस्ट्रूमेंट को उन्होंने सिद्धत से बजाना सीख लिया।



एक सवाल जो हमेशा पूछा जाता है कि प्रोसेस गोल से ज्यादा जरूरी है तो फिर हम विजुलाइजेशन में फाइनल गोल को क्यों देखते हैं प्रोसेस को क्यों नहीं?


हम विजुलाइजेशन में बार बार फाइनल गोल पुरा होते हुए देखना चाहते हैं जिससे हमारे सबकॉन्शियस माइंड को फील हो जाए, जिससे हम डाउटलेस हो जाएं, डाउटलेस माइंड हल्का और एक्टिव होता है और तुरंत सही एक्शन लेना चाहता है इसीलिए हम विजुलाइजेशन में बस गोल को पूरा होते हुए देखते हैं इसके बाद बाकी समय हम प्रोसेस पर कंसंट्रेट करते हैं


अच्छा बिलीफ सिस्टम आपको ताकतवर और डाउटलेस बनाता है वहीं गलत बिलीफ सिस्टम आप को कमजोर कर सकता है।


जिन बच्चों के साथ बचपन में बहुत बुरा बर्ताव होता है जिन बच्चों को मां बाप का प्यार नहीं मिलता या जिन्हें पूरी तरह नकार दिया जाता है उनमें से कुछ बच्चों को ऐसा लगने लगता है कि जैसे हम में कुछ कमी है इसलिए हमारे साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है यह बच्चे इस बात को इतनी तीव्रता से ग्रहण करते हैं कि शरीर ग्रोथ हार्मोन बनाना बंद कर देता है जिस कारण बच्चे का शरीर और विकास रुक जाता है इस बीमारी को psychosocial dwarfism कहते हैं।


बिलीफ इंटरनल कमांड्स होते हैं जैसा आप सच मानते हो वैसा दिमाग पूरे शरीर को आदेश देता है। याने हमारे हर एक विचार का, हर एक विश्वास का, जिसे हम पूरी शिद्दत के साथ सच मानते हैं इनका असर शरीर के एक एक cell ओर tissue पर होता है। यही बिलीफ सिस्टम हमारे दिमाग पर ही नहीं बल्कि बायोकेमिस्ट्री पर भी असर डालता है इस बात को एक इंटरेस्टिंग केस स्टडी से समझते हैं।


एक महिला जिनको Nausea यानी मिचली की बीमारी थी इस बीमारी में पेशेंट को हमेशा लगता है कि उन्हें उल्टी होने वाली है एक बार उन्हें इसी बेचैनी का दौरा पड़ा तो एक सीनियर डॉक्टर को बुलाया गया डॉक्टर ने एक दवाई दी और कहा की यह एक मैजिकल ड्रग है इससे आप सिर्फ 5 मिनट में ठीक हो जाओगे। एकदम यही हुआ कुछ मिनट बाद उस महिला का nausea गायब हो गया। 


जो मेडिकल ड्रग दवाई के रूप में दिया गया था वह उल्टी लाने वाला ड्रग था ना कि उसे रोकने वाला.. तो फिर ऐसा हुआ कैसे?


सीनियर डॉक्टर ने यह बात इतने अधिकार से कही थी कि उस महिला को दवाई पर यकीन होगा कि यह जरूर काम करेगी इससे मैं ठीक हो जाऊंगी बस फिर दिमाग ने पूरे शरीर को अच्छा महसूस करने और ठीक होने का आदेश भेज दिया और महिला की परेशानी दूर हो गयी।



इसीलिए दोस्तों बिलीफ सिस्टम इंटरनल कमांड से जो आपका दिमाग आपके नर्वस सिस्टम हर cell हर tissue को भेजता है।


Joe dispenza  कहते हैं की आपके बिलीफ़ सिस्टम आपके Genes ओर DNA पर भी असर करते हैं।



दोस्तों हमारे अधिकतर बिलीफ सिस्टम बने हैं बचपन में जो बात बार बार हमसे बोली गई, जो कहानियां हमें बार-बार सुनाई गई भोलेपन में जो इमोशंस हमने महसूस किये वह हमारे बिलीफ सिस्टम बन गए अब हमको लगता है हम इतने ही काबिल हैं। अगर बचपन में आपको बार-बार दोहराया जाए कि आपमें कुछ कमी है तो आप जिंदगी भर असमर्थ महसूस करोगे अपनी बुद्धि शक्ति और साहस का बड़ा हिस्सा कभी उपयोग ही नहीं करोगे।


तो सवाल है कि हम अपना बिलीफ सिस्टम बदले कैसे?


जब आप पुरानी बातों को नए एंगल से देखने की कोशिश करने लगते हो नए सवाल पूछने लगते हो और इन पर एक्शन लेने लगते हो तो हमें रोकने वाले बिलीफ सिस्टम कमजोर पड़ने लगते हैं। जैसे आपको लगता है कि आप डांस नहीं कर सकते तो आप खुद से पूछ सकते हैं कि ऐसा कौन सा साइंटिफिक टेस्ट है जो यह प्रूफ करता है कि मैं डांस नहीं कर सकता। ऐसा कौन सा टेस्ट है जो यह कह सकता है कि आपका शरीर डांस के लिए नहीं बना। 


आप खुद से यह भी पूछ सकते हैं कि अगर में डांस को छोटे-छोटे स्टेप्स में तोड़ लूं और फ्लैक्सिबिलिटी बड़ा लूं तो क्या मैं अच्छा डांसर बन सकता हूं? नजरिया बदलना मतलब नए सवाल पूछना, नए एंगल से खुद को और नजरिए को देखना जब आप ऐसा करते हो तो आपको एक्शन लेने के लिए जगह मिल जाती है और ऐसा तभी हो सकता है जब आप और मैं हमेशा कुछ नया सीखते रहें नए लोगों से मिले नया अनुभव प्राप्त करें हमेशा नए लोगों से मिलने के लिए तैयार रहें हेनरी फोर्ड ने एक अच्छी बात कही थी कि "लोग बुरे नहीं होते हैं बस सीखना बंद कर देते हैं"


जब सीखना बंद कर देते हैं तो हमारे शरीर को मैसेज आता है कि अब भविष्य में कुछ खास नहीं और शरीर धीरे-धीरे धीमा पड़ने लगता है इसलिए हमेशा नई चुनौतियों और अनुभव के लिए तैयार रहें इससे आपकी सोच और चीजों को देखने का नजरिया बढ़ता रहेगा और आप खुद के लिमिटिंग बिलीफ सिस्टम पर आसानी से सवाल उठा सकते हैं।





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