हमेशा खुद को एक्टिव कैसे रखें | Hamesha Active kaise rahe

किसी काम में हमेशा एक्टिव कैसे रहें|Hamesha Active kaise rahe


हमेशा खुद को एक्टिव कैसे रखें | Hamesha Active kaise rahe


हमेशा एक्टिव कैसे रहें (Hamesha Active kaise rahe) दोस्तों आपने कुछ लोग ऐसे देखें होंगे जो हमेशा एक्टिव जरूर रहते हैं लेकिन हमसे इतना सब कुछ क्यों नहीं हो पाता? तो आज हम यही जानेंगे कि हम भी खुद को हमेशा एक्टिव कैसे रख सकते हैं। दोस्तों एक्टिव रहने के लिए दो सबसे जरूरी बातें हैं जो आपको ध्यान में रखनी है। 

1. आपको अपने आस पास के लोगों को देखना है, और उन लोगों से कुछ ना कुछ सीखना है।

2. आपको मेंटली ओर फिज़िकल फिट रहना है, जिससे आपका दिमाग ठीक तरह से काम कर सके और आप एक्टिव रहें।


सबसे पहले देखते हैं कि मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी हमेशा एक्टिव रहने के बारे में क्या कहते हैं यहां हम उनके द्वारा बताई गई बातें जानते हैं।


लर्न फ्रॉम एवरीवन फॉलो नो वन


लर्न फ्रॉम एवरीवन यह आप को स्ट्रांग बनाता है। यह आपका बेस बनता है। आपको कुछ लोगों से नहीं हर एक इंसान से सीखना है इसका मतलब यह कि आप 24 घंटे सीख रहे हैं हर सिचुएशन से कुछ ना कुछ सीख रहे हैं ऐसा करने से आप पूरी तरह एक्टिव रहेंगे, आपका दिमाग पूरी तरह से अलर्ट रहेगा आप हर एक इंसान को देखोगे और उससे कुछ ना कुछ सीखते चले जाओगे जो सक्सेसफुल इंसान है उससे भी और जो सक्सेसफुल नहीं है उससे भी, उसकी सोच से सीखोगे उसके एक्शन से सीखोगे। एक इंसान जो एक प्रॉब्लम में जाकर फंस जाता है और निकल नहीं पाता है क्योंकि उसने एक तरह की सोच बना रखी है वह सोच कुछ भी हो सकती है जैसे इस देश का कुछ नहीं हो सकता है, सब चोर हैं, क्योंकि इन लोगों ने अपनी एक सोच बना रखी है और ऐसे लोग उन लोगों को भी नहीं देखते जो वाकई में कुछ कर रहे हैं। यह रियलिटी नहीं है, यह अपने अपने बिलीफ है जो लोग अपने मन में बना लेते हैं ऐसे लोगों से आप सीखो कि मुझे बिलीफ के बेस पर नहीं रियालिटी के बेस पर जीना है, तो आप सोचो कि मुझे इस बिलीफ पर नहीं अटकना है और ना ही कोई नए बिलीव बनाने हैं और अगर बनाने भी है तो वह सकारात्मक होंगे।



आप कोई बिलीफ ही मत बनाओ आप कोई रियलिटी को जैसी है उसे वैसी ही देखो हर सिचुएशन जैसी है उसे वैसी ही देखो, सीखते चले जाओ समझते चले जाओ और उसी के अनुसार एक्शन लेते चले जाओ आप हर समय ज्यादा एक्टिव महसूस करोगे क्योंकि आप बच्चों से सीख रहे हो, बड़े से सीख रहे हो, हर एक इंसान से सीख रहे हो।


यह आलस ही है जो लोगों को मारता है , प्रॉब्लम के सॉल्यूशन निकाल सकते हैं लेकिन निकालते इसलिए नहीं क्योंकि वह आलसी हैं और इन आलसी लोगों से भी सीखो कि ऐसा नहीं बनना है।


अगर कोई एरोप्लेन एयरपोर्ट पर खड़ा है तो उसे कोई भी डायरेक्शन की जरूरत नहीं है उसे डायरेक्शन की जरूरत तब पड़ेगी जब वह हवा में उड़ रहा होगा यानी कि वह एक्शन मोड में हो तब। ऐसे ही हम भी अपने जीवन में जो भी एक्शन लेने वाले हैं जब तक हमें यह पता ना हो कि हमारी डायरेक्शन ठीक है तब तक सब बकवास है। सबसे जरूरी है कि हम उसमें मेटीरियल्स किस तरह का उपयोग कर रहे हैं जिस तरह हम उसमें मैटेरियल यूज करेंगे उतना ही वह सक्सेस हो पाएगा मतलब उतना ही ऊपर वह उड़ पाएगा, अगर उसमें मटेरियल ही ठीक नहीं होगा तो वह बहुत जल्दी ही क्रेश कर जाएगा और उसमें डिफॉल्ट आ जाएगा।



अगर हम अपने शरीर को एक एरोप्लेन की तरह देखें तो हमारे लिए क्या मटेरियल होना चाहिए? सबसे जरूरी जो हमारे लिए होना चाहिए जिसे हम भूल जाते हैं वह है हमारी हेल्थ अगर हमने अपनी बॉडी को ठीक नहीं किया तो जितना मर्जी आप बड़ा गोल सेट कर लो और अगर वह गोल आपने प्राप्त कर भी लिया तो आपको मजा नहीं आ रहा होगा फिर आप सोचोगे की यार आखिर चक्कर क्या है सब कुछ तो मैंने प्राप्त कर लिया अब क्या बचा है? ऐसा इसलिए क्योंकि आपमे एनर्जी नहीं होगी। आपमें यह एनर्जी कैसे मिलती है?


न्यूट्रिशन से..और इसके बाद हमारी बॉडी में कहां क्या प्रॉब्लम आ रही है क्या हम इतने अवेयर हैं कि कहां क्या ब्लॉकेज आ रही है और हमें क्या करना है उसे ठीक करने के लिए जैसे एरोप्लेन को चेक किया जाता है हर उड़ान से पहले वह उड़ने लायक भी है या नहीं है।


ऐसे ही हमें अपनी बॉडी को रेगुलरली चेक करना है जो भी मेरे एनर्जी लेवल है जो भी मेरी बॉडी में एनर्जी है क्या वह गिर रही है या बढ़ रही है अगर हमें इतनी अवेयरनेस होगी तो जिसकी वजह से गिर रही होगी उसे हम छोड़ते चले जाएंगे और जिसकी वजह से बढ़ रही होगी उसे हम अपनाते चले जाएंगे। मेंटली फिट होने से पहले आपको फिजिकल फिट होना जरूरी है आप तब तक मेंटली फिट नहीं हो सकते जब तक फिजिकली फिट ना हो। बहुत बार हमारे मन में जो भी उत्तम पुथल हो रही होती है या जो भी प्रॉब्लम हो रही होती है हम किसी वजह से उदास हो जाते हैं, कोई रीज़न नहीं होता फिर भी हमारा मूड ऑफ हो जाता है उसका कनेक्शन हमारी बॉडी से होता है और हमें पता नहीं होता तो सबसे पहला काम है कि हमें अपनी बॉडी पर काम करना है। थोड़ी बहुत छोटी छोटी एक्सरसाइज करके आप अपनी बॉडी को फिट रख सकते हैं।



अब देखतें हैं कि हम मेंटली ओर फिज़िकली फिट कैसे रहें? जिससे हम हमेशा एक्टिव बने रहें।


आपके और आपके लक्ष्य के बीच में सबसे बड़ा डिफरेंस जो है वह है एनर्जी का है। अगर हम अधिकतर समय थकान महसूस करते हैं और हर समय हमको नींद आती है तो हमारी प्रैक्टिकल नॉलेज भी किस काम की। हर दिन तरोताजा और एनर्जेटिक बने रहना बहुत ज्यादा जरूरी है तभी आप किसी काम में 10% ज्यादा एफर्ट लगाने की सोच सकते हो आपके लिए तीन बहुत जरूरी पॉइंट है जिससे आप अपनी लाइफ में बदलाव ला सकते हैं। सबसे पहले देखते हैं कि कैसे हम अपनी हेल्थ पर ध्यान देकर हमेशा एक्टिव रह सकते हैं।


Foundation


एक सिस्टम जो आपकी हेल्थ, एनर्जी, मूड, हार्मोन साइकल और इम्मयून सिस्टम के लिए जिम्मेदार है वह है डाइजेस्टिव सिस्टम। हम सब मल्टीसेल्यूलर ऑर्गेनाइज्म है यानी हम सब Cells के बने हैं और डाइजेशन वह प्रोसेस है जिससे हम खाने से एनर्जी, मिनरल, विटामिन, प्रोटीन, कार्ब और फैट ऑब्जर्व करते हैं जिससे Cells से बना हमारा शरीर अच्छी तरह से फंक्शंस कर सके। जब डाइजेशन खराब होता है और Cells को न्यूट्रिशंस और प्रोटीन नहीं मिलते तब Cells सूख कर मर जाते हैं।  डाइजेस्टिव सिस्टम खराब होने से हमेशा थकान महसूस होती है और कई तरह की क्रॉनिक बीमारियां हो जाती है अच्छी बात यह है कि डाइजेशन इंप्रूव करने के लिए ना आपको डाइट लेने की जरूरत है ना कोई दवाई लेने की बस आप छोटे-छोटे खाने के निवाले चबाकर खाना शुरू कर दीजिए।


एक रिसर्च में लोगों को एक निवाला 40 बार चबाकर खाने को बोला गया 1 महीने तक उनकी डाइट पर नजर रखी गई रिसर्च में मोटे और पतले दोनों तरह के लोग थे पूरी रिसर्च में देखा गया कि ज्यादा चबाने से लोगों की डाइट कम हो गई उन्हें कम खाने में ज्यादा संतुष्टि महसूस होती थी और कई लोगों की कब्ज और एसिडिटी की परेशानियां भी ठीक हो गई। जब हम एक निवाला चबाकर खाते हैं तो पेट और आंत में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है मुंह ज्यादा सलाइवा छोड़ता है। जिसमें डाइजेस्टिव एंजाइम होते हैं जिससे डाइजेशन में आसानी होती है अगर आप यंग हैं और आपको डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स होने लगी है तो सबसे पहले इसे ठीक कीजिए और खाना खूब चबाकर खाने की आदत डाल लीजिए यह छोटी सी प्रैक्टिकल आदत से आप हेल्दी और एनर्जीटिक बने रहेंगे।


Medium


हमारा शरीर और हमारे ग्रह पृथ्वी पर 72% पानी है हमारे शरीर के लिए पानी इतना जरूरी है कि मात्र 2% डिहाइड्रेशन से आपकी 10% अलर्टनेस और एनर्जी गिर जाती है। साइंटिस्ट मानते हैं कि जब शरीर में 1.25% डिहाइड्रेशन होता है यानी 1.25% पानी कम होता है तब ब्लड का वॉल्यूम कम हो जाता है जिससे हार्ट को पूरे शरीर में ब्लड पंप करने में दिक्कत आती है और पूरे शरीर में ठीक से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती इस कारण हमें थकावट और आलसीपन महसूस होता है।

तो फिर हम को कितना पानी पीना चाहिए?


अगर आप फिट हैं और हेल्दी हैं तो जब  प्यास लगे तब पानी पीजिए अच्छा लगे तो प्यास लगने पर 10% और पानी पीजिए और अगर आप थके हुए रहते हैं तो अपना यूरीन कलर चेक कीजिए अगर ज्यादातर समय आपका यूरिन क्लियर रहता है तो ठीक है और अगर यूरिन का कलर डार्क है तो पानी की मात्रा बढ़ाइए स्टूडेंट और प्रोफेशनल्स के लिए बेस्ट ऑप्शन होगा कि हर समय अपने पास एक बोतल रखें और हर 4 घंटे में 1 लीटर पानी पियें।


Morning Walk


मैं हमेशा सोचता था कि मॉर्निंग वॉक उन लोगों को करना चाहिए जो चोटिल है या बुजुर्ग हैं लेकिन अगर आप कॉन्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं या आप हाई स्ट्रेस वाले वातावरण में काम कर रहे हैं तो मॉर्निंग वॉक आपके लिए लाइफ लाइन है


जब भी स्टीव जॉब्स को कुछ गहराई से सोचना होता था, जब उन्हें मन शांत करना होता था तो वह लंबी वॉक पर चले जाते थे।


लेकिन मॉर्निंग वॉक बाकी सब से इतनी इफेक्टिव क्यों है?

साइकोलॉजिस्ट कहते हैं केवल 12 मिनट की मॉर्निंग वॉक काफी है एक रिसर्च में देखा गया कि नेचर में सिर्फ 12 मिनट चलने से स्टूडेंट्स मैं कॉन्फिडेंस मेंटल शार्पनेस और खुशी महसूस हुई। यह फीलिंग हमारे दिमाग में Hardwire हैं इंसान जो सालों से जंगल में रह रहा था उसे नेचर और मूवमेंट से kick मिलती है जैसे सालों पहले उसे खाना ढूंढने या शिकार करने में मिलती थी, हमको यह kick कॉन्फिडेंस और मेंटल शार्पनेस के लिए चाहिए जिससे हम हाईली कॉम्पिटेटिव एनवायरमेंट में अच्छे से अच्छा परफॉर्म कर सके और खुश रह सके।


कुछ बातें जो आपको ध्यान रखनी हैं


●•● हर व्यक्ति में कुछ ना कुछ अच्छी बातें जरूर होती हैं उन्हें ऑब्सर्व करें, उनसे वह बातें सीखें इससे आपका दिमाग अलर्ट रहेगा ओर एक्टिव बना रहेगा।


●•● आप खाने पर भी ध्यान दें, ज्यादा खाने से आलस आता है और आपको अपना काम करने में दिक्कत हो सकती है, जरूरत स ज्यादा न खाएं।


●•● अच्छी नींद लें, अगर आप रात में समय से अच्छी नींद लेंगे तो आपको सुबह आलस नही सतायेगा ओर आप अपने काम में ज्यादा एक्टिव रहेंगे।


●•● अपनी हेल्थ और डाइट पर भी ध्यान दें, एक्सरसाइज करें जिससे आपके शरीर मे स्फूर्ति आएगी, और शरीर ज्यादा एक्टिव रहेगा।


●•● खूब पानी पिएं, यह दिमाग को ठीक तरह से काम करने के लिए जरूरी है।