ज्यादा सोचने से कैसे बचें, इसके नुकसान | How to stop overthinking in hindi

ज्यादा सोचने से कैसे बचें, इसके नुकसान | How to stop overthinking and negative thoughts in hindi


ज्यादा सोचने से कैसे बचें, इसके नुकसान | How to stop overthinking and negative thoughts in hindi


हम लोग ज्यादा क्यों सोचने लगते हैं | Causes Of Overthinking


साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि हमारा दिमाग meaning making machine है। आपके आसपास जो भी होता है आप उसका मतलब निकाले बिना नहीं रह सकते और यह एक कीमती प्रोसेस है क्योंकि इसके द्वारा आप लगातार घटनाओं को सीख में बदल रहे हो। हमारा दिमाग सीखना इसलिए चाहता है जिससे आप भविष्य में जल्दी और बेहतर निर्णय ले सको। आप चौराहे पर तत्काल रेड लाइट देख कर रुक जाते हो क्योंकि आपके दिमाग में पुलिस और एक्सीडेंट से सीख लिया है कि रुकने में भलाई है। अगर यह प्रोसेस नहीं होगी तो आपको हर बार पुराने अनुभव याद करने पड़ेंगे इस पूरी कार्यवाही में दिक्कत यह है कि हम लोग Consciously नहीं सोच पाते हैं Consciously सोचने का मतलब है कि आपको पता है कि आपके Assumptions क्या है. 


मान लो कि आप एक लाइब्रेरी में चल रहे हो बहुत सारी किताबें रखी हुई है आपने एक किताब उठाकर देखी तो वह ढाई सौ साल पुरानी थी। बाद में किसी ने पूछा की लाइब्रेरी कैसी है? तो आपने कहा ठीक ही है लेकिन उसमें तो ढाई सौ साल पुरानी किताब हैं। आपने अनजाने में मान लिया की लाइब्रेरी में रखी सारी किताबें एक ही समय पर छपी हैं अगर हम लोग अपने Assumption के प्रति सावधान नहीं है तो सही इंफॉर्मेशन भी गलत सोच और बेकार की नॉलेज में बदल जाती है हमारा दिमाग नेगेटिव अनुभवों और गलतियों को याद रखने के लिए programmed है जिससे गलतियां बार-बार ना हो इसीलिए हमें गलतियां और एक्सीडेंट ज्यादा intensity से याद रहते हैं और महसूस होते हैं।

लेकिन जब हम अपने विचारों और assumption के प्रति सावधान नहीं रहते तो फिर विचार ज्यादा होने के कारण नेगेटिव Assumption अपनी प्रधानता बना लेते हैं और हम एक के बाद विचार या चिंता में एक फस जाते हैं।


यह सारी बातें बहुत अच्छी लेकिन जब हम विचारों के चक्रवात में फंसे होते हैं तब हम विचारों से कैसे निकले?


माइंडफूलनेस के माध्यम से लोगों को अपने विचारों को मैनेज करना सिखाया जाता है इस थेरेपी में एक तरीका है cognitive diffusion जिसके दो हिस्से है पहला है Acceptance जिसमें आप अपने विचारों को स्वीकार करते हो और साथ में दूरी बनाते हो यानी कि Detachment


तो सवाल यह है कि हम को मन शांत करने के लिए अपने विचारों को स्वीकार करने की क्या जरूरत है?


ओवरथिंकिंग में तो हमें लगता है कि हमें बहुत सारे विचार परेशान कर रहे हैं लेकिन अगर आप ध्यान दो तो आपको पता चलेगा कि हमको दो विचार एक साथ नहीं आते विचार एक के बाद एक सीक्वेंस में आते हैं। और कई विचार एक ही विचार के वेरिएशन होते हैं यानी आपको कुछ एक या दो विचार ही रूप बदलकर परेशान करते हैं और यह विचार जिंदा कैसे रहते हैं?


मन का असली खेल आपको उलझाये रखना है जब तक हम इन विचारों के प्रति व्यक्त करते हैं तब तक यह विचार मल्टीप्लाई होते हैं विचारों को कंट्रोल करने की कोशिश करना ओर इन्हें रोकना और खत्म करने की कोशिश करना भी reaction है। 


तो सवाल यह है कि नेगेटिव विचारों को समाप्त कैसे किया जाए? Reaction को रोककर… सबसे पहले acceptance जिसमें छिपी है awareness मतलब आपको एहसास है कि हां विचार है जो इस समय परेशान कर रहे हैं और acceptance के यह विचार केवल परछाई की तरह है। ना अच्छे हैं ना यह बुरे हैं। और इन विचारों का कोई मतलब नहीं है।

दूसरा हिस्सा है Detachment यह विचार अपने हिसाब से आते हैं और अपने हिसाब से चले जाते हैं मैं इन्हें बस दूर से देखते रहो।


यह Acceptance और Detachment हम कैसे हासिल करेंगे?


इन्हें हम Metaphors की मदद से हासिल करेंगे। जब हम एक Object के नजरिए को दूसरे object पर लगाते हैं यानी आरोपित करते हैं तो हमारे नजरिए में नया आयाम जुड़ जाता है। बर्फ की ठंडक यानी दिमाग की ऐसी गहरी शांति जिससे हमें बहुत राहत मिलती है इन metaphors की मदद से हम विचारों और फीलिंग्स को नए आयाम में देख सकते हैं और दूरी बना सकते हैं साथ में यह महसूस कर सकते हैं कि बिना हमारी मर्जी के किसी विचार में हमें विचलित करने लायक शक्ति नहीं हैं इनके प्रैक्टिकल एग्जांपल क्या है? सबसे पहले जान लेते हैं को ओवरथिंकिंग के नुकसान क्या हैं।


ज्यादा सोचने से क्या नुकसान हो सकते हैं | Losses of Overthinking


● ओवरथिंकिंग के कारण आप मानसिक बीमारी के शिकार हो सकते हैं ज्यादा सोचने से आप अपनी मानसिक शांति खो देते हैं और मानसिक शांति खोने के कारण आप और अधिक सोचते हैं और इसी सोच के चक्रवात में फंसते चले जाते हैं।


● ओवर थिंकिंग आपकी नींद को भी प्रभावित करता है जब आपका मन ही शांत नहीं रहेगा आपका मन सोचता ही रहेगा तो आपको रात में नींद भी अच्छे से नहीं आ पाएगी। ओवरथिंकिंग आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है जिसके कारण आप दूसरे दिन अपने काम में अपने काम में प्रोडक्टिव नहीं रह पाते।


● ओवरथिंकिंग समस्या को सुलझाने की क्षमता को प्रभावित करती है आप ज्यादा सोचने के कारण उन चीजों को भी सोचने लगते हैं जो कभी आपके साथ हुई ही नहीं है आप समस्या का हल निकालने के बजाय सिर्फ सोचते ही रह जाते हैं इससे हमें छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाने में भी परेशानी होती है।


●ज्यादा सोचने के कारण हमारे दिमाग की मांसपेशियां थक जाती हैं और हमें थकावट सी महसूस होती है इस कारण हमारा किसी भी काम में मन नहीं लगता और शरीर सुस्त दिखाई पड़ता है।


● ओवरथिंकिंग के कारण और छोटी-छोटी बात पर भी बहुत ज्यादा सोचने लगते हो कोई छोटी सी बात भी आपके दिमाग पर गहरा असर छोड़ती है।


अधिक और नकारात्म सोच से कैसे बचें | How to Stop Overthinking and negativity


सबसे पहले शांत होकर बैठ जाइए और गहरी सांस लीजिए आप चाहे तो आंखें भी बंद कर सकते हैं अगर आप को एक साथ कई विचार परेशान कर रहे हैं तो पहला Metaphor काम आएगा।


1.) आकाश में बादल


आपकी awareness या आप खुद एक खाली आकाश हैं और विचार बादल, अगर आप पहाड़ों पर गए हो तो तो आपने देखा होगा बादल कोहरे के रूप में पहाड़ों से टकराते हैं, बारिश करते हैं फिर चले जाते हैं लेकिन आकाश को छू भी नहीं पाते। बादलों का ना तो खुद का स्थाई अस्तित्व होता है ना ही उन्हें आकाश को छूने की शक्ति होती है जैसे मौसम के अनुसार बादल अपने आप प्रकट होते हैं वैसे ही नए विचार अपने आप आपकी चेतना में आते हैं और अपने हिसाब से चले भी जाते हैं।


दूसरा तरीका है जब आपको कोई विचार बार-बार परेशान करें तो इस metaphor का इस्तेमाल कीजिए।


2.) नदी की धाराएं


कि मन के विचार नदी की बहती हुई धाराएं हैं कोई भी विचार या चिंता कितना भी शक्तिशाली प्रतीत हो वह परमानेंट नहीं होता क्योंकि विचारों का प्रवाह लगातार चलता रहता है फिर भी आप कह सकते हो कि हमें तो एक ही विचार कई बार परेशान करता है। असल में हम उस विचार के प्रति React करके उसे बार-बार पैदा करते हैं अगर आप रुक कर देखो तो सारे विचार, भावनाएं, अनुभव और कहानियां आपकी चेतना यानी awareness की रोशनी में बहते जा रहे हैं। 


विचारों के प्रति reaction को कंट्रोल करने के लिए बहुत अच्छा metaphor है ट्रेवल ऑन द हाईवे – हाईवे आपका दिमाग है उस पर चलती हुई टैक्सी आपका विचार है आप टैक्सी से उतरकर चल रहे हो, अच्छा मौसम है ठंडी हवा चल रही कुछ टैक्सी वाले झगड़ालू है कुछ ऐसे हैं जो बिना मतलब हॉर्न बजाते हैं लेकिन जब तक आप उन्हें हाथ देकर नहीं रोकते तब तक वह बहस नहीं करते आप शांति से चलते जा रहे हो और टैक्सियों को आते जाते देख रहे हो धीरे-धीरे ट्रैफिक कम होता जा रहा है।


अगला metaphor है 

3.) बस, ड्राइवर एंड पैसेंजर 


आप विजुलाइज करते हो कि खाली मन यानी Awareness आपकी बस है आप बस ड्राइवर हो जब बस स्टॉप पर रूकती है तब बिना इनविटेशन के यानी कई पैसेंजर बस में चढ़ते हैं यह सारे यात्री अपने आपके विचार है जो अपने हिसाब से आते जाते रहते हैं। आप हर विचार की अलग पर्सनालिटी देख सकते हो जैसे भारी भरकम अंकल आलस के विचार हैं, कुछ लड़के मस्ती करते हैं, कुछ आंटी भी है जो आपस में झगड़ रही हैं और आप से बात करने की कोशिश करती हैं। बस में बहुत शोर है लेकिन आपको कोई फर्क नहीं पड़ता आप स्टॉप पर गाड़ी रोकते हो और विचार एक-एक करके उतरते जा रहे हैं।


अब आखरी metaphor भी है और एक्सरसाइज भी।

4.) नकारात्म और परेशान करने वाले विचारों को जला दें


जब भी आप बहुत परेशान हो पेपर पेन उठाइए और जो बातें आपको परेशान कर रही है उन्हें लिखिए इसमें जरूरी स्टेप यह है कि अगर कुछ समझ में ना आए तो जो मन में आए वह लिखते जाओ फिर जब 5 से 10 लाइन हो जाए तो जो नेगेटिव विचार बार-बार परेशान कर रहे हैं उन्हें हाईलाइट कर दीजिए और पेपर में आग लगा दीजिए। अग्नि परिवर्तन शक्ति और शुचिता का symbol है ऐसा करने से दिमाग को संदेश जाता है कि सभी नकारात्मकता को नष्ट कर दिया गया है।


हम लोग सोचते हैं सीखने के लिए, और सीखते हैं कि हम भविष्य में बेहतर और जल्दी निर्णय ले सकें दिक्कत यह है कि हम अपने assumption के प्रति सचेत नहीं रहते हैं और नेगेटिव assumption के कारण ओवरथिंकिंग में फस जाते हैं metaphors की मदद से अपने विचारों को स्वीकार कीजिए साथ में दूरी बनाइए।


कुछ बाते जो हमने जानी


● पहला मैटेफर है – आकाश में बादल, आपकी अवेयरनेस खाली आकाश है और विचार बादल कोई भी विचार में इतनी शक्ति नहीं है कि वह अनंत आकाश को छू सके या अनंत आकाश को ढक सके जब आपको कोई भी विचार बार-बार परेशान करें तब दूसरे metaphor का इस्तेमाल कीजिए।


● मन के विचार नदी की बहती हुई धाराएं हैं कोई भी विचार परमानेंट नहीं है वह अपने आप आते जा रहे हैं जिसे आप दूर से देख रहे हैं।


● हाईवे आपका दिमाग है उस पर चलती हुई टैक्सी विचार है कुछ टैक्सी वाले झगड़ालू है कुछ बिना मतलब हॉर्न बजाते हैं लेकिन जब तक आप उन्हें हाथ देकर नहीं रोकते वह आप से बहस नहीं करते।


● आप अपने नेगेटिव विचारों को पेपर पर लिख कर आग लगा देते हो क्योंकि अग्नि ट्रांसफॉरमेशन का सिंबल है ऐसा करने से आपके दिमाग को संदेश जाता है कि अभी के लिए मेरी सारी परेशानियां जल गई है।


➡ स्वामी विवेकानंद – नकारात्मक विचारों को कैसे रोकें| How to remove negative thoughts in hindi