अर्नाल्ड श्वाजनेगर Work ethic इन हिंदी | Arnold schwarzenegger work ethic in hindi

अर्नाल्ड श्वाजनेगर Work ethic इन हिंदी | Arnold schwarzenegger work ethic in hindi


अर्नाल्ड श्वाजनेगर Work ethic इन हिंदी | Arnold schwarzenegger work ethic in hindi


अर्नाल्ड श्वाजनेगर अपनी किताब टोटल रिकॉल में कहते हैं कि चाहे वह बायसेप कर्ल करना हो या मिस्टर यूनिवर्स में पोज करना या वर्ल्ड लीडर और पॉलिटिशियन से बात करना हर काम की सफलता रिपीटेशन पर निर्भर करती है।


वह कहते हैं कि जब मैं 14 साल का था तब ऑस्ट्रिया के एक छोटे से शहर ग्राज में मैंने अंधेरे बेसमेंट में वेटलिफ्टिंग करना शुरू किया। यहां का माहौल गजब कथा बेसमेंट की दीवार पर प्लाईवुड का बोर्ड लगा हुआ था। हम लोग हर रोज जाकर उस बोर्ड पर अपना ट्रेनिंग प्रोग्राम और वजन लिख देते थे और उसके सामने लाईन बना देते थे जैसे पांच सेट करने के लिए उसके सामने पांच लाइनें बना देते थे फिर एक सेट करने के बाद उस लाइन को दूसरी लाइन से काट देते जिससे दोनों लाइन मिलकर X जैसी दिखने लगती। हमको नहीं पता होता था कि उस दिन हम में कितनी ताकत है या फिर हम कितना वजन उठा पाएंगे लेकिन एक जुनून होता था कि सारी लाइनों को एक X में बदलना है।


अर्नाल्ड कहते हैं मैंने विजुअल फीडबैक का हमेशा इस्तेमाल किया है और इस प्रैक्टिस का मेरे मोटिवेशन पर बहुत असर होता था। goals लिखना और उनके सामने X बनाना मेरा स्वभाव बन गया इस प्रैक्टिस से मेरे अंदर एक बात बैठ गई थी हर सफलता प्रतिनिधित्व(Reps) और दूरी(mileage) पर निर्भर करती है अगर आपको skiing में एक्स्पर्ट बनना है तो तो आपको बर्फ में मीलों जाना पड़ेगा अगर आपको चेस में महारत हासिल करनी है तो आपको कई हजार गेम खेलने होंगे। अगर आपके अकाउंट में प्रतिनिधित्व और दूरी जमा है तो आपकी फाइनल परफॉर्मेंस अच्छी होगी


दोस्तों Work Ethic का मतलब भी यही होता है की जैसी आप अपनी सोच बना लेते हो वैसे ही आप हरकत करने लगते हो।


अर्नाल्ड कहते हैं जब मैंने हॉलीवुड में काम करने का मन बनाया तब मुझे एक मेंटर मिले उन्होंने कहा कि अगर कोई फिल्म डायरेक्टर या एजेंट मुझे काम देने से मना करे या ना बोल दे तो तुम मुस्कुराओ और ऐसा बर्ताव करो जैसे तुमने हां सुना है और अंदर ही अंदर विश्वास करो कि हां हो चुकी है फिर अगले दिन उस फिल्म डायरेक्टर को दोबारा फोन करो उसे मिलने का धन्यवाद दो और इधर-उधर की बात करो। वह डायरेक्टर तुम्हारे एटीट्यूड से प्रभावित होकर तुम्हें आज नहीं तो कल किसी ना किसी प्रोजेक्ट में शामिल कर ही लेगा।


अर्नाल्ड कहते हैं कि इसको मैंने अपना दिलीफ़ सिस्टम बना लिया “की हर ना में हाँ छिपी है” जब मैं पहली बार एजेंट के पास गया तो एजेंट ने बोला आपका नाम अजीब है.. आपका accent भारी है पब्लिक समझ नहीं पाएगी... आपका शरीर इतना बड़ा है कि दूसरे एक्टर आपके सामने छोटे लगेंगे.. आपको कोई डायरेक्टर काम नहीं देगा। अर्नाल्ड कहते हैं कि मुझे तो केवल हां सुनाई दे रहा था मैंने अपने एक्सेंट और एक्टिंग पर तत्काल काम करना शुरू कर दिया जैसे कि मुझे एजेंट्स अगले महीने से ही फिल्मों में काम दिलाने वाले थे। 


दोस्तों जब हम लोगों का सामना निराशा से होता है तो हम उसे परमानेंट मानकर दुखी हो जाते हैं दिमाग नए रास्ते और तरीके नहीं सोच पाता वही अर्नाल्ड एक कदम और आगे जाते हैं।


वह कहते हैं कि मैंने कभी भी ना सुनने में समय खराब नहीं किया मुझे जब भी तैयारी का मौका दिखा तो मैं करता रहा। जिन क्वालिटी के कारण में एजेंट को अजीब दिख रहा था मैं उन्ही क्वालिटी के कारण पब्लिक को याद रहा और उनकी नजरों में एक्शन हीरो बन सका।


दोस्तों शायद आपको पता ना हो कि मूवी में आने से पहले ही अर्नाल्ड मिलेनियर बन चुके थे उन्होंने बॉडी बिल्डिंग के साथ mail order बिजनेस शुरू कर दिया इसी के साथ उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया फिर उसी के साथ मिलकर ही रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करने लगे अर्नाल्ड अपनी सारी कमाई बिजनेस में लगाते रहे।


वे कहते हैं कि जब मेरे कुछ दोस्त अपने लिए महंगे सुंदर फ्लैट खरीद रहे थे। तब मैंने अपने दोस्त के साथ मिलकर दूर सस्ती लोकेलिटी में दुकानों वाला एक अपार्टमेंट कंपलेक्स खरीदा नीचे दुकान में बन रही थी 2 फ्लोर पर किराएदार रहते थे और सबसे ऊपर में रहता था। इन सबके बीच अर्नाल्ड कॉलेज ने इंग्लिश और बिजनेस कोर्सेज भी किया वह लगातार सीखते रहे और खुद के ऊपर इन्वेस्ट करते रहे जिस कारण आज अर्नाल्ड की नेटवर्थ करीब 400 मिलियन डॉलर है।


अर्नाल्ड कहते हैं कि जब पहली बार बॉडीबिल्डिंग कंपटीशन में जा रहे थे तब उनकी सोच थी कि चलो इस बार देख कर आते हैं अगली बार जीतने की कोशिश करेंगे। लेकिन जब उनकी प्रोफेशनल केटेगरी में सेकंड रैंक आई तब अर्नाल्ड को काफी अफसोस हुआ। वह समझते रहे अगर मैंने इसी कंपटीशन को सीरियस लिया हुआ होता तो शायद में पहली ही बार में प्रोफेशनल बॉडी बिल्डर बन गया होता। अब मुझे एक साल इंतजार करना पड़ेगा अर्नाल्ड कहते हैं कि उसके बाद मैंने वह गलती दोबारा नहीं की मैंने जिस भी कंपटीशन, मूवी, इलेक्शन या टीवी शो के एक एपिसोड के लिए भी काम किया तो मैंने उसकी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी मैंने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की हमेशा जीतने की कोशिश की है ऐसा करने से बड़ा चेन और संतुष्टि महसूस हुई कभी कभी हार भी हुई लेकिन इसके बावजूद भी मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ता रहा।


अर्नाल्ड कहते हैं कि मैं ऑस्ट्रिया के थाल नाम के गांव में बढ़ा हुआ ना जाने बचपन में यह बात कैसे बैठ गई थी कि मुझे अमेरिका जाना है वह कहते हैं कि मैं अपने जीवन में कुछ करना चाहता था लेकिन मुझे पता नहीं था कि मैं कैसे करूंगा इसलिए मैं परेशान रहता था। फिर कुछ समय बाद में Reg Park से मिला उन्होंने तीन बार मिस्टर यूनिवर्स जीतने के बाद अमेरिका जाकर हरक्यूलिस की पांच मूवी में काम किया। अर्नाल्ड कहते हैं कि उस दिन से मेरे मन से एक बोझ हट गया क्योंकि अब मुझे एक विजन मिल गया था। मैं अपने गोल्स को पूरा होते हुए देख सकता था उसके बाद से अलग मोटिवेशन और एनर्जी मेरे अंदर आ गई वह कहते हैं कि यह प्रैक्टिस में अपने हर गोल के लिए करता रहा मैं अपने गोल पेपर पर लिखता साथ में उसे स्टेप बाय स्टेप पूरा होते हुए भी विजुलाइज भी करता हूं और फिर काम पर लग जाता हूँ।


इस पोस्ट से सीखी बातें


● अर्नाल्ड कहते हैं कि मैंने हमेशा विजुअल फीडबैक का इस्तेमाल किया गोल लिखना और उसके सामने X बनाना मेरा स्वभाव था इस अभ्यास से मेरे अंदर एक बात बैठ गई थी कि कि हर सफलता प्रतिनिधित्व और दूरी पर निर्भर करती है।


● हर ना में हाँ छिपी है... अर्नाल्ड कहते हैं कि मैंने कभी भी ना सुनने में समय खराब नहीं किया मुझे जब भी तैयारी का मौका दिखा तो मैं उसे करता गया।


● अर्नाल्ड लगातार सीखते रहें और अपने ऊपर इन्वेस्ट करते रहे बॉडी बिल्डिंग, कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट के बिजनेस के बावजूद भी उन्होंने कॉलेज से इंग्लिश और बिजनेस की पढ़ाई की।


● मैंने जिस भी कंपटीशन, इलेक्शन, मूवी या टीवी के एक एपिसोड के लिए भी काम किया मैंने उसकी तैयारी में कोई भी कसर नहीं छोड़ी कभी कभी हार भी हुई लेकिन मेहनत करने से कॉन्फिडेंस बढ़ता रहा।


● अर्नाल्ड कहते हैं कि जब मुझे पहली बार अपना गोल मिला तो मेरे दिल से एक बोझ हट गया क्योंकि मैं अपने गोल को पूरा होते हुए विजुलाइज कर सकता था। उसके बाद मेरे अंदर प्रेरणा और ऊर्जा की कमी नहीं हुई मुझे विश्वास हो गया था कि जो मैं होते हुए कल्पना कर सकता हूं उसे मैं पूरा भी कर सकता हूं मैं हमेशा अपने गोल लिखता हूं और उन्हें स्टेप बाय स्टेप विजुलाइज करता हूं और फिर काम पर लग जाता हूं।





    

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