Nepoleon hill - positive thinking book summary in hindi

दोस्तों आज हम जानेंगे नेपोलियन हिल की बुक पोज़िटिव थिंकिंग की बुक समरी इस बुक समरी में हम जानेंगे कि हम विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे पोज़िटिव रह सकते हैं तो चलिए जानते हैं बुक समरी।


Nepoleon hill - positive thinking book summary in hindi



1.) मस्तिष्क पर काबू कीजिए


आपके मस्तिष्क में 10 अरब कोशिकाएं हैं यह सभी कोशिकाएं आपस में एक दूसरे से जुड़ी हैं। ओर सभी कोशिकाएं हमारे अनुसार कार्य करने के लिए बनी है फिर भी इस दुनिया का सबसे बुद्धिमान इंसान भी इन शक्तियों का प्रयोग नहीं कर पाता है। लेखक कहते हैं आपके अंदर अपार मानसिक क्षमताएं है और यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने दिमाग की क्षमता का प्रयोग सकारात्मक सोचने में करें ताकि यह आपके फायदे के लिए काम करे।


नौकायान सीलिंग के क्षेत्र में दी जाने वाली दुनिया की सबसे प्रेस्टीजियस ट्रॉफी को अमेरिका कप कहा जाता है क्योंकि इसे 132 वर्षों तक अमेरिका टीम ने जीता था 1983 में ऑस्ट्रेलिया ने लेकिन इसके 4 साल बाद अमेरिकी कप को वापस अमेरिका ले गया यह करने के लिए अमेरिकी कोच कार्नर को विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करनी पड़ी कार्नर की उपलब्धियों में जो था जिसने उसे संकल्प की प्रति संकल्प नाम दिया, यानी लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण कार्नर ने कहा एक बार जब आप संकल्प कर लेते हैं तो आपका पूरा ध्यान एक ही काम पर केंद्रित होता है इसीलिए दोस्तों आप अपने संकल्प के प्रति संकल्प रहो आज ही अपने पॉजिटिव मेंटल एटीट्यूड के विकास के लिए संकल्पित रहो इससे आप किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।


2.) दिमाग को उन चीजों पर फोकस करिए जो आपको चाहिए उन पर नहीं जो आपको नहीं चाहिए।


टी. विलियम एक अस्पताल में वालंटियर थी उनको लोगों के साथ काम करना बहुत अच्छा लगता था लेकिन अस्पताल की समस्याओं से वह परेशान हो गई थी और उसने इस नौकरी को छोड़ने का निर्णय लिया उसे यह महसूस हुआ कि वह जिस चीज से प्यार करती है वह है अच्छी खबरों को बांटना। और फिर उसने एक एडवरटाइजिंग कंपनी खोली जिसके बहुत जल्द ही कई ग्राहक बन गए वह कभी भी देश की बेस्ट एडवरटाइजिंग नहीं बनती यदि उसे अपनी पहली महत्वाकांक्षा के बिखरने पर निराशा नहीं मिली होती।


बीते समय में मिली निराशा या अप्रिय परिस्थितियों के कारण मिले अनुभवों को भूल जाइए असफलता और निराशा में दूसरों के प्रति नकारात्मक भावनाओं के साथ जीने से स्थिति और भी बदतर हो जाती है अपनी और संतुष्टि को किसी अच्छी चीज के साथ कम कीजिए जिससे आपको प्रेरणा मिलती हो।


3.) स्वर्णिम नियम का सहारा लीजिए


दूसरों के साथ वैसा ही कीजिए जैसा कि आप दूसरों से अपने लिए अपेक्षा करते हैं कभी-कभी स्वर्णिम नियम का सहारा लेने का मतलब यह होता है कि आपको दूसरों के लिए खड़ा होना चाहिए उनका रक्षक और सलाहकार बनना चाहिए। दोस्तों स्वर्णिम नियम यह कहता है कि हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में अच्छी चीज की तलाश कीजिए दूसरों की सहायता कीजिए प्रशंसा कीजिए और प्रोत्साहित कीजिए ना की आलोचना या बदला लीजिए और हां किसी की मदद के लिए थोड़ा अतिरिक्त प्रयास कीजिए।


4.) आत्म परीक्षण करके सभी नेगेटिव विचारों को निकालिए


कुछ लोगों को तब तक इस बात का पता नहीं चलता कि वह नकारात्मक ढंग से सोचते हैं जब तक कि वह अपने विचारों और प्रतिक्रियाओं को जांचने का सजग प्रयास नहीं करते आत्म मूल्यांकन की प्रक्रिया सरल है बस आप अपने से पूछे यह सकारात्मक है या नकारात्मक। जब आप अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण प्राप्त करने और अपनी कल्पना शक्ति के बल पर इसे अपनी मनचाही दिशा मैं मोड़ने में असफल हो जाते हैं तो इस बात की बहुत संभावना है कि प्रतिक्रियाएं नकारात्मक होंगी ना कि सकारात्मक।


डॉक्टर बेरी एक हास्य अभिनेत्री और गायक हैं वह अपने परिवार में कॉलेज जाने वाली पहली सदस्य थीं। इसलिए जब उन्होंने डिग्री प्राप्त की तो उनकी अपेक्षा थी उनके सभी संबंधी वहां आए जब उन्हें मालूम था कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य नहीं आ रहा है तब उसने निर्णय लिया कि वह दीक्षांत समारोह में हिस्सा नहीं लेंगी लेकिन जब उसके प्रोफेसर ने उसे समझाया तो वह मान गई जब उसने देखा कि उसे 2 बार के नोबेल पुरस्कार विजेता के हाथों से उसे विश्वविद्यालय के सबसे प्रमुख विद्यार्थी की उपाधि मिली है तो वह अचंभित रह गई उसका अहंकार आहत हुआ था लेकिन उसने उस पर विजय प्राप्त कर ली।


5.) स्थिरता के साथ सफलता की सीढ़ियां चढ़ें


आपके मस्तिष्क में उभरने वाले नकारात्मक विचार आपके बीते समय का नतीजा होता है इसलिए उनका सामना सकारात्मक विचारों के साथ शीघ्र और प्रबलता के साथ कीजिए।



6.) खुश रहिए और दूसरों को भी रखिए


खुश रहने के लिए खुशी का प्रदर्शन कीजिए अपने विचारों के लिए नए ढंग से प्रयास कर सकते हैं उत्साही बनिये उत्साह का प्रदर्शन कीजिए खुद पर और समस्त संसार पर हंसीये आपको अगर चिंता करनी है तो सकारात्मक ढंग से चिंता कीजिए अपने सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब psycho-cybernetics में डॉक्टर मैक्सिलेरी में रचनात्मक रूप से चिंता करने के बारे में बताया है वह कहते हैं चिंता करना यह सोचना हो सकता है कि क्या गलत है और इसका समाधान यह है कि जागरूक होकर यह सोचना कि क्या सही हो सकता है।


7.) सहनशीलता की आदत डालिए


लोगों के प्रति खुला मन रखिए लोग जैसे उन्हें वैसे ही स्वीकार कीजिए ना कि यह अपेक्षा रखी है कि वह वैसे हो जाए जैसा आप चाहते हैं। आइए इसे एक सच्ची कहानी से समझते हैं


न्यू इंग्लैंड एक उच्च विद्यालय का छात्र था वह एक बेहतरीन जिम्नास्ट भी था एक चैंपियनशिप मीटिंग के लिए जा रहा था जैसे ही वह एक पुल के ऊपर पहुंचा उसने एक पुल की दरार देखी वह रुक गया और नीचे नदी में एक ट्रक को गिरा हुआ देखा दुर्घटना उसी समय हुई थी ट्रक अभी भी डूब ही रहा था और ट्रक ड्राइवर बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था वह व्यक्ति उफनती हुई नदी में कूद पड़ा घबराए हुए ट्रक ड्राइवर ने खिड़की का शीशा नीचे किया और उस युवक ने अपने वर्षों के प्रशिक्षण और अभ्यास के कारण ट्रक ड्राइवर को ट्रक से बाहर निकाला और तेरकर नदी किनारे पर ले आया और इस तरह ट्रक ड्राइवर की जान बच गयी। वह जिम्नास्ट उस रात उस राज्य स्तरीय मीटिंग में भाग नहीं ले पाया लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि स्कूल अधिकारियों ने पहले ही प्रतियोगिता में उसके प्रवेश को प्रतिबंधित कर रखा था क्योंकि उसके बाल लंबे थे इसलिए कहने का मतलब यह है कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन उसके लंबे बालों से मत कीजिए दया भाव से आपके और दूसरों के मन में भी पॉजिटिव मेंटल एटीट्यूड का आभास होता है खुश रहने के लिए दूसरों को खुश रखें।


8.) प्रार्थना की शक्ति का प्रयोग कीजिए


हो सकता है कि ईश्वर के अस्तित्व के प्रति आप अनिश्चित होंगे आपको यह विश्वास हो कि उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है लेकिन आपको खुद को प्रार्थना की शक्ति में विश्वास दिलाने के लिए आपको कुछ प्रयोग करने होंगे।


एपिस्कोपल के पुजारी सेम सुमे ने 1950 में एक योजना शुरू की जिसे अब पीटर्स बिक्री के नाम से जाना जाता है।


रोहित और व्यापारियों का एक ग्रुप नियमित रूप से मिलते थे कुछ लोगों को ईश्वर की सत्ता में और कुछ लोगों को ईश्वर के अस्तित्व में बिल्कुल भी विश्वास नहीं था उन्होंने उनको 30 दिन तक अपने प्रयोग में शामिल होने को कहा ताकि इस प्रश्न का उत्तर ढूंढ लिया जाए कि ईश्वर का अस्तित्व है भी या नहीं उन्होंने उन सभी व्यक्तियों को अपने दिन की शुरुआत इस प्रार्थना के साथ करने को कहा।


“ईश्वर मैं आज आपको नमन करता हूं आप मेरे लिए क्या लाए है? मैं उसका हिस्सा बनना चाहता हूं।”


फिर उन्होंने उन सभी व्यक्तियों से कहा हर दिन अपने जीवन से जुड़ी घटित होने वाली घटनाओं पर नजर रखें और खुले मन से इस संभावना को देखे की उनके जीवन में ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण जरूर मिलेगा। 30 दिन के इस प्रयोग के बाद उनमें से सभी व्यक्तियों के पास बताने के लिए पॉजिटिव रिजल्ट थे उनमें से हर व्यक्ति को यह एहसास हो गया कि उन्हें कहीं न कहीं अपने जीवन मैं ईश्वर के होने का प्रमाण मिला।


Post a Comment

0 Comments