कोबे ब्रायंट belief system, हिंदी में | Kobe bryant work ethic in hindi

हर बिलीफ सिस्टम चैंपियन के दिमाग में एक खिड़की है अगर हम उस खिड़की के अंदर झांक सके तो बहुत सारी बातें सीख सकते हैं और जल्द से जल्द अपने लिए अप्लाई कर सकते हैं।




सबसे पहली खासियत जो कोबे ब्रायंट के अंदर दिखती है वह है be driven 


कोबे ब्रायंट कहते हैं मेरा सफर शुरू होता है फिलाडेल्फिया से जहां मेरे पिताजी ने 3 साल की उम्र में मेरे हाथ में बास्केटबॉल थमा दी। उनके पिता खुद प्रोफेशनल प्लेयर थे जिन्होंने 8 साल एनबीए खेलने के बाद यूरोप में खेलने का फैसला किया इटली में 6 साल के कोबे को एडजस्ट करना पड़ा क्योंकि इटली में फुटबॉल का कल्चर है। वहां बास्केटबॉल कोर्ट में भी फुटबॉल गोल पोस्ट लगी थी जहां बच्चे दिनभर फुटबॉल खेला करते थे। कोबे कहते हैं मैं भी बच्चों के साथ दिनभर फुटबॉल खेला करता और जब शाम होने पर सब चले जाते तब अकेले तीन-चार घंटे रात में बास्केटबॉल खेला करता था।


अगले 7 साल कोबे कोर्ट पर अकेले प्रैक्टिस करते रहे उनके अकेले खेलते खेलते मेहनत करने की ड्राइव उनके अंदर प्रखर हो गई। ओर 13 साल की उम्र में कोबे यूएसए वापस आए तब आते ही उन्होंने बास्केटबॉल जगत में धूम मचा दी। लगातार चार साल हाई स्कूल को स्टेट चैंपियनशिप जिताई और देश के बेस्ट हाई स्कूल प्लेयर भी बने। उनकी मेहनत और ड्राइव को देखकर उनके कोच को पता था की कोबे कहाँ तक जाने वाले हैं।


कोबे ब्रायंट का यह बहुत अच्छा वर्क सिस्टम है। हमेशा लोग काम करने से कतराते हैं किसी समस्या का हल निकालना या जब ज्यादा दिमाग या मेहनत लगती है तो लोग घबरा जाते हैं क्योंकि बचपन से दिमाग में यह बैठा हुआ है कि दिमाग ज्यादा खर्च नहीं करना मेहनत ज्यादा नहीं करनी। बल्कि सच तो यह है कि जितना ज्यादा मेहनत और दिमाग खर्च करेंगे यह दोनों उतने ज्यादा तेज होते जाएंगे और इसी पर कोबे भी विश्वास करते हैं।


जे विलियम्स जो दूसरी टीम के लिए खेला करते थे कहते हैं कि मैं हमेशा लोगों से ज्यादा काम करता हूं, हमेशा ज्यादा effort डालता हूं इसी से मुझे कॉन्फिडेंस मिलता है। उस दिन शाम को 7:00 बजे गेम था मैंने सोचा कि मैं 3:00 बजे जाकर 400 शॉट्स की प्रैक्टिस करूंगा फिर रिलैक्स होकर गेम के लिए रिकवरी करूंगा जब 3:00 बजे पहुंचा तो देखा कि कोबे ब्रायंट पहले से ही लगे हुए थे फिर मैंने 1 घंटे प्रैक्टिस कि जब मैं थक गया था तब भी कोबे लगे हुए थे। विलियम्स कहते हैं कि जब मैं आया था तब भी कोबे पसीने से लथपथ था और अभी भी वह नहीं रुका था। कोबे प्रैक्टिस में टाइम पास नहीं कर रहा था अच्छे खासे गेम मोड में प्रैक्टिस कर रहे थे। एक गेम में पूरी एनबीए टीम 90 पॉइंट्स बनाती है और उस दिन में कोबे अकेले ने 40 पॉइंट बनाएं।


विलियम्स कहते हैं कि मैच के बाद मैंने कोबे से पूछा कि आप जिम में इतना पहले से क्यों थे?

कोबे कहते हैं कि मैंने आपको आते हुए देखा था। और मैं सब लोगों को बताना चाहता हूं कि आप जितना मर्जी चाहे मेहनत कर लो मैं हमेशा आपसे ज्यादा करूंगा। जे विलियम्स कहते हैं कि उस दिन मैंने देखा कि टॉप प्लेयर्स किस लेवल पर सोचता है। लेकिन बात केवल टॉप प्लेयर की नहीं है जब तक आप किसी चीज में ज्यादा समय नहीं लगाते आप कभी बेहतर नहीं कर सकते।


अगली चीज जो कोबे कहते हैं मैं कभी भी संतुष्ट नहीं होता जब तक कि मैं अपना 100% नहीं देता वह कहते हैं कि अगर आपका जॉब बेस्ट बास्केटबॉल प्लेयर बनना है। तब आपको बेसिक चीजें क्या करनी होंगी? आपको गेम में काम आने वाली स्किल्स पर काम करना होगा और साथ में मेंटल और फिजिकल ट्रेनिंग भी करनी होगी। इन सब के लिए आप जितना ट्रेनिंग प्रैक्टिस कर सको उतना ही बढ़िया और यह सब करने के लिए आपको चाहिए समय।


कोबे कहते हैं मान लीजिए अगर आप सुबह 8:00 बजे उठते हैं और 10:00 बजे ट्रेनिंग शुरू करते हो आपने 10 से 12 ट्रेनिंग की उसके बाद रिलैक्स किया और रिकवरी ली 3 - 5 ट्रेनिंग की फिर एक ब्रेक लिया फिर एक सेशन शाम 7:00 से 8:00 किया। देर रात एथलीट के लिए प्रैक्टिस करना सही नहीं है क्योंकि इससे शरीर की हारमोन साईकिल डिस्टर्ब होती है।


कोबे आगे कहते हैं कि अब मान लीजिए मैं हर दिन 3:00 बजे उठकर 4:00 बजे से प्रैक्टिस शुरू करता हूं पहला 4 - 6 दूसरा 9 - 11 और तीसरा 2 से 4 और फिर शाम को 6:00 से 8:00 देखिए मैंने सिर्फ 3:00 बजे उठकर 1 दिन में कितना काम कर लिया और शरीर भी रिकवर कर लिया। जैसे हफ्ते महीने और साल निकलते जाएंगे मेरी ट्रेनिंग बाकी लोगों से कितना आगे निकलती जाएगी।


इंटरव्यूवर कोबे से पूछते हैं कि क्या यह ड्राइव आपके अंदर जेनेटिक है?  

कोबे कहते हैं कि मेरे हिसाब से तो यह कॉमनसेंस है क्योंकि मैं बाकी प्लेयर्स का रूटीन जानता हूं अगर मुझे एडवांटेज बनना है तो मुझे ज्यादा ट्रेनिंग करना पड़ेगी। कोबे आगे पूछने पर बताते हैं कि जब हमने हाई स्कूल शुरू कर दिया था सुबह क्लास 7:45 बजे से शुरू होती थी और मैं सुबह 5:00 बजे पहुंच जाता था जहां मुझे कभी कोच और कभी जेनिटर मिल जाते थे जिनके साथ में प्रैक्टिस और ड्रिल किया करता। फिर स्कूल जाकर काम करता और घर जाकर गेम्स की क्लिप्स देखकर गेम के बारे में और समझने की कोशिश करता फिर शाम को ट्रेनिंग करता।


कोबे कहते हैं आज भी कभी-कभी मैं सुबह में अकेले ट्रेनिंग करता हूं क्योंकि इतनी सुबह कोई मिलता ही नहीं फिर इंटरव्यूअर ने पूछा कि आप इसे कुछ भी कहो ड्राइव डिसिप्लिन या एथिक यह आपने सीखा कैसे? 


कोबे कहते हैं की आप के लिए सबसे जरूरी क्या है? मेरे लिए बास्केटबॉल थी जिस दिन मुझे लगता कि मैं अपना पूरा एफर्ट नहीं लगा पाया उस दिन मुझे बहुत तकलीफ होती थी और रात को नींद नहीं आती थी।


दोस्तों जैसा कि हमने देखा है कि वर्क एथिक हमारे self belief से पैदा होते हैं जैसा आप अपने बारे में सोचते हो उतना जिंदादिली और इमानदारी से आप काम भी करते हो। एक belief वह विचार है जिसे आप पूरी तरह सच मानते हो जो विचार हम बिना किसी संदेह के सच मान लेते हैं तो वह विचार हमारी रियलिटी बन जाते हैं। जैसे अगर आप हरे कलर का चश्मे लगा ले तो आपको सब कुछ हरा हरा नजर आएगा। उसी तरह अगर मान लो कि जिंदगी बड़ी कठिन है या मैं उतना लायक नहीं हूं तो आपको हर काम कठिन लगेगा और आप कई काम तो शुरू ही नहीं कर पाओगे।


तो हम जल्दी से जल्दी अपने Negative belief कैसे तोड़े और पावरफुल beliefs सिस्टम कैसे बनाएं?


इसका जल्दी और आसान तरीका है कि जिस भी बिलीफ थॉट को तोड़ना है उसके साथ बहुत बड़ा दर्द जोड़ दीजिए। यहां हम कोबे का ही उदाहरण रख लेते हैं वह कहते थे कि जिस दिन मुझे लगता था कि मैं अपना पूरा एफर्ट नहीं लगा पाया। उस दिन मुझे बहुत तकलीफ होती थी अगर कोबे की की तरह हमारे दिमाग में बैठ जाए कि अगर मैंने मेहनत नहीं कि अपना 100% फोकस देने की आदत नहीं डालें तो मैं कभी अच्छा नहीं खेल पाऊंगा और ना ही मैं कभी अपने चरम पर पहुंच पाऊंगा मेरे सामने मेरे दोस्त और दूसरी टीमें आगे निकल जाएंगी और मैं पीछे से उन्हें देखता रह जाऊंगा, मैं जिंदगी भर दुखी ही रहूंगा और मैं कभी अपने आप से नजरें नहीं मिला पाऊंगा।


ऐसा सोचते हैं कि आप उसी समय महसूस करेंगे कि आपका पूरा नर्वस सिस्टम एक्शन मोड में आने के लिए तैयार हो गया है। क्योंकि हमारा दिमाग हमेशा दर्द से आराम की तरफ जाना चाहता है। आप उसी समय action लेकर अपने आप से कह सकते हो की आज से 100% focus मेरी ताकत है मैं इसे धीरे-धीरे अपनी पूरी ताकत बना लूंगा और इसकी मदद से अपने सारे काम करूंगा। और हम जैसे एक्शन लेकर 1- 1 इंट लगाते जाएंगे वैसे वैसे पावरफुल belief से work ethic की दीवार खड़ी होती जाएगी। Negative belief धीमा जहर है जो  हमें एक्शन लेने से रोकता है लेकिन जब हम बड़ी पिक्चर में दर्द को देखते हैं तब समझ आता है कि negative belief की इतनी भारी कीमत है और उसे छोड़कर तत्काल भागना चाहते हैं। क्योंकि हमारे दिमाग का डिजाइन ही ऐसा है कि जो हमेशा दर्द से आनंद की तरफ भागना चाहता है।


अगर आपको पावरफुल बिलीफ़ बनाना है तो पहले नेगेटिव बिलीफ को उखाड़ फेकिए और उस जगह पॉजिटिव बिलीफ बनाकर उसे एक्शन से सींचिये।


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