मन्मथनाथ गुप्त के 20+ अनमोल विचार | Manmath Nath Gupta quotes in hindi

मन्मथनाथ गुप्त के 20+ अनमोल विचार | Manmath Nath Gupta quotes in hindi


दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी ओर लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म 7 फरवरी 1908 को हुआ वह एक भारतीय क्रांतिकारी लेखक और हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली में आत्मकथात्मक, ऐतिहासिक और काल्पनिक पुस्तकों के लेखक थे। वह 13 साल की उम्र में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य थे।


मन्मथनाथ गुप्त जयंती के 20+ अनमोल विचार | Manmath Nath Gupta quotes in hindi


मन्मथनाथ गुप्त के 20+ अनमोल विचार | Manmath Nath Gupta quotes in hindi

मन्मथनाथ गुप्त के 20+ अनमोल विचार | Manmath Nath Gupta quotes in hindi


●•● प्रगतिशील होना या प्रगतिशील का तकाजा करना उतना बड़ा पाप नहीं जैसा कि कुछ साहित्यकारों ने प्रचार कर रखा है प्रगतिशीलता के विरुद्ध जो वातावरण उत्पन्न हुआ है उसके कारण को भी ढूंढना पड़ेगा क्योंकि इसे किए बिना हम प्रगति शीलता को उसके उच्च स्थान पर स्थापित नहीं कर पाएंगे।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● यह स्पष्ट है कि समाज में निरंतर विकास हो रहा है इसका अर्थ यह कदापि नहीं की समाज का मान भी उपादान है। यदि कुछ भी प्रयास ना करें तो भी प्रगति होगी। प्रगति प्रयास में अंतर्निहित है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● कोई यदि क्रांति के जोश में आकर कनस्तर पीट दे और साथ में जोर जोर से चिल्लाए तो उसके चिल्लाने को महज इसलिए कि वह क्रांतिकारी जोश से उद्भूत हुआ है इसे संगीत नहीं कहा जा सकता।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● हमारे नए स्वतंत्र देश में इस बात की आवश्यकता है कि साहित्य लोगों में आशा उत्पन्न करके नए संग्राम के लिए हमको तैयार करे।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● कांग्रेस के पहले के नेताओं की तुलना में गांधीजी एक बहुत बड़े क्रांतिकारी थे और उनका असहयोग वाला अस्त्र पहले के कांग्रेसी नेताओं के बीच भिक्षापात्र वाले साधन से कहीं क्रांतिकारी था।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● यह बात नहीं है कि भारतवर्ष में असहयोग से पहले कोई जन आंदोलन नहीं हुआ हुआ और उनमें से कई शक्तिशाली थे। बंग भंग आंदोलन निश्चित रूप से एक जन आंदोलन था इसने बंगाल की हिंदू जनता को बहुत गहराई तक स्पर्श किया।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● भगत सिंह ने कोई जादू नहीं किया था भगत सिंह ने क्रांतिकारी दल को जनता के साथ जोड़ दिया बस यही उनका जादू था। जनता के साथ क्रांतिकारी आंदोलन को जोड़ने की यह कला बंग भंग के दौरान लुप्त सी हो चुकी थी भगत सिंह ने पंजाब और उत्तर भारत में इस लुप्त कला का पुनरुद्धार किया यही उनकी अभूतपूर्व सफलता का रहस्य था।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● झूठ बोलना सभी सदाचार के अनुसार बुरा अनैतिक या अधार्मिक है किंतु किसी भी देश के कानून में झूठ बोलना अपराध नहीं है हां यदि अदालत में खड़े होकर कोई झूठ बोले तो उसकी बात और है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● यदि हम असभ्य लोगों के रिवाजों की बात करेंगे तो पाएंगे कि उनमें जो बात निषिद्ध थी वह बात अपराध भी थी यह  समझा जाता था कि कोई अपराध करता है तो उसकी बलि चढ़ाकर या उसके परिवार की बलि चढ़ा कर देवता के क्रोध को शांत करना चाहिए।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● राजनीतिक दल या श्रेणियां अपनी बिगड़ी को बनाने के लिए या अपने बने बनाए श्रेणीस्वार्थ को और बढ़ाने या पुख्ता करने के लिए अब भी धार्मिक नारों की आड़ लेते हैं और यह तरीका अभी भी काम दे जाता है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● जिस समय चीनी पर्यटक फाहियान पांचवी शताब्दी में बंगाल में आए उस समय बंगाल की कम से कम पश्चिम और उत्तर में आर्य संस्कृति और भाषा का प्रचार हो चुका था।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● इसमें संदेह नहीं कि विद्यापति ने मैथिली भाषा में रचना की पर बंगाल में उनकी रचनाओं का जो संस्करण प्रचलित है वह मैथिली में प्राप्त संस्करण से कुछ अलग है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● प्रेमचंद हिंदी साहित्य की ही नहीं बल्कि भारतीय साहित्य की सर्वश्रेष्ठ विभूतियों में से हैं उनके महत्व को अब लोग कुछ कुछ समझने लगे हैं।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● उपन्यास एक ऐसी कला है जिसमें मनुष्य के समग्र जीवन को उसके सारे ब्यौरों में चित्रित करने की चेष्टा की जाती है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● एक ही कहानी का अर्थ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है ओर न यह अर्थ है कि उस व्यक्ति से निकट तथा प्रत्यक्ष रूप से संबंध व्यक्तियों की कहानी हो।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● संगीत में यदि गला अच्छा हुआ और गायक या गायिका का चेहरा प्रीतिकर हुआ तो उतना सही एक सुर में गाए गए एक ही गाने के असर में बहुत फर्क हो जाता है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● अच्छे से अच्छे नाटक रद्दी अभिनेताओं के खेले जाने पर निकृष्ट मालूम होते हैं और रद्दी से रद्दी नाटक भी अच्छे अभिनेताओं के हाथ में पढ़कर चमक उठता है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● बच्चों को जब तक सदाचारी नहीं बनाया जाएगा और मानवता के आधारभूत सिद्धांत नहीं समझाए जाएंगे तब तक ना तो अच्छे नागरिक बन सकेंगे और ना ही अच्छे राष्ट्र निर्माता।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● धर्म क्या है और क्या नहीं इस संबंध में धार्मिक लोगों में भी बड़ा मतभेद है फिर भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि जो केवल अपने लिए जीता है उसका जीवन घटिया है इसके विपरीत जो लोग दूसरों के लिए जीते हैं वह लोग महान हैं।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● सुख और शांति किसमें है? क्या अच्छा भोजन करने में हैं? अगर ऐसा है तो 24 घंटे किसी आदमी को अच्छा भोजन ही खिलाते रहो तो क्या वह सुखी होगा थोड़ी देर के बाद ही उसका पेट अफर जाएगा।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● क्या आपने कभी सुना है कि किसी को ज्यादा ज्ञान प्राप्त करने से बदहजमी हो गई हो? आदमी जितना ज्ञान बढ़ाता है उसको उतना ही सुख मिलता है।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● किसी काम को सीखने की दो रीतियां हैं या तो हम दूसरे लोगों से कोई बात सीखते हैं या किताबे पढ़कर।


मन्मथनाथ गुप्त


●•● बार-बार रस्सी की रगड़ से पत्थर में भी निशान पड़ जाता है बार-बार अच्छी बातें सुनने को मिलेगी तो अच्छे बनोगे बुरी बात सुनते रहोगे तो बुरे ही बनोगे।


मन्मथनाथ गुप्त

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