एक चैम्पियन की तरह कैसे सोचें | how to think like a champion in hindi


एक चैम्पियन की तरह कैसे सोचें | how to think like a champion in hindi


एक चैंपियन का सफर बहुत इंस्पायरिंग होता है। क्योंकि यह सफर दिल और दिमाग से पूरा होता है। skill, strategy और Emotion इन तीन बातों को हम दुनिया के सबसे बेहतरीन एथलीट कोच Bob Bowman की नजरों से इस पोस्ट में डिटेल में जानेंगे।


चैंपियन एक सपने का पीछा करते हैं असल में सपने की शुरुआत होती है एक Emotion और इच्छा के मिलने से और यही Emotion चैंपियन को आगे ले जाता है। यह लोग accident, failures और बुरे समय से इसी Emotion और Passion की दम पर निकल पाते हैं। यह सपना बहुत critical है यहीं से सारी कहानी शुरू होती है।


फेल्प्स कुछ खास करना चाहता था वह एक महान एथलीट बनना चाहता था। लेकिन इसके पीछे बहुत बेसिक इमोशन छुपा था जो हर बच्चे का अपने माता-पिता के लिए होता है। फेल्प्स के माता-पिता का तलाक छोटी उम्र में ही हो गया छोटे फेल्प्स पर बचपन से इस बात का गहरा असर हुआ उनको लगता था कि मेरे पिता मुझे छोड़ कर चले गए क्योंकि मुझ में कुछ कमी है। इसीलिए वह हमेशा ही कुछ खास करना चाहते थे पहले वह ओलंपिक्स में जाना चाहते थे बाद में दुनिया के महान एथलीट बनना चाहते थे असल में वह एक Emotion Chase कर रहे थे। एक्सेप्टेंस कि मैं एक स्पेशल हूं।


जब इमोशंस सपने का रूप लेकर आपके सबकॉन्शियस माइंड में जगह बना लेता है तो आपके अंदर क्रिएटिव प्रोसेस जाग जाता है। दिमाग goal के लिए काम करना शुरू कर देता है और कई चीजें अपने आप होने लगती हैं। सपना आपको हर दिन बिस्तर और थकान से बाहर निकालता है हर दिन आपसे सही निर्णय दिलवाता है। Coach बार-बार कहते हैं कि यह बहुत जरूरी है क्योंकि कोई भी हर दिन बिना डिसीजन लिए चैंपियन नहीं बन सकता।


Coach कहते हैं कि कहीं भी पहुंचने के लिए goals चाहिए goals तो सब बनाते हैं। लेकिन चैंपियंस गोल्स की intensity बढ़ा देते हैं। कोच कहते हैं कि हम स्विमिंग प्रोग्राम में बच्चों से एक लंबा प्रोसेस करवाते हैं जिससे वह अपने ड्रीम गोल से जुड़ सकें हम उस गोल से फिर उल्टा चलना शुरू करते हैं और एक प्लान तैयार करते हैं। माइकल का सफर 8 से 10 साल का था हमको अंदाजा था कि यह लड़का कहां जा सकता है बीच में ओलंपिक्स के दो गोल्स भी थे। हमने डिसाइड किया कि हम 1 साल में क्या हासिल करना चाहते हैं। जिससे कोच, ट्रेनर और एथलीट को पता होता है कि हर दिन हम सबको exactly क्या करना है?


कोच कहते हैं कि सबसे खास वह पल होता है जो एक चैंपियन और दूसरों में अंतर करता है कि आप गोल सेट करने के बाद तत्काल क्या कदम उठाते हो और कैसे डिसीजन लेते हो।


जैसे आपने डाइटिंग का गोल बनाया अब आपके पास मिठाई है आप मिठाई मुंह में रखते हो या वापस प्लेट पर रख देते हो इस मोमेंट में आप की प्रोग्रेस तय होती है कोच ने इस बात को कितना सरल कर दिया।


कोई भी हर दिन बिना सही डिसीजन लिए सफल नहीं हो सकता।


कोच कहते हैं कि माइकल फेल्प्स गोल सेटिंग में एक्सपर्ट है। क्योंकि वह गोल्स को प्रोसेस ऑफ डिसीजन में बदलते हैं जब वह 13 साल के थे तब हमने तीन गोल बनाएं उसने वह तीन गोल एक कागज पर लिख लिखकर अपने रेफ्रिजरेटर पर लगा लिया। मुझे पता था कि वह एक दिन महान एथलीट बनेगा। क्योंकि वह हर दिन अपने गोलपुरा करता था। उसे जिस भी शेड्यूल में रखो उसे जो भी ट्रेनिंग सिखाओ वह सब इमानदारी से सीखता और अप्लाई करता। आप हर दिन क्या डिसीजन लेते हो वह आपकी प्रोग्रेस होती है।


कोच कहते हैं कि चैंपियंस में अगली खासियत यह होती है कि वह हमेशा चैलेंजेस का सामना करते हैं।


किसी को भी हारना पसंद नहीं होता। हार सबके मुंह में एक कड़वा स्वाद देकर जाती है लेकिन एक चैंपियन के दिमाग में बैठा होता है कि वह घटना दुर्घटना से ही हम मजबूत बनते हैं। 2007 मेलबर्न वर्ल्ड चैंपियनशिप में फेल्प्स ने  7 gold जीते और 6 वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़े। बीजिंग ओलंपिक्स के लिए वह पूरी तरह तैयार थे। वापस आकर ट्रेनिंग बहुत बढ़िया चल रही थी फिर एक दिन फोन आता है कि माइकल फेल्प्स गिर गया है और उसका हाथ टूट गया है कुछ बताते हैं कि जब मैं हॉस्पिटल पहुंचा तो माइकल एकदम घबराया हुआ था साथ में वह अपने ऊपर गुस्सा भी था उसने मुझे देखते ही कहा कि मेरे हाथ से तीन गोल्ड चले गए और वह सही कह रहा था ओलंपिक्स के लिए अब केवल 9 महीने बाकी थे और हमको पता नहीं था कि कितना नुकसान हो गया


कोच कहते हैं कि मैंने सोचा चलो पहले facts जानते हैं फिर थोड़ी जानकारी इक्कठी करते हैं फिर सोचेंगे कि क्या करना है।


डॉक्टर्स ने कहा कि फैक्चर है, अगर प्लास्टर चलाएंगे तो डेढ़ महीना लगेगा, कोच ने कहा कि डेढ़ महीना ट्रेनिंग से बाहर रखना तो संभव नही है कोच ने कहा कि इसके अलावा और क्या कर सकते हैं? डॉक्टर ने कहा फिर सर्जरी करके स्क्रू कस देते हैं stiches सूखने में 10 दिन का समय लगेगा दर्द की दवाइयां चलती रहेंगी लेकिन वह ट्रेनिंग कर सकता है। फिर अगले दिन फेल्प्स की सर्जरी हो गई और उसी दिन से माइकल फेल्प्स ने स्टेशनरी साइकिल पर हर दिन 3 घंटे ट्रेन करना शुरू कर दिया। कोच कहते हैं कि असल में हमने थोड़ी चीटिंग भी कि उस 10 दिन फेल्प्स अपनी stiches पर प्लास्टिक बैग बांधकर पानी में भी चला जाता। जिससे वह kicking प्रैक्टिस कर सके।  चैंपियन  समय के साथ एक मानसिक क्षमता बना लेते हैं कि वह किसी ही Disappointment या Failure से बहुत जल्दी निकल सकते हैं।


दो हफ्तों बाद फेल्प्स वापस ट्रेनिंग पर आ चुका था ट्रेनिंग का पहले जैसा लेवल नहीं था लेकिन उसका कमिटमेंट पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका था। अगली विशेषता जो चैंपियंस में होती है कि वह हमेशा अपने स्टैंडर्ड के हिसाब से कंसिस्टेंट और प्रिडिक टेबल रिजल्ट लाते हैं उन हालातों में भी जो बाकियों के लिए असंभव होते हैं।


ओलंपिक में आपको होटल का एक अलग से रूम नहीं मिलता आप 8 लोगों के साथ एक बड़े ड्रोम में रहते हो कई प्रकार की दिक्कत है हो सकती है। इसलिए कोच कहते हैं कि हम स्विमर को सिखाते हैं कि आप बुरी परिस्थितियों में भी अपना सर्वोत्तम परफॉर्मेंस दे सके। उनके कोच कहते हैं कि एक बार मैंने फेल्प्स का चश्मा बिगाड़ दिया। जिससे प्रैक्टिस के दौरान उसकी आंखों में पानी भरता रहा स्विमिंग में लेप के अंत में टर्न लेने के लिए आपको दिखना चाहिए नहीं तो आपको दीवार का अंदाजा नहीं लगेगा और कीमती सेकंड खराब हो जाएंगे। जब ओलंपिक की फाइनल हीट में फेल्प्स का चश्मा खराब हुआ तो वह इस अनुभव के लिए पहले ही तैयार था उसे पता था कि 21 स्ट्रोक के बाद लेप पूरा होता है फेल्प्स ने अपने 21 स्ट्रोक गिन लिए और बंद आंखों से वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।


Compitition में आपकी कौन सी रैंक का आती है यह दूसरे प्रतिभागियों पर भी निर्भर करता है। इस बात को चैंपियन बहुत अच्छी तरह समझते हैं कि process is the more important than the outcomes क्योंकि आप प्रोसेस को कंट्रोल कर सकते हो। कोच कहते हैं कि चैंपियन अपनी सफलता के लिए हर दिन तैयारी करते हैं मेंटली फिजिकली और इमोशनली तरीके से वह शरीर के साथ अपने मन विचार और इमोशन को सर्वोत्तम स्थिति में रखते हैं और हर दिन वैसे ही आचरण करते हैं और यही हाईएस्ट लेवल पर बहुत ज्यादा जरूरी है।


कुछ बातें जो हमने सीखीं


● चैंपियन स्किल इमोशन और स्ट्रैटेजि का अच्छा स्टूडेंट होता है चैंपियन हमेशा एक सपने को जीता है। जब इमोशंस सपने का रूप लेकर आपके अवचेतन मन में जगह बना लेता है तब आपके अंदर क्रिएटिव प्रोसेस जाग जाता है पूरा दिमाग goal के लिए काम करना शुरू कर देता है।


● आपके गोल डिसीजन में तब्दील होना चाहिए क्योंकि हर दिन कोई भी बिना सही डिसीजन के सफल नहीं हो सकता चैंपियन किसी भी बुरी परिस्थितियों से बहुत जल्दी बाहर निकल सकते हैं क्योंकि चैंपियन चेलेंज को वेलकम करते हैं।


● एक चैंपियन के दिमाग में बैठा होता है कि घटना दुर्घटना से ही गुजर कर हम मजबूत होते हैं।


● चैंपियंस हमेशा मेंटली तैयार रहते हैं इसलिए वह हमेशा कंसिस्टेंटली परफॉर्म करते हैं।


● वह शरीर के साथ-साथ अपने मन विचार और इमोशन को सर्वोच्च स्थिति में रखते हैं और हर दिन वैसे ही एक्शन लेते हैं।

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