चालाक दर्जी और मूर्ख राजा हिंदी कहानी | Foolish king moral story in hindi

चालाक दर्जी और मूर्ख राजा हिंदी कहानी | Foolish king moral story in hindi


Foolish king moral story in hindi

Foolish king moral story in hindi


एक राजा को नए नए कपड़े पहनने का विचित्र शौक था इसके लिए वह अपने खजाने का सबसे बड़ा भाग खर्च किया करता था। वह अपनी प्रजा पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता था। वह दुनिया के कोने-कोने से सुंदर और खूबसूरत कपड़े मंगवाता था। और अच्छे से अच्छे दर्जी से उन कपड़ों को सिलवाता परंतु बढ़िया से बढ़िया कपड़ा भी एक बार पहनने पर वह उन्हें दोबारा नहीं पहनता। राजा के इस व्यवहार से राज्य की आर्थिक दशा पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था।


राजा के इस शोक का पता एक ऐसे आदमी को लगा जो अपने कामों में बहुत होशियार था। एक दिन वह अपने तीन चार आदमियों को साथ लेकर राजा के दरबार में उपस्थित हुआ। उसने राजा को अपना परिचय देते हुए कहा कि वह दुनिया के बड़े-बड़े राजाओं के कपड़े सिल चुका है। दर्जी ने विस्तार से अपना परिचय देते हुए बताया कि किस प्रकार चीन, अमेरिका, जापान और इंग्लैंड देश के राजाओं ने उसके सिले कपड़े पहन कर उस पर पुरस्कारों की बौछार की जिससे वह मालामाल हो गया।


“दर्जी हम भी तुम्हें मालामाल कर देंगे अब तुम बताओ तुम मेरे लिए कैसा कपड़ा बनाओगे?”- राजा ने कहा


“हुजूर मैं आपके लिए ऐसा कपड़ा तैयार करूंगा जिसे कोई मूर्ख, अन्यायी और बेईमान नहीं देख सकेगा ऐसा कपड़ा दुनिया में किसी भी राजा महाराजा के पास नहीं है”- दर्जी ने कहा


“आश्चर्य...!! बेशक तुम मेरे लिए ऐसा कपड़ा तैयार कर सकते हो”


“परंतु हुजूर कपड़ा में स्वयं अपने हाथों से बना कर तैयार करता हूं”


“ऐसी पोशाक तुम मेरे लिए कितने दिन में तैयार कर दोगे” - राजा ने कहा


“हुजूर लगभग एक या डेढ़ महीना तो लग ही जाएगा”- दर्जी ने कहा


“मैं तुम्हें 2 महीने का समय देता हूं इसके लिए हमको तुम्हें क्या मूल्य देना पड़ेगा?”


“मुझे आप ₹50 हजार पहले दे दीजिए और ₹1 रुपये कपड़ा पसंद आने पर दीजिएगा”


उसी समय दर्जी को ₹50 हजार रुपये कपड़ा तैयार करने के लिए दे फिये गए और एक अलग जगह की व्यवस्था कर दी गई। दर्जी अपने तीन चार आदमियों को लेकर उस जगह आराम से समय काटने लगा कुछ दिनों बाद राजा ने अपने एक दरबारी को दर्जी के पास भेजा दरबारी वहां पहुंचा और देखा कि वह सब आराम से सो रहे थे। दरबारी ने दर्जी को जगा कर पूछा;


“कितना कपड़ा तैयार हो गया है राजा ने मुझे देखने के लिए भेजा है”


दर्जी एकदम चौक कर उठता है और कहता है;


“आइए मैं तुम्हें दिखाता हूं कि कितना कपड़ा तैयार हो चुका है”


दर्जी ने दरबारी को एक अलग कमरे में ले जाकर करघे पर कपड़ा बुनने का अभिनय करके दिखाया


“देखिए कितना सुंदर कपड़ा बुना जा रहा है”


किंतु दरबारी को तो वहां ना कपड़ा ना करघा कुछ भी दिखाई ना दे रहा था। दरबारी भौचक्का रह गया वह सोचने लगा कि कपड़ा तो दूर रहा मुझे तो हथकरघा भी दिखाई नहीं दे रहा है। अब दरबारी को दर्जी की वह बात याद आएगी जो मूर्ख बेईमान अन्यायी होगा उसे यह कपड़ा दिखाई नहीं देगा क्या मैं ऐसा ही व्यक्ति हूं दरबारी सोचने लगा विवश होकर उसने कहा;


“सचमुच कितना बढ़िया कपड़ा है वाह-वाह कुछ बहुत ही सुंदर कपड़ा तैयार हो रहा है”


राजा ने जब इस बात को सुना तो वह बहुत खुश हुआ उसने दर्जी और कारीगरों की सुविधाओं को और बढ़ा देने का हुक्म किया एक महीने बाद राजा ने अपने मंत्री को दर्जी का कामकाज और कपड़ा देखने के लिए भेजा मंत्री के आने की सूचना पाकर दर्जियों ने अपने कारीगरों को सजग कर दिया मंत्री जब दर्जियों के पास पहुंचा तो दर्जी अपने आदमियों के साथ कपड़ा काटने और सिलने का अभिनय कर रहा था।


“देखिए मंत्री जी कितना सुंदर कपड़ा और कैसी सुंदर पोशाक तैयार हो रही है”


दर्जी ने हवा में हाथ मारते हुए मंत्री को दिखाया किंतु मंत्री बेचारा हक्का-बक्का रह गया उसने देखा कि दरजी हथकरघा चला रहा है। लेकिन कपड़ा तो है ही नहीं एक कारीगर सुई से सिलने का काम कर रहा है लेकिन उसके हाथ केवल अभिनय कर रहे हैं वहां कोई कपड़ा है ही नहीं न ही सुई दिखाई दे रही है ना धागा और ना कपड़ा मंत्री ने सोचा मुझे कुछ दिखाई क्यों नहीं दे रहा है।


उसे दर्जी की बात याद आयी की जो मूर्ख बेईमान और अन्यायी होगा उसे या कपड़ा दिखाई नहीं देगा उसने सोचा क्या मैं मूर्ख बेईमान और अन्यायी हूं? यदि राजा को यह पता चल जाएगा तो वह मुझे फांसी पर लटक वा देगा विवश होकर मंत्री ने भी दर्जी की हां में हां मिलाई और कहा वाह वाह सचमुच बहुत सुंदर कपड़ा है यह।


दर्जी के पास से लौटकर मंत्री ने राजा को बताया “सचमुच ऐसा सुंदर बहुमूल्य कपड़ा मैंने ना पहले कभी देखा था ना कभी सुना था”


यह सुनकर राजा बहुत खुश हुआ


दूसरे दिन दर्जी पूरी पोशाक तैयार कर के दरबार में उपस्थित हुआ


“आइए महाराज पहनिये यह कितना सुंदर और बहुमूल्य कपड़ा ओर पोशाक हमने आपके लिए तैयार किया है”


राजा भी भौचक्का रह गया क्योंकि उसे कोई कपड़ा दिखाई ही नहीं दे रहा था उसने भी यह सोचा क्या मैं मूर्ख बेईमान और अन्यायी हूं और विवश होकर उसने भी वही कहा जो मंत्री और दरबारी ने कहा था।


“सचमुच ऐसा कपड़ा ना मैंने पहले कभी देखा था ना पहना था”


दर्जी ने राजा को शीशे के सामने खड़ा करके उसके कपड़े उतरवा दिए और राजा को नई पोशाक पहनाने का अभिनय करने लगा कभी वह बटन बंद करता कभी कॉलर सीधा करता और कहता देखिए महाराज यह कितनी सुंदर पोशाक है।


सारे दरबारियों के बीच शीशे के सामने खड़ा राजा दर्जी की हां में हां मिलाते हुए बोला सचमुच ऐसे सुंदर कपड़े ना पहले कभी देखा था ना पहले कभी पहना था। राजा ने तुरंत दर्जी को ₹1 लाख रुपये और देने का हुक्म दिया दर्जी रुपए लेकर अपने आदमियों सहित नौ दो ग्यारह हो गया। 


राजा के नए कपड़े सारी प्रजा को दिखाने के लिए जुलूस का प्रबंध किया गया सारी प्रजा राजा के नए कपड़े देखने के लिए बड़ी उत्सुक थी राजा को रथ पर खड़ा करके प्रजा को दिखाने के लिए सवारी निकाली गई रथ आगे बढ़ता व रथ के दोनों और हजारों की संख्या में खड़ी जनता तालियां पीट-पीटकर वाह-वाह कर रही थी क्योंकि सारी जनता को यह मालूम था कि जो मूर्ख बेईमान और अन्यायी होगा उसे कपड़ा बिल्कुल दिखाई नहीं देगा थोड़ी दूर पर बैठे एक बच्चे ने राजा को बिना कपड़े पर रथ पर बैठे देखा और जोर से चिल्ला कर कहा “राजा तो रथ पर नंगा खड़ा है”


सब लोग बच्चे का मुंह ताकने लगे फिर क्या था सारी प्रजा एक स्वर में एक साथ चिल्ला उठी “राजा रथ पर नंगा ही खड़ा है” अब राजा को भी अपनी मूर्खता का एहसास हुआ वह लज्जा के मारे मानो धरती में ही गढ़ गया हो।


कहानी से मिली सीख


कभी भी किसी भी चीज़ की फिजूल ख़र्चा नही करना चाहिए और न ही किसी भी चीज़ का ज्यादा लालच हमेशा अपनी सूझ बूझ ओर समझदारी से काम करना चाहिए नही ताकि कोई भी हमको मूर्ख न बना पाए।


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