पब्जी गेम ओर मोबाइल की लत | Motivational story in hindi for students

Motivational story in hindi for students


पब्जी गेम ओर मोबाइल की लत | Motivational story in hindi for students

Inspirational Story for students


मोहित ने कुछ महीने पहले ही 12वीं का एग्जाम पास किया है और उसमें उसे अच्छे नंबर प्राप्त हुए थे। लेकिन पहले कुछ महीनों से जब से उसने कॉलेज में दाखिला लिया है, जब से उसके पिताजी ने उसे मोबाइल दिलाया है वह अधिकतर समय अपने मोबाइल में ही लगा रहता है। वह कॉलेज भी नाम मात्र के लिए जाता है क्योंकि उसका ज्यादातर समय व्हाट्सएप, फेसबुक और पब्जी खेलने में ही निकल जाता है पब्जी का तो मानो उस पर भूत सवार हो गया हो। रात्रि समय में खाना बनाने के बाद जब भी मां उससे खाना खाने को कहती है तो मोहित का हमेशा एक ही जवाब होता है, 5 मिनट के बाद मम्मी...  और उसका यह 5 मिनट कभी खत्म नहीं होता जब सब लोग खाना खा लेते तब वह 12:00 या 1:00 बजे खाना खाता और सो जाता कभी-कभी तो वह बिन खाना खाए ही सो जाता। उसके माता-पिता को उसकी सेहत की उसके करियर और फ्यूचर की चिंता होने लगी वह उसे बार-बार समझाते लेकिन मोहित का उन पर जरा भी असर नहीं होता।


एक दिन उसके पिता दफ्तर तो चले गए लेकिन अपना टिफिन बॉक्स घर पर ही भूल कर चले गए, मां ने जब वह टिफिन देखा तो उन्होंने मोहित से कहा कि मोहित तुम अपने पापा के दफ्तर जाओ और यह टिफिन देकर आओ। मोहित पब्जी खेलना छोड़ कर जाना तो नहीं चाहता था लेकिन मां के बार बार कहने पर वह जाने को तैयार हो गया। वैसे तो कई बार वह बाहर से अपने पिता के ऑफिस को देख चुका था लेकिन पहली बार वह आज ऑफिस के अंदर दाखिल हुआ था। 


वहां उसने एक व्यक्ति से अपने पिता के बारे में पूछा तो उस व्यक्ति ने ऑफिस की बिल्डिंग के बगल में बने एक छोटे से कमरे की ओर इशारा करके बताया मोहित उस कमरे में गया तो उसने देखा उस छोटे से कमरे में एक छोटा सा गैस स्टोव रखा था वहां पर कप थे और चाय के गिलास रखे थे। उस कमरे में छोटी-छोटी लाइट जलती और घंटी बजती थी जब जब घंटी बजती तो तब उसके पिता साहब के लिए कभी चाय तो कभी पानी लेकर जाया करते थे। क्योंकि उसके पिता दफ्तर में प्यून थे और यह उनका काम था। ओर उन्हें 2 मिनट की फुर्सत भी बड़ी मुश्किल से मिलती थी मोहित लगभग आधा घंटा वहां रुका उसके बाद वह घर आ गया।


लेकिन जब से वह अपने पिता के ऑफिस से आया वह एकदम से गुमसुम सा हो गया। ना कुछ कहता है, ना कुछ बोलता है, जिस मोबाइल को वह 5 मिनट भी नहीं छोड़ता था उसकी तरफ वह देखता तक नहीं, बस सोचे जा रहा है। रात को सब लोग एक साथ खाना खाते हैं और सो जाते हैं अगले दिन मोहित कॉलेज नहीं जाता है क्योंकि उसके अंदर एक उथल पुथल मचा हुआ होता है। वह यह सोच रहा था कि उसके पिता जो इतनी कड़ी मेहनत करते हैं इतना कष्ट और पीड़ा सह कर बार-बार उसे पढ़ने के लिए क्यों कहते हैं, क्योंकि पढ़ लिखकर मैं कुछ बन जाऊं ताकि जो कष्ट उन्हें सहना पड़ते है वह कष्ट मुझे ना सहना पड़े। जब वह घर आते हैं तो बस में दिखाने के लिए पढ़ने बैठ जाता हूं हर वक्त व्हाट्सएप फेसबुक और पब्जी खेलता रहता हूं क्या यह सही है?


मेरी मां जो सुबह ना जाने कब उठ जाती है वह दिनभर सारा घर का काम करने के बाद भी मोहल्ले की महिलाओं के सूट और ड्रेस क्यों सिलती है ताकि वह कुछ पैसे जोड़कर हमारे लिए दो वक्त का खाना, कपड़े और पढ़ाई के खर्च का इंतजाम कर सकें। हमारे माता-पिता इतने दुख हो और कष्टों को खुशी-खुशी इसलिए सह जाते हैं ताकि 1 दिन पढ़ लिख कर हम कुछ बन जाए जिससे वह समाज में सर उठाकर शान से जी सकें।


लेकिन उनको धोखा देकर उन पर बोझ बन कर उनके विश्वास को तोड़ कर उनके सपनों को चकनाचूर कर देना क्या सही है..? मोहित ने आज फैसला कर लिया कि अब वह पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देगा मन लगाकर जी जान से पढ़ाई करेगा पढ़ाई करना अब उसकी जरूरत बन गई सफलता पाना अब केवल उसकी चाहत नहीं रही बल्कि उसकी जरूरत बन गई। धीरे-धीरे वह पढ़ाई में इस कदर रम गया कि आसपास कितना भी शोर हो उसका ध्यान नहीं भटकता था, कंसंट्रेशन ऐसा कि एक बार पढ़ लेता तो उसके दिमाग में छप जाता था। 


ग्रेजुएशन कंप्लीट होने के बाद मोहित ने 1 साल जमकर पढ़ाई की यूपीएससी का एग्जाम दिया फिर जब उसका रिजल्ट आया तो वही हुआ जो वह चाहता था। मोहित यूपीएससी में टॉप कर गया उसे पूरे हिंदुस्तान में 65वा स्थान प्राप्त हुआ यह खबर पूरे मोहल्ले में आग की तरह फैल गई उसके पिताजी के दफ्तर के बड़े-बड़े लोग जो कभी बात तक नहीं करते थे सभी लोग उन्हें बधाई दे रहे थे, हाथ मिला रहे थे, उन्हें मिठाई खिला रहे थे। उन्हें इतनी इज्जत कभी नहीं मिली थी इतनी इज्जत और इतना मान सम्मान पाकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मोहित ने जब अपने माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू को देखा तो एक पल में उसकी सारी थकान मिट गई जैसे उसका जीवन सफल हो गया उसकी आंखों से भी आंसू बहने लगे।


“अगर आप गरीब पैदा होते हैं तो यह आपकी गलती नहीं है लेकिन अगर आप गरीब ही मरते हो तब यह आपकी गलती है”

- बिल गेट्स

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