रिसर्च के आधार पर जनिये सकारात्मक विचार आपके जीवन  के लिये कितने जरूरी है।

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पहले माना जाता था कि एक उम्र के बाद दिमाग का विकास रुक जाता है, सीखने की क्षमता क्षीण होती जाती है।

वैज्ञानिकों के अध्ययन में सामने आया कि न्यूरोप्लास्टिसिटी दिमाग में बदलाव ला सकती है। कई अन्य अभ्यासों के साथ सकारात्मक सोच न्यूरोप्लास्टिसिटी में असरकारक होती है, पॉजिटिव थिंकिंग दिमाग की क्षमता को बेहतर बनाती है।

1.) दिमाग में आने वाले हर विचार के साथ हॉर्मोन्स जुड़ा होता है। जब सकारात्मक विचार आते हैं, मन खुशी और उम्मीद से भरा होता है, तो कॉर्टिसोल कम होता है और दिमाग खुशी वाला हॉर्मोन सेरटोनिन पैदा करता है।

जब सेरटोनिन का स्तर ठीक बना होता है, तो इंसान शांत, ज्यादा एकाग्र और स्थिर महसूस करता है। डोपेमाइन रसायन भी एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो दिमाग के रिवार्ड सिस्टम आनंद देने वाली चीजों को नियंत्रित करता है।

2.) ‘फोकस : द हिडन ड्राइवर ऑफ एक्सीलेंस' के लेखक डेनियल गोलमैन कहते हैं सकारात्मक विचारों के साथ दिमाग में स्थित प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स में हलचल शुरू हो जाती है। इससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, रचनात्मक चिंतन, संज्ञानात्मक स्वतंत्रता मिलती है

और यहां तक कि दिमाग तेजी से काम करने लगता है सकारात्मक विचार वाकई में हमारी एकाग्रता का समय बढ़ा देते हैं। यह हमारी धारणा और फोकस को भी बदलते हैं।

3.) प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स दिमाग का एक हिस्सा है, ये व्यक्तित्व विकास व दूसरे जटिल व्यवहार जैसे योजना बनाने आदि में इस्तेमाल होता है। सकारात्मक विचारों से मस्तिष्क में नई सिनेप्स पैदा होती है।

सिनेप्स एक ऐसी संरचना है जो एक न्यूरॉन को किसी अन्य न्यूरॉन को विद्युत या रासायनिक संकेत भेजने की अनुमति देती है। नकारात्मक विचारों के चलते मस्तिष्क प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स से मेटाबॉलिज्म ऊर्जा को दूर करता है, इससे दिमाग की काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है।

व्यक्ति तनाव में होता है, तो दिमाग सामान्य कामकाज में भी कठिनाई महसूस करने लगता है।

4.) ब्रेन इमेजिंग अध्ययन में सामने आया कि नकारात्मक विचार दिमाग के महत्वपूर्ण हिस्से सेरेबेलम में गतिविधियां कम कर देते हैं, यही हिस्सा शरीर के साथ तालमेल बैठाने, संतुलन और मोटर स्किल के लिए जिम्मेदार होता है।

गोलमैन मानते हैं और कई अध्ययनों में पाया कि सकारात्मक विचारों की खुराक से दिमाग को री-वायर यानी इसकी कार्यप्रणाली को बेहतर व रचनात्मकता बढ़ाई जा सकती है। नकारात्मक विचार मस्तिष्क की कार्य करने की क्षमता को धीमा कर देते हैं।

सकारात्मकता भी संक्रामक है, इसकी आदत डालें HABITS OF POSITIVITY