The Power of Positive thinking book summary in hindi

सकारत्मक सोच की शक्ति बुक समरी | The Power of Positive thinking book summary in hindi


सकारत्मक सोच की शक्ति बुक समरी | The Power of Positive thinking book summary in hindi


The Power of Positive thinking book summary in hindi


आज हम नॉर्मन विंसेंट की बुक "द पावर और पॉजिटिव थिंकिंग" की समरी जानेंगे इस किताब में लेखक ने पॉजिटिव सोच की ताकत के बारे में बताया है कि किस तरह हम अपनी पॉजिटिव सोच के द्वारा अपने सेल्फ कॉन्फिडेंस को बढ़ा सकते हैं कैसे अपनी जिंदगी की समस्याओं को सुलझा सकते हैं और कैसे पॉजिटिव थिंकिंग की मदद से सफलता और खुशियां हासिल कर सकते हैं।

नॉर्मन विंसेंट पील आपको आस्था और आशावाद का प्रसिद्ध फॉर्मूला बताते हैं। जिस पर चलकर लाखों-करोड़ों लोगों ने अपना जीवन दर्शन बदला और सफलता प्राप्त की है उनके मार्गदर्शन में आपका निराशावादी और पराजय वाली चिंतन हमेशा के लिए दूर हो जाएगा दोस्तों इस बुक में पूरे 17 Chapters दिए हैं लेकिन हम सिर्फ 5 जरूरी Chapters ही जानेंगे तो चलिए पढ़तें हैं।


1.) खुद पर विश्वास करें


किसी भी काम को करने के लिए खुद पर विश्वास होना जरूरी है। खुद पर विश्वास किए बिना हम जीवन में सफल नहीं हो सकते। कई बार हम सब ने देखा है कि बहुत से लोग दूसरों की सफलता और कामयाबी को देखकर बुरा महसूस करते हैं क्योंकि वह उतने सफल नहीं होते। अगर आप अपने आप में सेल्फ कॉन्फिडेंस पैदा कर लें तो आप दूसरों को देखकर बुरा महसूस नहीं करेंगे।


मान लीजिए की आपका कोई दोस्त परीक्षा में हमेशा A ग्रेड लाता है और आपको हमेशा C ग्रेड मिलता हो तो आपके अंदर निराशा पैदा हो जाती है। आप बचपन से ही अपने मन में यह विश्वास बना लेते हैं कि आप अपने भाई, या दोस्त की तरह सफल नहीं हो सकते। शायद आप नहीं जानते लेकिन दुनिया में ऐसे कई सफल लो लोग हैं जो स्कूल में सबसे कम नंबरों से पास होते थे। एक यूनिवर्सिटी द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार 70% स्टूडेंट में आत्मविश्वास की कमी होती है अगर आप अपने आसपास देखेंगे तो आपको ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जिनमें आत्मविश्वास की कमी है। ऐसे लोग हमेशा डर महसूस करते हैं और उन्हें कभी अपनी काबिलियत पर भरोसा नहीं होता इस तरह के डर को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है खुद पर विश्वास करना और अपने अंदर आत्मविश्वास पैदा करना। अपने अंदर आत्मा विश्वास रखने के लिए आप को पॉजिटिव विचार सोचना होगा और अपनी भावनाओं को भी पॉजिटिव रखना होगा।


लेखक हमें बताते हैं कि एक बार एक व्यक्ति कड़ाके की ठिठुरते हुई ठंड में मिडवेस्टर्न की एक होटल में मुझसे मिलने आया मुझे 35 मील दूर दूसरे शहर में लेक्चर देने जाना था। मैं उसकी कार में बैठ गया और वह फिसलती हुई सड़क पर तेज रफ्तार से कार दौड़ाने लगा। मैंने उससे कहा कि अभी हमारे पास काफी समय है तुम गाड़ी आराम से चलाओ।


तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि मेरी ड्राइविंग के बारे में चिंता ना करें पहले मुझे भी कई तरह की चिंता और असुरक्षा सताती थी लेकिन मैं अब हर चिंता हूं से ऊपर उठ चुका हूं। पहले मैं हर बात से डरता था। कार हवाई जहाज मैं यात्रा करने से डर लगता था, मेरा परिवार जब कहीं जाता था और जब तक वह लौटकर नहीं आता था तब तक मुझे चिंता ही सताती रहती, मुझे हमेशा लगता था कि कुछ गलत होने वाला है और इस वजह से मैं हमेशा हीन और बुरी भावना में रहने लगा मुझ में आत्मविश्वास की कमी होने लगी। और इसी कारण मेरे बिजनेस में भी मुझे काफी नुकसान होने लगा और स्थिति दिन पर दिन काफी खराब होने लगी थी।


लेकिन तभी मैंने एक ऐसी योजना बनाई जिससे मेरे दिमाग से असुरक्षा की भावना निकल गई और अब मुझ में विश्वास की कोई कमी नहीं है बल्कि अब तो मेरे पूरे जीवन में विश्वास है लेकिन उसकी वह अद्भुत योजना क्या थी?


लेखक कहते हैं उसने मुझे कार के विंडस्क्रीन के ठीक नीचे इंस्ट्रूमेंट पैनल पर दो क्लिप दिखाएं जिसमें से एक क्लिप में लिखा था “अगर आप में विश्वास है तो आपके लिए कुछ भी असंभव नहीं है”  फिर उसने दूसरा क्लिप लगाया जिस पर लिखा था “ अगर ईश्वर हमारे साथ हो तो कौन हमारे खिलाफ हो सकता है?”


उसने मुझे बताया कि मैं ट्रैवलिंग सेल्समैन हूं मुझे दिनभर ग्राहकों से मिलना रहता है मैंने पाया कि जब कोई व्यक्ति गाड़ी चलाता है तो उसके दिमाग में कई तरह के विचार आते अगर यह विचार नकारात्मक होंगे तो वह कई बुरी बातें और बुरे परिणाम के बारे में सोचेगा जो कि उसके लिए अच्छा नहीं होगा। लेकिन पहले मेरे साथ भी यही हुआ करता था ग्राहकों से मुलाकात करने जाते समय मेरे दिमाग में भी कई तरह के विचार असफलता और नकारात्मकता जैसे विचार आते थे लेकिन जब मैंने सकारात्मक क्लिप्स का सहारा लिया और इन सकारात्मक शब्दों को याद करना शुरू किया तब असफलता का डर और नकारात्मक विचार मेरे दिमाग से पूरी तरह निकल चुके थे। अब मैं असफलता और अयोग्यता के विचार के बजाय साहस भरे विचार सोचने लगा हूं यह सचमुच कितना आश्चर्यजनक है कि इसने मुझे इतना बदल कर रख दिया है। इस तकनीक ने मेरे बिजनेस को एकदम चमका दिया है क्योंकि अगर आप असफल होने की कल्पना करते हुए किसी ग्राहक के पास जाएंगे तो आप को बेचने में सफलता कैसे मिल सकती है?


2.) लगातार ऊर्जावान कैसे बने रहे।


लेखक कहते हैं कि आप जो भी सोचते हैं उसका आपके शरीर पर बहुत प्रभाव पड़ता है। अगर आप सोचते हैं कि आप बहुत अकेले हैं तो आपका शरीर इस बात को मान लेगा। अपने अंदर विश्वास भरने से आपके अंदर ऊर्जा पैदा होती हैं एक व्यक्ति ने लेखक से कहा था कि वह अपने आप को एनर्जी से भरने के लिए चर्च जाता है। लेखक ने उसकी बात को एकदम सही बताया है हमें हर प्रकार की शक्ति ईश्वर से ही मिलती है फिर चाहे वह इलेक्ट्रिक पावर हो या स्प्रिचुअल पावर और दुनिया के सबसे सफल व्यक्ति भी किसी न किसी तरह ईश्वर के संपर्क में थे जिससे उन्हें कामयाब होने की उर्जा मिली।


लेखक कहते हैं मैंने एक खिलाड़ी को देखा जो भरी दोपहर में 100 डिग्री तापमान में अपना गेम खेल रहा था उसका वजन भी बहुत ज्यादा घट चुका था। खेलते समय उसे एक बार तो ऐसा लगा जैसे वह थक कर गिरने ही वाला है। लेकिन अपनी खोई हुई शक्ति को वापस प्राप्त करने का तरीका उसका बड़ा ही अद्भुत था। उसने यह वाक्य अपने मन में दोहराया कि “जो ईश्वर के सेवक हैं वह अपनी ताकत फिर से पा लेंगे, वह दौड़ेंगे पर रुकेंगे नहीं, वह चलेंगे पर कमजोर नहीं होंगे, वह गरुड़ की तरह तेज आसमान में उड़ जाएंगे लेकिन गिरेंगे नहीं” 


लेखक कहते हैं कि उसने मुझे बताया कि इस प्रार्थना को मैदान में दोहराने के बाद उसकी ताकत फिर से नई जैसी हो गई वह खेल खत्म होने के बाद भी जरा भी थकान महसूस नहीं कर रहा था। उसने कहा कि मैंने अपने दिमाग में ऊर्जा पैदा करने वाली सशक्त विचार को बैठा लिया है।


लेखक कहते हैं थॉमस अल्वा एडिसन की पत्नी से में उनकी प्रसिद्ध पति और दुनिया के महानतम आविष्कारक की आदतों और गुणों के बारे में बात किया करता था। उन्होंने बताया कि जब एडिसन कई घंटों की मेहनत के बाद प्रयोगशाला से अपने घर आते थे तो वह अपने पुराने बिस्तर पर लेट जाते वह उसी समय किसी बच्चे की तरह बाधारहित और गहरी नींद में सो जाते। और जब वह तीन चार या पांच घंटों के बाद जागते तो वह पूरी तरह तरोताजा और काम पर लौटने के लिए उत्सुक रहते थे।


उनकी पत्नी ने बताया कि वह पूरी तरह से प्राकृतिक है उनका मतलब था कि वह पूरी तरह से प्राकृतिक और ईश्वर के सामंजस्य में जीते थे। कोई भी संघर्ष, मानसिक असंतुलन, भावनात्मकता और कोई भी अस्थिरता नहीं थी। वह जब तक जागते तब तक काम करते रहते थे फिर वह गहरी नींद में सो जाते। और जागने के बाद फिर से अपने काम में पूरी उत्सुकता के साथ लौटा आते थे। एडीसन कई साल तक जीवित रहे और कई मायनों में वह अमेरिकी महाद्वीप के रहने वाले सारे सबसे रचनात्मक जीनियस थे भावनात्मक संतुलन पूरी तरह से विश्राम करने कि उनकी योग्यता से उन्हें ऊर्जा प्राप्त होती थी।


लेखक कहते हैं शरीर को इस तरह से बनाया गया है कि यह लंबे समय से आवश्यक ऊर्जा का उत्पादन कर सके। अगर कोई व्यक्ति अपने शरीर का अच्छे से ध्यान रखें, यानी खानपान और व्यायाम नींद आदि पर ध्यान दे। तो शरीर अपने आप को अच्छी तरह से स्वस्थ रख सकता है। आश्चर्यजनक ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है। और इस ऊर्जा को बनाए रख सकता है। अगर व्यक्ति अच्छी तरह संतुलित भावनात्मक जीवन पर ध्यान देता है तो ऊर्जा की बचत होगी लेकिन अगर वह स्वयं के द्वारा बनाई गई नकारात्मक भावनात्मक प्रतिक्रिया पर अपनी ऊर्जा खर्च करता है तो उसके पास जीवन की शक्ति की कमी होगी। जब शरीर मस्तिष्क और आत्मा मिलकर काम करते हैं तो व्यक्ति की स्वाभाविक अवस्था आवश्यक ऊर्जा के लगातार नवीनीकरण की होती है। संतुलित जीवन, सकरात्मक, भावनात्मक संतुलन से हमारे अंदर लगातार ऊर्जा का उत्पादन होता रहता है।


3.) सुखी और खुश होना आपके हाथ में है।


अगर आपसे पूछा जाए कि आप खुश है या नहीं तो इसका जवाब यही होगा कि आप अपनी खुशियां खुद ही तैयार कर सकते हैं यह बहुत आसान है। लेकिन ज्यादातर लोग अपने आसपास की नकारात्मक बातों को ही देखते रहते हैं और खुश रहने की कोशिश ही नहीं करते। हमारे आसपास का खराब माहौल ही हमें दुखी करता है लेकिन कुछ चीजें सकारात्मक भी है और हमें अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। आसपास के माहौल में दुखी रहने की बजाए हम उसमें भी सकारात्मकता ढूंढ सकते हैं और खुश रह सकते हैं अगर आप खुश रहते हैं तो आपका परिवार और आपके आसपास के लोग भी आपको देख कर खुश होंगे लेखक कहते हैं अगर आप खुश रहने का तरीका ढूंढ रहें हैं तो हमेशा अच्छे विचारों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।


लेखक कहते हैं बड़े लोगों की तुलना में बच्चे खुशी के ज्यादा विशेषज्ञ होते हैं वह व्यस्क जो दिल में वृद्धावस्था मैं भी अपने बचपन को बनाए रखता है वह जीनियस है क्योंकि वह उस समय सचमुच अपने सुखद भाव को बनाए रखता है जो ईश्वर ने बच्चों को प्रदान किया है।


लेखक कहते हैं मैंने अपनी 9 साल की बेटी एलिजाबेथ से पूछा कि “क्या तुम खुश हो बेटे?”

हां मैं खुश हूं उसने जवाब दिया।

क्या तुम हमेशा खुश रहती हो? मैंने उससे पूछा

हां उसने जवाब दिया मैं हमेशा खुश रहती हूं।

तुम किस बात से खुश रहती हो? मैंने उससे पूछा 

यह तो मैं नहीं जानती उसने कहा “मैं सिर्फ खुश रहती हूं”।

“कोई ना कोई बात तो होगी जिससे तुम्हें खुशी मिलती होगी? मैंने पूछा”

तब उसने कहा “अपने दोस्तों से खुशी मिलती है मैं उन्हें पसंद करती हूं, स्कूल जाने में मुझे खुशी मिलती है मुझे मेरे टीचर्स पसंद है, मैं चर्च जाना पसंद करती हूं। मुझे संडे स्कूल के टीचर्स पसंद है मैं अपने भाई और बहन से प्रेम करती हूं मैं अपने माता-पिता से प्रेम करती हूं जब मैं बीमार होती हूं तो वह मेरा ध्यान रखते हैं वह मुझसे प्रेम करते हैं और अच्छा व्यवहार करते हैं।


लेखक कहते हैं एलिजाबेथ की खुशी का यही फार्मूला है और मुझे लगता है कि यही खुशी का असली फॉर्मूला है उसकी दोस्ती (याने की उसके सहयोगी) उसका स्कूल (यानी जिस जगह वह काम करती है) उसका चर्च और संडे स्कूल (यानी जहां वह पूजा करती है) उसके भाई-बहन माता-पिता (यानी उसका घरेलू दायरा जहां उसे प्रेम मिलता है) यही तो खुशी का सारांश है और आपको अपने जीवन के इन्ही क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खुशी मिलती है।


लेखक कहते हैं बहुत सारे लोग अपने दुख का निर्माण खुद करते हैं। जीवन में पहले ही समस्याओं की कमी नहीं है जो हमारे सुख को कम करती हैं ऐसे में यह मूर्खतापूर्ण है कि हम अपने दिमाग में और दुखों का निर्माण करें। जिन दुखों पर आपका बहुत कम नियंत्रण है या कोई नियंत्रण ही नहीं है उसके अलावा अपनी तरफ से दुखों का निर्माण करना कितना मूर्खतापूर्ण है। हम अपने दुखों का निर्माण इसलिए करते हैं क्योंकि हम अपने मन में दुखी विचारों को सोचते हैं। हम अपनी नकारात्मक भावनाओं का नजरिया ऐसा रखते हैं कि हमारे लिए हर चीज बुरी होने वाली है या हम यह सोच लेते हैं कि दूसरे लोगों को वह मिल रहा है जिसके वह योग्य नहीं है और हमें तो वह भी नहीं मिल रहा है जिसके हम योग्य हैं। नफरत विद्वेष और दुर्भावना की भाव से हम अपने दुखों को और ज्यादा बढ़ा लेते हैं।


अब सवाल यह है कि किस तरह अपने दुख का निर्माण करना बंद करके सुख का निर्माण शुरू करें।


आप सुख के मनोविज्ञान के सहारे अपने दिन को शुरू कर सकते हैं और ऐसा करके आप अपने दिन के नजरिये को परिवर्तित कर देंगे।


कपड़े पहनते, दाढ़ी बनाते हैं समय, नाश्ता करते समय खुद से इस बात को जोर देकर कहीं की “मुझे विश्वास है कि आज का दिन बहुत बढ़िया गुजरेगा। मुझे विश्वास है कि मैं आज अपने सामने आने वाली हर समस्याओं को सफलता से सुलझा लूंगा। मैं शारीरिक भावनात्मक और मानसिक रूप से अच्छा अनुभव करता हूं, जिंदा रहना कितना अच्छा है जो मेरे पास था जो मेरे पास अभी है और जो मेरे पास भविष्य में रहेगा। मैं उन सब चीजों के लिए आभारी हूं। घटनाएं बुरी नहीं होंगी ईश्वर यहां है और मेरे साथ हैं। उसके सहारे में सफल हो जाऊंगा ईश्वर को मैं हर एक चीज के लिए धन्यवाद देता हूं।


4.) अच्छे परिणामों की उम्मीद करेंगे तो अच्छे परिणाम ही मिलेंगे।


“मेरा बेटा हर काम में असफल क्यों होता है, एक दुखी पिता ने अपने 30 साल के बेटे के बारे में पूछा”


लेखक कहते हैं इस युवक की असफलता के बारे में समझना सचमुच मुश्किल था क्योंकि उसके पास सब कुछ था। वह अच्छे परिवार से था। अच्छी शैक्षणिक योग्यता थी। बिजनेस की भी कई बेहतर संभावनाएं थी। फिर भी ना जाने क्यों अपने काम में असफल हो जाता वह जिस काम में हाथ डालता वह काम गड़बड़ हो जाता वह बहुत कोशिश करता लेकिन सफलता उसके हाथ नहीं लगती। लेकिन एक दिन उसे इन सब सवालों का जवाब मिल गया उसका असफलता का सिलसिला अब टूट चुका था। अब उसके पास सफलता का जादुई स्पर्श आ चुका था अब उसका व्यक्तित्व केंद्रित था और शक्तियां प्रचुर थी।


लेखक कहते हैं कुछ समय पहले मैं उसी युवक से मिला मैंने उसकी प्रशंसा करते हुए कहा कि मुझे हैरानी हो रही है कुछ समय पहले आप हर काम में असफल हो रहे थे अब आपने एक मौलिक विचार को बेहतरीन बिजनेस में बदल लिया है। आप अपने समुदाय के लीडर बन चुके हैं कृपया आप हमें इस उल्लेखनीय परिवर्तन के बारे में कुछ बताएं।


उसने जवाब दिया कि मैंने सिर्फ विश्वास का जादू सीख लिया मैंने पाया कि अगर आप बुरे परिणामों की कल्पना करेंगे तो आपको बुरे ही परिणाम मिलेंगे वह व्यक्ति कहता है कि यह चमत्कार बाइबल की एक सकारात्मक पंक्ति का अभ्यास करने से हुआ है और वह पंक्ति थी;

“अगर आप में विश्वास हो तो आपके लिए सब कुछ संभव है”

उसने कहा मैं धार्मिक परिवार में बढ़ा हुआ मैंने यह पंक्ति कई बार सुनी थी। लेकिन उसका मुझ पर कोई खास असर नहीं हुआ एक दिन मैंने आपके दिए गए भाषणों में सुना कि आप अपनी बातों में इसी बात पर ज्यादा जोर दे रहे थे तब मेरे अंदर एक बिजली सी कौंधी और मुझे पता चला कि मुझ में इसी बात की तो कमी थी। मेरे मस्तिष्क को विश्वास करने का सकारात्मक चिंतन करने का, खुद और ईश्वर पर विश्वास करने का प्रशिक्षण नहीं मिला था। आपके सुझाव के अनुसार मैंने स्वयं को ईश्वर को सौंप दिया मैंने खुद को सकारात्मक तरीके से सोचने का प्रशिक्षण दिया इसके अलावा में सही तरीके से जीने की कोशिश करता हूं और जब मैंने इन सभी नीति को अपना लिया तो मेरे साथ होने वाली घटनाएं तुरंत ही बदल गई। मैं सबसे बुरे की बजाय सबसे अच्छे की उम्मीद करने की आदत डाल ली और यही वजह और कारण है कि पिछले दिनों मेरे साथ सबसे अच्छी घटनाएं हुई मुझे लगता है जैसे जादू हो गया है।


अगर आप अपने जीवन में कुछ अच्छा पाना चाहते हैं तो सबसे पहले उस चीज के बारे में सोचिए और अच्छा महसूस कीजिए। ऐसा विश्वास कीजिए कि मैं वह चीज जरूर कर लूंगा आपको अपनी बात पर विश्वास होना चाहिए विश्वास में बहुत ताकत होती है और आप जिस चीज के बारे में सोचते हैं आप उसे पा ही लेते हैं। चीजों से उम्मीद करना सीखना चाहिए ना कि उन पर शक करना, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आप कुछ भी उल्टा सीधा सोचने लगे


लेखक कहते हैं कुछ ऐसे शब्द मुहावरे का वाक्य ढूंढ लीजिए जो हमेशा आपको अच्छा सोचने के लिए मजबूर करते हैं फिर उनमें से हर दिन एक मुहावरे और वाक्य अपने दिमाग में डालिये, उसे बार-बार दोहराइये, जब आप सुबह उठते हैं और जब आप सोने जा रहे हों तब भी, जब भी आपको दिन में समय मिल जाये इससे आपके विश्वास की शक्ति को बढ़ाने में बहुत मदद मिलती है और आप जो विश्वास करते हैं वैसा ही होने लगता है।



5.) मैं हारने में विश्वास नहीं करता।


आपके मन में कोई भी नकारात्मक विचार आता है तो उसे बिल्कुल हटा दीजिये और हमेशा यह सोचिए कि मैं हारने वालों में से नहीं हूँ और मैं ऐसी किसी भी चीज पर विश्वास नहीं करता। आपका एटीट्यूड भी हमेशा ऐसा होना चाहिए जो आपको जीत की तरफ ले जाए। कई बार हमारे जीवन में जब बहुत सारी परेशानियां आ जाती है तो हम उन से भागने लगते हैं बल्कि मुसीबतों से भागने के बजाए उनका डटकर सामना कीजिए और तब तक लड़िये जब तक मुसीबत खुद आपको छोड़कर ना भाग जाए। परेशानी से डरकर भाग जाना किसी भी परेशानी का हल नहीं होता अगर आपमें विश्वास है आप अपने ईश्वर पर विश्वास करते हैं तो हार जैसी किसी भी चीज पर भरोसा नहीं करेंगे। हम सब को भगवान ने कोई न कोई अनोखी शक्ति जरूर दी है बस हमें उन पर अमल करने की जरूरत है।


उदाहरण के लिए लेखक बताते हैं की एक बार एक महिला ने अपने 15 साल के बेटे को हमारे पास भेजा वह चाहती थी कि हम उसे सीधा कर दें उस महिला को इस बात से सच में चिड़ छूटती थी कि वह कभी भी अपनी पढ़ाई में 70 से ज्यादा नंबर नहीं ला पाता था। उस महिला ने अपने बेटे की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस बच्चे में दिमाग बहुत है।


लेखक कहते हैं मैंने उस महिला से पूछा कि आपको कैसे पता?

महिला ने कहा कि वह मेरा बेटा है मैंने बहुत अच्छे कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और मैं मेरिट में आयी थी।

लड़का उदास होकर अंदर कमरे में चला गया मैंने उस कमरे में जाकर उस लड़के से पूछा क्या हुआ बेटे? उसने कहा मैं नहीं जानता मेरी मां ने आपसे मुझे मिलने के लिए भेजा है।

मैंने कहा आपकी मां कहती है कि आपको सिर्फ 70 ही नंबर मिलते हैं?

लड़के ने कहा - हां मुझे इतने ही नंबर मिलते हैं और इससे भी बड़ी बात यह है कि मुझे इससे भी कम नंबर मिलते हैं।

मैंने पूछा क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारे पास बहुत दिमाग है

लड़के ने कहा - मां कहती है कि दिमाग बहुत तेज है, मैं नहीं जानता हूं मुझे तो लगता है मैं बहुत बड़ा मूर्ख हूं उसने गंभीरता से कहा; मैं पढ़ता तो हूं, फिर किताब बंद कर देता हूं याद करने की कोशिश करता हूं इस प्रक्रिया को मैं 3 बार जरूर करता हूँ और फिर सोचता हूं कि मैं उसे तीन बार में अपने दिमाग में नहीं घुसा पाया तो फिर आखिर कैसे घुसा पाऊंगा? और यही सोचते हुए स्कूल जाता हूं कि मुझे कुछ याद नहीं हुआ टीचर मुझसे कुछ पूछती है; तो मैं खड़ा हो जाता हूं और मुझे कुछ याद नहीं रहता उसने कहा परीक्षाएं आती है और मैं थरथर कांपते हुए बैठा रहता हूं मुझे कुछ जवाब याद नहीं आता उसने कहा कि मैं नहीं जानता हूं कि ऐसा क्यों होता है मेरी मां बहुत बुद्धिमान हैं लेकिन शायद उनकी बुद्धि मेरे में नहीं आ पाई।


लेखक कहते हैं कि उसकी मां की वजह से ही उस बच्चे में हीन भावना आ गई थी। जिससे कि वह बच्चे को अपने नकारात्मक विचार ही उसे पढ़ा रहे थे। उसका दिमाग भी कंद हो गया था उसकी मां ने उससे कभी यह नहीं कहा की वह स्कूल जाए और ज्ञान प्राप्त करने की अदभुत और रोमांचक प्रक्रिया से गुजरे। वह इतनी समझदार नहीं थी कि वह उसे प्रोत्साहित करें कि दूसरों से प्रतियोगिता करने की बजाय वह खुद से प्रतियोगिता करे और वह लगातार इस बात पर जोर दे रही थी कि अपनी मां की तरह ही वह भी अपनी बुद्धिमानी का परिचय दे और इसी दबाव के कारण उस लड़के का दिमाग कुंद हो गया था।


इसके लिए मैंने उस लड़के को सुझाव दिया कि जब भी तुम पढ़ाई करने बैठो इस तरह से प्रार्थना करो की “हे ईश्वर मैं जानता हूं कि मेरा दिमाग बहुत अच्छा है और मैं अपने हर काम सफलतापूर्वक कर सकता हूं” फिर आप रिलैक्स हो जाएं और बिना तनाव के पुस्तक पढ़ें और यह सोचे कि आप कोई कहानी पढ़ रहे हैं और इसे दोबारा तब तक ना पड़े जब तक आपकी इच्छा ना हो। इस बात पर विश्वास करें कि आप जो भी पढ़ रहे हैं आपको सब कुछ समझ में आ रहा है और सारी जानकारी मस्तिष्क में अच्छी तरह से बैठ रही है। सुबह जब स्कूल जाए तो खुद से कहें; “इतने अच्छे नंबर लाने के लिए तो वह किताबी कीड़ा रही होंगी और आजकल कौन किताबी कीड़ा होना चाहता है? मैं मेरिट होल्डर बनना नहीं चाहता मैं तो बस ठीक ठीक तरह से स्कूल से पास करना चाहता हूं।


फिर कक्षा में जब टीचर आपसे कुछ पूछे तो जल्दी से अपने मन में वह प्रार्थना करें और फिर जवाब दें तब यह सोचे कि ईश्वर आपकी जवाब देने में मदद कर रहा है और जब कोई परीक्षा दे तो विश्वास करें कि "ईश्वर आपके दिमाग को शक्ति प्रदान कर रहा है" और आपके दिमाग में सही जवाब आ जाएंगे।


वह लड़का इन्हीं विचारों पर चला और आप जानते नहीं है कि 6 महीने बाद उसे कितने अंक मिले? उसे 6 महीने बाद पूरे 90 अंक मिले लेखक कहते हैं कि मुझे पूरा भरोसा है कि उस लड़के ने इस बात पर विश्वास कर लिया था कि “मैं हारने मैं विश्वास नहीं करता” और यह फिलॉसफी की कितनी असरदार हो सकती है और वह जीवन भर सकारात्मक शक्ति का अद्भुत प्रयोग करता रहा होगा।


इसी तरह से लेखक ने एक और उदाहरण देते हुए कहते हैं कि मुझे एक सज्जन मिला जिन्होंने मुझे बताया कि मेरे पिताजी एक सेल्समैन थे वह कभी हार्डवेयर का सामान बेचते, कभी चमड़े का तो, कभी फर्नीचर का सामान बेचते वह हर साल अपनी लाइन बदल लेते थे।


मैं अक्सर उन को यह कहते हुए सुनता था कि वह मां को बता रहे होते थे कि स्टेशनरी बैग या जो भी समान वह बेच रहे होते थे उनकी यह आखिरी ट्रिप है। अगले साल हर चीज बदल जाएगी अगले साल हम अमीर हो जाएंगे उन्हें एक ऐसी फर्म में काम मिलने वाला है जिसका प्रोडक्ट खुद ब खुद बिक जाता है। बेचने में उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ेगी वह हमेशा तनाव में रहते थे। हमेशा डरे हुए रहते थे। और हमेशा अंधेरे में सीटी बजाए करते थे।


एक दिन उनके साथी सेल्समैन ने उन्हें 3 वाक्य की एक छोटी सी प्रार्थना दी। उन्होंने पिता जी से कहा कि ग्राहक से मिलने जाते समय इस प्रार्थना को दोहरा लें और फिर पिताजी ने इसका प्रयोग किया। कुछ ही दिनों बाद इसके परिणाम चमत्कारिक थे। पहले सप्ताह में 85% लोगों को वह सामान बेचने में कामयाब हुए और इसी के दूसरे सप्ताह में उन्होंने 95% लोगों को अपना सामान बेचा और उसमें सफलता पाई। और इसमें 16 सप्ताह तो ऐसे थे जिसमें पिताजी ने सामान बेचने का रिकॉर्ड बनाया।


पिताजी ने यह प्रार्थना कई दूसरे सेल्समैनों को भी दी और हर एक सेल्समैन को इसके आश्चर्यजनक परिणाम मिले।


पिताजी ने जिस प्रार्थना का प्रयोग किया था वह यह थी।


“मुझे विश्वास है कि मुझे ईश्वर हमेशा राह दिखा रहा है”

“मुझे विश्वास है कि मैं हमेशा सही मोड़ पर चलूंगा”

“मुझे विश्वास है कि जहां रहा नहीं है मेरे लिए वहां ईश्वर रहा बना देगा”


लेखक कहते हैं कि हर एक के जीवन में बाधाएं आती हैं वह काल्पनिक नहीं है लेकिन वह इतनी कठिन भी नहीं है जितनी कि वह दिखती हैं। आपका मानसिक नजरिया ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व है विश्वास करें कि सर्वशक्तिमान ईश्वर ने आपमें वह शक्ति दी है जिससे आप हर एक परिस्थिति से ऊपर उठ सके बशर्ते आप की निगाहें आप की शक्ति और ऊर्जा के स्त्रोत पर ही हों। आप खुद से यह दृढ़ता से कहते रहे की शक्ति के माध्यम से आप वह सब कुछ कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं। विश्वास करें कि यह शक्तियां शरीर से सारे तनाव को बाहर निकाल रही है। आपके शरीर में यह शक्ति प्रवाहित हो रही है इस पर विश्वास करें। विजय का एहसास आपको अवश्य होगा।


आप अपनी समस्या पर नजर डालें तो आपको पता चलेगा कि जो समस्या आपको परेशान कर रही है इतनी बड़ी नहीं है जितना आपने सोचा था। खुद से कहें "मुश्किल सिर्फ मानसिक होती है। मैं विजय के बारे में सोचता हूं मुझे विजय मिलेगी" इसे हमेशा याद रखें इसे एक कागज के टुकड़े पर लिख लें, अपने पर्स में रख लें, अपने टेबल पर चिपका लें या अपने शीशे में लगा ले और किसकी तरफ देखते रहें जब तक कि यह सत्य आपकी चेतना की गहराइयों में नहीं उतर जाता। जब तक यह एक सकारात्मक सनक में नहीं बदल जाता।


लेखक कहते हैं कि अमेरिका के एक बुद्धिमान जैफरन हैं जिन्होंने जीवन के बारे नियम बनाया था जो कि इस प्रकार था। 

“हमेशा चीजों को चिकने हैंडल की तरफ से पकड़ो” 

याने कि किसी काम को करते समय या मुश्किलों का सामना करते समय आप उस तरीके का प्रयोग करें जिसमें न्यूनतम प्रतिरोध का सामना करना पड़े। प्रतिरोध से घर्षण पैदा होता है इसलिए आवश्यक है कि घर्षण को कम किया जाए। नकारात्मक नजरिया घर्षण का रास्ता है इसीलिए नकारात्मकता में बहुत ज्यादा प्रतिरोध होता है। सकारात्मक नजरिया चिकने हैंडल वाली तकनीक है वही ब्रह्मांड के प्रवाह के सामंजस्य में है इससे ना सिर्फ घर्षण कम होता है बल्कि इससे सहयोगी शक्तियां भी प्रेरित होती हैं।


दोस्तों इस बुक में और भी बहुत कुछ है लेकिन हम सब कुछ यहां नही लिख सकते यह बुक आपका नज़रिया सकारात्मक करती है और आपको ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी आप एक बार इस बुक को पूरा जरूर पढ़ें धन्यवाद😊


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