Gratitude कैसे सकरात्मकता ओर मानसिक बदलाव लाती है | Real story of mental Strenght in hindi

Gratitude कैसे सकरात्मकता ओर मानसिक बदलाव लाती है | Real story of mental Strenght in hindi


Gratitude कैसे सकरात्मकता ओर मानसिक बदलाव लाती है | Real story of mental Strenght in hindi


यह सच्ची कहानी है 22 दिसंबर 2007 को john kralik को लगने लगा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे खराब दिन है। 52 साल के john एक समय सफल वकील हुआ करते थे लेकिन आज उनकी law firm दिवालिया होने वाली थी। वह एक नेक वकील थे और पैसे भी सही चार्ज करते थे लेकिन पिछले 1 साल से उनका काम सही नहीं चल रहा था उनके क्लाइंट समय पर पेमेंट नहीं कर रहे थे जिस कारण वह अपने लोगों को भी सैलरी नहीं दे पा रहे थे। पर्सनल लाइफ भी कुछ खास नहीं थी कुछ साल पहले उनका डाइवोर्स हो चुका था और उनके दो जवान लड़के उनसे दूर होते जा रहे थे।


दिसंबर का आखिरी हफ्ता छुट्टियों का था और उनके पास दो बातें करने वाला भी कोई नहीं था उन्होंने सोचा चलो मन हल्का करने के लिए पास के नेशनल पार्क में ट्रेकिंग करके आता हूं। ट्रेकिंग करते करते वह रास्ता भटक गए और रास्ता ढूंढते ढूंढते शाम का घना अंधेरा हो चुका था इस परेशानी से उनके दिमाग में पुरानी चिंताएं भी जाग उठी वह सोचने लगे कि शायद मेरी किस्मत में यहीं अकेले मरना लिखा है फिर अचानक उनका मन शांत हुआ और अंदर से आवाज सुनाई दी “कि तुम्हारे पास जो कुछ है जब तक तुम उसके लिए आभारी नहीं रहोगे तब तक तुम ऐसे ही परेशान होते रहोगे” 


John को समझ नहीं आया कि यह आवाज अचानक जंगल में कैसे प्रकट हुई लेकिन वह शांत होकर बैठ गए क्योंकि यह सीख उनके लिए जरूरी थी उन्होंने निश्चय किया कि जंगल से बाहर निकल कर इस बात पर जरूर अमल करेंगे फिर उन्हें कुछ हिम्मत आई और वह रास्ते ढूंढते हुए जंगल से बाहर निकल गए।


अगले दिन जॉन ने निश्चय किया कि मैं हर दिन एक व्यक्ति को थैंक यू नोट भेजूंगा और 1 साल तक भेजता रहूंगा लेकिन फिर जॉन अटक गए कि मैं किस बात के लिए किसको धन्यवाद करूं ओर यह सोचते सोचते पूरा दिन निकल गया। फिर शाम को उनके पास एक लेटर आया जिस पर उनके दोस्त ने उन्हें क्रिसमस प्रेजेंट के लिए थैंक यू नोट लिखा था तो john ने सोचा यह बढ़िया है क्रिसमस का समय है मैं सभी को गिफ्ट और कार्ड के साथ थैंक यू नोट भेजूंगा।


जॉन ने सबसे पहले अपने बड़े बेटे को नोट लिखा जिसने उन्हें कॉफी मशीन भेजी थी अगले दिन ही बेटा उनसे मिलने आया और उनसे कहा कि मैंने कुछ साल पहले आप से 3 लाख रुपये का लोन लिया था उसको मैं कई दिनों से लौटाना चाहता था जॉन तो इस लोन को भूल चुके थे वह अपने बेटे से मिलकर ही खुश थे।


फिर अगले दिन उन्होंने अपने दूसरे बेटे को नोट लिखा दूसरे बेटे ने भी भूले हुए उधार के पैसे लौटा दिए जो जॉन को इस संयोग से बड़ी प्रेरणा मिली जिसने भी उनके लिए जीवन में कोई भी छोटी बड़ी सहायता मदद या काम किया था उन्होंने सबको अपने दोस्तों, क्लाइंट्स, विरोधी वकीलों, ब्रोकर्स और कोर्ट के तमाम लोगों को थैंक यू नोट लिखना शुरू कर दिए।


इसके तत्काल बाद जॉन की परिस्थितियों में कोई खास बदलाव तो नहीं आया लेकिन वह हर रात थैंक यू नोट लिखने से सुकून की नींद सोने लगे उनकी मानसिकता में बड़ा परिवर्तन हुआ यानी अब वह मुश्किलों के बावजूद खुद को कमजोर जा बेचारा नहीं समझ रहे थे।


जॉन कहते हैं कि उन दिनों जब कोई पूछता था कि आप कैसे हो तो मेरे पास अपने लिए कुछ अच्छा कहने और महसूस करने के लिए होता था जॉन को यह महसूस होने लगा था कि हालात चाहे कैसे भी हो जिंदगी बेहतर तरीके से जी जा सकती है। नोट लिखते हुए जॉन को महसूस हुआ कि उनके जीवन में काफी कुछ बातें खुश होने के लिए हैं जिस पर उन्होंने अभी तक ध्यान दिया ही नहीं था जॉन के थैंक यू नोट लिखने के बाद एक चैन रिएक्शन शुरु हो चुका था 6 महीनों के अंदर जॉन ने 170 नोट भेजें और उन्हें इस तरह के कई नोट्स और कॉल से वापस मिले। जॉन के साथ काम करने वाले एक दूसरे के प्रति अच्छा महसूस करने लगे, ऑफिस का माहौल सुधरा साथ में क्लाइंट्स ने जॉन को काम देना शुरू कर दिया और कई नए लोग साथ में जुड़ने लगे। थैंक यू नोट का सिलसिला जारी रहा धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा और वकालत का विस्तार हुआ और कुछ सालों में जॉन क्रेडिट केलिफोर्निया के जज भी बने।


दोस्तों gratitude journal सबसे पुराना और बेहतर तरीका माना जाता है जिसमें आप पिछले दिनों हुई कुछ बातें लिखते हो। जैसे; मैं नए कपड़े पहनने के लिए धन्यवाद व्यक्त करता हूं , या मैं अपने पुराने दोस्तों से मिला तो मैं खुश था। शायद आपको अंदाजा लग रहा हो कि gratitude journal अधिकतर काम नहीं करते क्योंकि इन में गहराई और पर्सनल कनेक्शन स्थापित नहीं हो पाते।


Robbert Emmons जो gratitude रिसर्च में विशेषज्ञ हैं कई किताबों के लेखक है और साइकोलॉजि के प्रोफ़ेसर हैं वह कहते हैं कि gratitude journal हफ्ते में एक या दो बार लिखना काफी होगा रिसर्च में पाया गया कि हर दिन हर समय प्रैक्टिस करने से gratitude प्रैक्टिस के प्रति दिमाग रिस्पॉन्ड करना बंद कर देता है।


आप शनिवार रात को या रविवार सुबह को 15 से 20 मिनट के लिए बैठिए। हफ्ते में जो दो-तीन घटनाएं हुई हैं उनके बारे में लिखिए फिर अगले बार बुधवार रात का अलार्म लगाइए और किसी एक व्यक्ति के प्रति थैंक यू नोट लिखिए अगर आप थैंक यू नोट भेजते हैं तो अच्छी बात है अगर आप नहीं भेज पाते हैं तो भी आपका फायदा होगा।


● Journal लिखने से पहले आपको यह मानसिकता बनानी होगी कि मैं खुशी और शांति महसूस करने के लिए journaling का अभ्यास कर रहा हूं।


● आपको बहुत सारी चीजों या घटनाओं के ऊपर लिखने की जरूरत नहीं है आप एक या दो बातें पकड़ो और उन्हें डिटेल में लिखो जिससे आप अच्छी तरह से महसूस करते हुए याद करते हुए लिख सको।


● जब हम लोगों के प्रति धन्यवाद महसूस करते हैं तो हमारे व्यवहार और संबंधों पर भी असर पड़ता है इसीलिए मटेरियल चीजों से अच्छा है कि आप लोगों के प्रति धन्यवाद व्यक्त करें।


● Gratitude journal विकसित करने का तरीका है कि आप उन घटनाओं को जरूर रिकॉर्ड कीजिए जो अनअपेक्षित या सरप्राइजिंग थी ऐसी बातों के प्रति धन्यवाद आपको ज्यादा जोर से महसूस होता है और लंबे समय तक याद रहता है।


● और आखिर में अपनी जर्नल एंट्रीज को दोबारा पढ़ें और एक गिफ्ट के रूप में देखें जरूरत पड़े तो कल्पना करें कि आप इस गिफ्ट को पाकर कैसे खुशी महसूस कर रहे हैं।


● जो लोग gratitude प्रैक्टिस करते हैं उन्हें कम तनाव होता है और नकारात्मक विचार कम आते हैं जिस कारण यह लोग गहरी नींद सोते हैं। इस प्रैक्टिस का असर आपको चार हफ्तों में दिखने लगेगा ओर महीनों तक याद रहेगा और बात लिखना बहुत जरूरी है हमें ग्रामर और स्पेलिंग की चिंता नहीं करनी है क्योंकि लिखने से आप अपने विचारों को अरेंज करना और व्यक्त करना सीखते हो। हम चाहते हैं कि आपको हर दिन घटने वाली ऐसी छोटी बड़ी या साधारण बातों पर ध्यान देने की आदत पड़ जाए जिनके प्रति आप खुशी और धन्यवाद महसूस कर सको जब ऐसा होगा तो आपकी मेंटल टफनेस बहुत बढ़ जाएगी और आप आसानी से कठिनाइयों को पार करते जाएंगे।


● रिसर्च यह भी साबित करते हैं कि आपको केवल लेटर लिखने की जरूरत है भेजने की भी जरूरत नहीं है लेटर अपने आप में काम करता है।


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