बात करने में शर्म ओर झिझक कैसे दूर करें | how to overcome shyness in hindi

बात करने में शर्म ओर झिझक कैसे दूर करें | how to overcome shyness in hindi


बात करने में शर्म ओर झिझक कैसे दूर करें | how to overcome shyness in hindi

how to overcome shyness in hindi


किसी में ज्यादा तो किसी में कम लेकिन शर्म (Shyness) सबके अंदर होती है चाहे ज्यादा हो या कम जितने भी शर्म आपके अंदर है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपमें शर्माने की आदत खत्म हो जाएगी।


शर्म मतलब बोलना तो चाहते हैं लेकिन बोलने में झिझक है। अकेले कमरे में बोलने में डर नहीं लगता लेकिन कुछ लोगों के सामने में बोलने में डर लगता है शर्म महसूस होती है, किसी ग्रुप में बोलने में शर्म महसूस होती है, किसी लड़की से बात करने में शर्म महसूस होती है, या फिर अपने से बड़ों के आगे बोलने में शर्म महसूस होती है।


लेकिन शर्म क्या है?


शर्म या डर लोगों से डर, लोगों की नेगेटिव रिएक्शंस का डर है ।कि कहीं कोई मेरा मजाक ना उड़ाने लग जाए कहीं लोग मुझे रिजेक्ट ना कर दे, मुझे बेवकूफ ना समझे, मेरे बारे में कोई गलत ना समझे तो शर्माना एक डर है रिजेक्शन का।


लेकिन कोई भी शर्म या फिर डर के साथ पैदा तो नहीं होता फिर यह शर्म आई कहां से? 

हमें शायद याद ना हो लेकिन हमारे बचपन के हमारे बीते हुए  समय के बहुत सारे ऐसे incident होते हैं जिनसे हम शर्म महसूस करते हैं। सब का past अलग अलग है इसलिए सबका कॉन्फिडेंस अलग अलग है। इसे हम कुछ उदाहरण से समझते हैं जैसे एक छोटा बच्चा "र" को "ल" बोलता है जैसे राहुल को लाहुल रोटी को लोटी जब भी वह र को ल बोलता है तो उसके घरवाले और आसपास के लोग उस पर हंस देते हैं क्योंकि उस बच्चे का दिमाग इतना जानता नहीं है कि वह लोग जो उस पर हंस रहे हो उनको समझ सके वह बस इतना ही समझता है कि मैं बोलता हूं तो मेरा भी मजाक बनता है।


ऐसे ही किसी लड़के के जोक्स पर उसके भाई-बहन हंसे नहीं और उससे बोल दिया कि तेरे जोक्स तो बोरिंग है या तू बोरिंग है और ऐसे ही किसी ने क्लास में खड़े होकर बोलने की कोशिश की कुछ गलती हुई तो क्लासमेट हंस दिए ऐसे ही अलग-अलग incident कभी ना कभी सभी के साथ हुए होंगे जब हमारा दिमाग नादान होता है, जब हमारा दिमाग डेवलप नहीं हुआ होता है, जब हमारे बिलीफ बन रहे होते हैं, और जब हमारा आत्मविश्वास भी बन रहा होता है चाहे ज्यादा या कम लेकिन ऐसा सभी के साथ कभी ना कभी हुआ होता है। बस फर्क इतना है कि किसी के एक्सपीरियंस एनवायरमेंट ऐसा रहा कि वह उसे भूल गया लेकिन किसी का एक्सपीरियंस ओर एनवायरमेंट ऐसा रहा जिसे वह भूल नहीं पाया और उसके बाद दिमाग में यह छप गया और वह शर्माता गया।


अब जैसे यह शर्म हमारे अंदर आ गई है वैसे ही हम इसे बाहर भी निकाल सकते हैं यह 3 स्टेप्स जो आपको आज से और अभी से ही करने हैं।


1. यह कभी मत कहो कि तुम शर्मीले हो


हमें लगता है कि हम बहुत ज्यादा शर्माते हैं। और हम यह बात दूसरों को बता देते हैं ऐसा हम इसलिए करते हैं ताकि हम बोलने से ओर पार्टिसिपेट करने से बच पाए। खुद को प्रेशर से बचाने के लिए हम अपने शर्म का जिक्र दूसरों के सामने कर देते हैं। लेकिन हमें यह समझना होगा कि जब भी हम किसी दूसरे को बताते हैं कि हम शर्म महसूस करते हैं तो दूसरे इंसान को हम और भी ज्यादा पावरफुल कर देते हैं। बातचीत में उनकी अथॉरिटी और बढ़ जाती है वह हमें ओवरपावर्ड करते हैं और हमें लूजर वाली फीलिंग आती है तो हमारा शर्माना और बढ़ जाता है।


तो शर्म को अगर कॉन्फिडेंस में बदलना है तो सबसे पहले शर्म का ढिंढोरा पीटना बंद करना होगा इसीलिए आज से ही यह बोलना बंद कर दो कि मुझे शर्म आती है।


2. अस्वीकृति या रिजेक्शन को स्वीकार करो


कभी आपने सोचा है कि सेम एक्ट्रेस की लुक के कुछ लोग दीवाने होते हैं और वहीं उसी एक्ट्रेस को कुछ लोग पसंद नही करते , सेम कॉमेडी के जोक्स पर किसी को हंसी आती है तो किसी को हंसी नहीं आती, कोई कपिल शर्मा का फ्रेंड है तो तन्मय को पसंद नहीं करता, कोई तन्मय को पसंद करता है तो कपिल शर्मा को पसंद नहीं करता।


तो इसका मतलब आप कितने भी सुंदर हो, कितने ही प्रोफेशनल हो, या कितने भी अट्रैक्टिव हो, कितने भी इंटेलिजेंट हो, कितने भी मैच्योर हो, कितने भी फनी हो, आप हर किसी को पसंद नहीं आने वाले कोई ना कोई हमेशा आप को रिजेक्ट करेगा, कोई ना कोई हमेशा आपको ना पसंद करेगा, मतलब हम कुछ भी कर ले रिजेक्शंस तो मिलने ही वाले हैं फर्क सिर्फ इतना है कि अगर आप रिजेक्शन से सिर्फ भागते रहेंगे तो आप अपने शर्म को और बढ़ाते रहेंगे लेकिन अगर हम रिजेक्शंस को अपना लेते हैं उन्हें स्वीकार कर लेते हैं तो इंजेक्शंस का डर खत्म हो जाएगा और अगर रिजेक्शंस का डर खत्म हो गया तो शर्म अपने आप ही खत्म हो जाएगी।


तो अगली बार आपको लगे कि कहीं मेरी बात को नापसंद ना कर दिया जाए, कहीं मेरी बात को बोरिंग ना कह दिया जाए, कहीं मेरा मजाक ना उड़ा दिया जाए। तो एक बात याद रखना कि हमें रिजेक्शंस को एक्सेप्ट करना है। आपको यह सोचना है की क्या हो गया अगर मैं लोगों को पसंद ना आया तो। 7 बिलियन लोग हैं इस दुनिया में एक दो लोगों की रिजेक्शंस की वजह से मैं खुद को क्यों कम समझूँ, मूवी फ्लॉप हो जाती फिर भी एक्ट्रेस मूवी बनाते हैं, पॉलिटिशियन चुनाव हार जाता है फिर भी चुनाव लड़ता है, क्रिकेटर आउट हो सकता है फिर भी लाखों लोगों के सामने पिच पर खेलने जाता है इन लोगों ने रिजेक्शंस को अपनाया है इसीलिए अपना नाम बनाया है। इसीलिए आपको भी रिजेक्शंस को अपनाना है और अपने कॉन्फिडेंस की तरफ कदम बढ़ाना है।


3. एक डिसीजन लें और उस पर काम करें


आपका समय खराब हो जाएगा अगर आपने डिसीजन लिया और कोई एक्शन नहीं लिया तो। अगर आपको शर्म को पीछे छोड़ना है तो आपको छोटे-छोटे स्टेप्स लेना होंगे, खुद का हाथ पकड़ कर खुद को कॉन्फिडेंस के रास्ते पर चलना सिखाना होगा। सीधे एक बड़ा स्टेप्स लेने की जगह शुरुआत छोटे-छोटे  स्टेप्स से कर सकते हैं। इसके लिए आप सुबह-सुबह किसी गार्डन में वॉक करने जा सकते हैं जिस डायरेक्शन मैं पहले से ही लोग वॉक कर रहे हैं उसकी उल्टी डायरेक्शन में आपको वॉक करना है ताकि ज्यादातर लोग आपको सामने से चलते हुए नजर आए और आप लोगों के साथ आई कांटेक्ट बनाने की कोशिश करें कुछ लोग आप को देखेंगे कुछ नहीं देखेंगे आई कांटेक्ट बनाने के बाद छोटी सी स्माइल दी जा सकती है ज्यादातर लोग आपको इस्माइल ही देंगे कुछ हो सकता है कि आपको इस्माइल ना दे वह आपको रिजेक्ट कर देंगे और उस रिजेक्शंस के लिए तो हम पहले से ही तैयार हैं यह छोटा सा स्टेप्स आपके झिझक को काफी हद तक तो कम कर ही देगा। 


तो ऐसे स्टेप्स जैसे आई कांटेक्ट बनाना स्माइल पास करना किसी को फोन कॉल करके उसका हाल-चाल पूछना ऐसे छोटे-छोटे स्टेप्स आपको जानबूझकर लेने होंगे अगर आपके हर स्टेप्स सही है तो सही होंगे अगर सही नहीं है तो भी सही होंगे। जैसे आपने साइकिल चलाना सीखा था। शुरू शुरू में गिरे ज्यादा लेकिन गिर गिर कर संभलना आ गया। अगर साइकिल पर चढ़ते ही ना, तो गिरते भी ना, और संभलते भी ना। ऐसे ही लोगों से बात करना शुरू करो जैसे बस में खड़े हो या वेटिंग एरिया में खड़े हो, जिम में हों, किसी लाइन में खड़े हों, लोगों से बात करो, टॉपिक ढूंढो लोगों से बात करने का। शुरू में थोड़ी घबराहट होगी लेकिन किसी भी आदत की तरह जैसे साइकिल चलाना सीखा था जब गिरोगे और संभालोगे यह भी धीरे-धीरे तभी जीत पाओगे।


और यह भी बात सही है की दुनिया में ज्यादातर लोग इसी इंतजार में हैं कि हमें कोई नहीं सुनने वाला नही है कोई उन्हें पूछने वाला नही है तो देर किस बात की आप ही शुरुआत कर दो।


इसके अलावा आप यह भी कर सकते हो कि कोई ग्रुप ज्वाइन कर सकते हो ग्रुप से मेरा मतलब है कि आप अपने शहर में कोई सोशल क्लब या फिर स्पोर्ट्स क्लब या फिर कोई ऑर्गेनाइजेशन ज्वाइन कर सकते हो ऐसे कई ग्रुप आपके शहर में भी होंगे जहां हर हफ्ते लोग किसी कारण से ही ईखट्टे होते होंगे यह लोग एक दूसरे से मिलने एक दूसरे से बोलने के लिए ही तो आते हैं। आप सिर्फ बस ग्रुप जॉइन कर लो लोग खुद ही आपके पास आएंगे आप से सवाल करेंगे आपको जवाब देना होगा एक दो बार आप अनकंफरटेबल हो गए तो क्या अनकंफरटेबल से ही कंफर्ट आएगी।


शर्म को खत्म करने के लिए इंपोर्टेंट एक्शन जो आप ले सकते हो वह यह है कि शुरू शुरू में अपनी कन्वर्सेशन को प्रिपेयर करते जाओ। पहले से ही यह सोचकर जाना की किस टॉपिक पर बात की जा सकती है। या किसी टॉपिक पर रिसर्च करके जाना, खुद से प्रैक्टिस करके जाना, आप अपने बॉडी लैंग्वेज की प्रैक्टिस कर सकते हो इस तरह से खुद को ही प्रिपेयर करने से आप खुद में एक बहुत बड़ा डिफरेंस है देख पाओगे आपके पुराने बिलीफ़ जो है। वह टूटते जाएंगे और नए कॉन्फिडेंस से भरे बिलीफ बनते जाएंगे। फिर आपके रिलेशन में, आपकी पर्सनालिटी में, आपके सेल्फ रिस्पेक्ट में, आपके कॉन्फिडेंस में, एक बहुत बड़ा डिफरेंस आएगा।


● तो दोस्तों आपको पता चल गया होगा की शर्म के साथ कोई पैदा नहीं हुआ यह सिर्फ एक सोच है जो जाने अनजाने में हमारे अंदर डाल दी गई है जिसको हम जी रहे हैं।


● हमने यह भी जाना कि हमें रिजेक्शंस से भागना नहीं है उन्हें अपनाना है जितना हम रिजेक्शंस को अपनाएंगे उतनी ही हमारे अंदर हिम्मत और कॉन्फिडेंस बढ़ता जाएगा।


● और यह भी याद रहे कि सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होगा डिसाइड करो कि आज से आप क्या करने वाले हो अपने शर्म को खत्म करने के लिए कौन से आप एक्शंस लेने वाले हो खुद को एक कॉन्फिडेंट इंसान बनाने के लिए।


● हमारा आज हमारे कल की वजह से है और हमारा कल हमारे आज की वजह से है और अपनी शर्म को खत्म करने के लिए आप अपना पहला स्टेप आप आज से ओर अभी से ही लोगे।





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