ईमानदार पेंटर रामु हिंदी कहानी | Hindi moral story for class 8

ईमानदार पेंटर रामु हिंदी कहानी | Hindi moral story on Honesty for class 8


ईमानदार पेंटर रामु हिंदी कहानी | Hindi moral story on Honesty for class 8



ईमानदार पेंटर रामु हिंदी कहानी | Hindi moral story on Honesty for class 8


बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में बाबूलाल नाम का एक पेंटर रहता था। वह बहुत ही ईमानदार था। पर बहुत ही गरीब होने के कारण वह घर-घर जाकर पेंटर का काम किया करता था। उसकी आमदनी बहुत कम थी। बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था पूरे दिन मेहनत करने के बाद भी वह सिर्फ दो वक्त की रोटी ही जुटा पाता था। वह हमेशा चाहता था कि उसे कोई अच्छा और बड़ा काम वाले जिससे उसकी कमाई अच्छी हो पर वह छोटे-छोटे काम भी बड़ी ईमानदारी और लगन से करता था। एक दिन उसे गांव के जमींदार ने बुलाया और कहा;


“सुनो बाबूलाल... मैंने यहाँ तुम्हें एक बहुत जरूरी काम के लिए बुलाया है ! क्या तुम वह काम करोगे?”


“जी हुजूर जरूर करूंगा.. बताइए क्या काम है”


“मैं चाहता हूं कि तुम मेरी नाव पेंट करो और यह काम आज ही हो जाना चाहिए”


“जी हुजूर यह काम में आज ही कर दूंगा”


नाव पेंट करने का काम पाकर बाबूलाल बहुत खुश हुआ।


“अरे वह सब तो ठीक है पर पहले तुम यह तो बताओ कि तुम इस काम के पैसे कितने लोगे”


“वैसे तो इस काम के 1500 रुपए लगते हैं बाकी आपको जो पसंद हो दे देना”


“अच्छा ठीक है.!! तुम्हें 1500 मिल जाएंगे पर काम अच्छा होना चाहिए”


“जी हुजूर..!! आप चिंता मत कीजिए आपको काम बढ़िया ही मिलेगा”


फिर जमींदार बाबूलाल को नाव दिखाने नदी किनारे ले जाता है। नाव देखकर बाबूलाल जमींदार से थोड़ा समय मांगता है और अपना रंग का सामान लेने चला जाता है। सामान लेकर जैसे ही बाबूलाल आता है वह नाव को रंगना शुरू कर देता है। जब बाबूलाल नाव रंग रहा था तब उसने देखा।

अरे... नाव में तो छेद है अगर मैं इसे ऐसे ही पेंट कर दूंगा तो यह डूब जाएगी पहले इस छेद को ही भर देता हूं ऐसा कहकर वह उस छेद को भर देता है और नाव को पेंट कर देता है फिर वह जमींदार के पास जाता है और कहता है;


“हुजूर नाव का काम पूरा हो गया आप चल कर देख लीजिए”


“ठीक है चलो..!!”


फिर वह समुद्र किनारे पहुंच जाते हैं और नाव को देखकर जमींदार बोलता है;


“अरे वाह बाबूलाल तुमने तो बहुत अच्छा काम किया है ऐसा करो तुम कल सुबह आकर अपना मेहनतआना ले जाना”


“जी हुजूर.!!”


और ऐसा कहकर वह दोनों अपने अपने घर चले जाते हैं अगले दिन जमींदार के घर वाले उसी नाव से घूमने जाते हैं।


शाम को जमींदार का नौकर रामू जो कि उसकी नाव की देखरेख भी करता था वह ज़मीदार के परिवार को घर पर नहीं देखकर जमींदार से परिवार वालों के बारे में पूछता है। जमींदार उसे सारी बात बताता है जमींदार की बात सुनकर रामू चिंता में पड़ जाता है उसे चिंतित देखकर जमींदार उससे पूछता है;


“क्या हुआ रामु यह बात सुनकर तुम चिंतित क्यों हो?”


“सरकार लेकिन उस नाव में तो छेद था”


रामू की बात सुनकर जमींदार भी चिंतित हो जाता है तभी उसके परिवार वाले पूरा दिन मौज मस्ती करके वापस आ जाते हैं उन्हें सकुशल देखकर जमींदार चैन की सांस लेता है फिर अगले दिन जमींदार बाबूलाल को बुलाता है और कहता है;


“यह लो बाबूलाल तुम्हारा मेहनताना तुमने बहुत बढ़िया काम किया है मैं बहुत खुश हूं”


बाबूलाल पैसे लेकर जब गिनता है तो वह बहुत हैरान हो जाता है क्योंकि वह पैसे बहुत ज्यादा थे वह जमींदार से कहता है;


“हुजूर आपने मुझे गलती से ज्यादा पैसे दे दिए हैं.!!”


“नहीं बाबू लाल.. यह मैंने तुम्हें गलती से नहीं दिए हैं, यह तुम्हारी मेहनत का ही पैसा है”


“लेकिन हुज़ूर हमारे बीच तो 1500 की बात हुई थी यह तो 6000 हैं.. तो फिर यह मेरी मेहनत का कैसे हुआ?”


“क्योंकि तुमने एक बहुत बड़ा काम किया है”


“कैसा काम हुजूर..?”


“तुमने इस नाव के छेद को भर दिया जिसके बारे में मुझे पता भी नहीं था अगर तुम चाहते हैं तो उसे ऐसे भी छोड़ सकते थे या फिर उसके लिए अधिक वैसे भी मांग सकते थे पर तुमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया जिसकी वजह से मेरे परिवार वाले सुरक्षित उस नाव की सवारी कर सके अगर तुम उस छेद को ना भरते तो मेरे परिवार वाले डूब भी सकते थे। आज वह तुम्हारी वजह से सुरक्षित है इसलिए यह पैसे तुम्हारी मेहनत और ईमानदारी के हैं”


“लेकिन फिर भी हुजूर एक छेद को भरने के इतने पैसे नहीं बनते”


“बस बाबूलाल.. बस.. अब तुम कुछ मत कहो यह पैसे तुम्हारे ही हैं तुम इसे रख लो”


जमींदार की बात सुनकर और पैसे लेकर बाबूलाल बहुत खुश हुआ और कहने लगा;


“बहुत-बहुत धन्यवाद जमींदार साहब..!!”


ऐसा कहकर वह खुशी-खुशी वहां से चला गया



कहानी से मिली शिक्षा


इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमारा काम हमेशा पूरी लगन और ईमानदारी से करना चाहिए।


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