रामू ईमानदार नौकर की कहानी - Moral hindi story on honesty

रामू ईमानदार नौकर की कहानी - Moral Hindi story on Honesty

रामू ईमानदार नौकर की कहानी - Moral Hindi story on Honesty

Moral of story imaandar naukar in hindi


एक बार एक गांव में रामू नाम का एक बहुत ही ईमानदार और मेहनती मजदूर था। वह एक बहुत बड़े किसान प्यारेलाल के पास खेत में मजदूरी करता था। रामू की तरह उसका मालिक प्यारेलाल बहुत दयालु और रामू पर भरोसा करने वाला था वह रामू से कहता था।


“रामू तुम मेरे बहुत ही प्यारे और वफादार मजदूर में से एक हो मैं तुम्हें अपने छोटे भाई की तरह मानता हूं तुम मुझे कभी धोखा नहीं दे सकते यह कुछ धान(चावल) और यह पगार भी तुम लेकर जाओ”


रामू - “पर मालिक पगार तो ठीक है लेकिन इस धान की क्या जरूरत है मैंने जितना काम किया उसकी पगार तो आप बराबर देते हो”


मालिक - “यह पगार तुम्हारी मेहनत के लिए और यह धान तुम्हारी ईमानदारी के लिए है रख लो इसे मना मत करना”


रामू - “ठीक है मालिक.. जैसा आप चाहें”


प्यारेलाल का लड़का इंद्रजीत अपने पिता के इस व्यवहार से बहुत जलता था।


इंद्रजीत - “पिता जी यह क्या..? आप बिना वजह इन नौकरों को सर पर चढ़ा रहे हो कुछ जरूरत नहीं है इन्हें धान देने की काम की मजदूरी दे रहे हो वह कम है क्या?


प्यारेलाल - “बेटा इंद्रजीत ऐसा मत कहो इन्हीं गरीब मजदूरों की वजह से हम सुख में हैं यदि यह ईमानदार रामू इतने बड़े खेत में मेहनत नहीं करेगा तो हमें भी खाना नहीं मिलेगा। क्या तुम कर पाओगे इतनी मेहनत..? नहीं ना... तो फिर उसकी इमानदारी और चरित्र पर कभी संदेह मत करना ”


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प्यारेलाल वहां से चला जाता है और इंद्रजीत बहुत गुस्से में आ जाता है और कहता है इस रामू को तो... अब देखो मैं क्या करता हूं।


दूसरे दिन इंद्रजीत अपने पिता से कहता है


“पिता जी आपने सही कहा इतने बड़े खेत में काम करना मेरे बस की बात नहीं है क्यों ना हम मेरे दोस्त मेवालाल को काम पर रख लें उसे भी काम की जरूरत है मैं इन दोनों पर ध्यान रखूंगा”


प्यारेलाल - “क्या बात है.. तुम तो बड़े समझदार बनते जा रहे हो; वाकई अच्छा ख्याल है, ठीक है, रख लेते हैं मेवालाल को भी”


इंद्रजीत - “धन्यवाद पिताजी..”


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1 दिन रामू को सबक सिखाने के लिए इंद्रजीत और मेवालाल एक योजना बनाते हैं।


इंद्रजीत - “सुनो रामू इस बैलगाड़ी में जो धान(चावल) रखा है वह तुम शहर के व्यापारी को दे आना और जाते-जाते पहले इस नई गाय को खेत में बांध देना और फिर आगे जाना”


रामू - “ठीक है मालिक जैसी आपकी आज्ञा”


रामू बैलगाड़ी को लेकर चल देता है आधे रास्ते में आने के बाद जब वह गाय को खेत में छोड़ने जाता है तो वह गाय उसे जोर से लात मारती है।


रामू - “हे भगवान... यह क्या हो गया, इस गाय ने तो मेरा चलना मुश्किल कर दिया अब मैं धान कैसे लेकर जाऊंगा हे भगवान यह क्या... मेरी बैलगाड़ी कहां चली गई..? सारा धान कोई चोरी कर ले गया "


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दूसरे दिन जब रामू धीरे-धीरे खेत पर आया तो सामने मेवालाल, इंद्रजीत, और प्यारेलाल खड़े थे।


इंद्रजीत - “देखिए पिताजी यह कामचोर अब आ रहा है और इसने धान भी चुरा लिया व्यापारी के पास एक बोरी कम पहुंची है मैं खुद गिन कर आया हूं”


रामू - “नहीं नहीं मालिक यह गलत है; भला मैं ऐसा क्यों करूंगा? आप जो मुझे देते हैं उसमें मैं खुश हूं तो में ऐसा क्यों करूंगा मुझे तो कल गाय ने लात मारी थी तो में खेत में बेहोश पड़ा था जब आंख खुली तो धान के साथ बैलगाड़ी भी गायब थी”


प्यारेलाल - “यह तुमने ठीक नहीं क्या रामू इतने पुराने नौकर होकर तुमने ऐसा काम किया मुझे बहुत दुख हुआ इसकी सजा जरूर मिलेगी तुम्हें”


यह सुनकर मेवालाल और इंद्रजीत बहुत खुश हुए।


प्यारेलाल - “बेटा इंद्रजीत जरा वह लाठी तो लाना”


“जी पिताजी अभी लाता हूं”


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इंद्रजीत बहुत खुश होता है और लाठी लाकर देता है प्यारेलाल लाठी लेकर मेवालाल और इंद्रजीत को मारना शुरू कर देता है।


इंद्रजीत - “मत मारिए... मत मारिए... पिताजी चोर तो यह है आप हमें क्यों मार रहे हैं..?”


प्यारेलाल - “रामू को अगर चोरी ही करनी थी तो हो काम पर वापस ही क्यों आता और अगर मेरे पास दो बैल के अलावा कोई गाय ही नहीं है तो वह मारने वाली गाय आई कहां से? और रहा सवाल धान की बोरी की चोरी का तो उसे मैंने खुद तुम दोनों को खेत में छुपाते हुए देखा था” 


प्यारेलाल वापस उन दोनों को पीटना शुरू कर देता है


रामू - मत मारिये मालिक जाने दीजिए यह फिर ऐसा नहीं करेंगे।


प्यारेलाल - “देखी उसकी इमानदारी तुम उसे निकालने का सोच रहे थे और वह तुम्हें बचा रहा है। मेवालाल यहां से भाग जाओ हमें ऐसे नौकर की जरूरत नहीं और इंद्रजीत तुम कल से खेतों में रामू के साथ उसका हाथ बटाओगे यही तुम्हारी शिक्षा है।


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कहानी से मिली शिक्षा


अच्छी मेहनत, लगन और ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।


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