पानी का धन पानी में - Hindi moral story on greed


पानी का धन पानी में - Hindi moral story on greed

पानी का धन पानी में - Hindi moral story on greed


सूरजपुर नाम के गांव में लाला राम नाम का एक दूधवाला रहता था उसकी पत्नी बहुत लालची थी वह उससे हमेशा कीमती वस्तुओं की मांग करती रहती थी मगर लालाराम उसकी मांगों को पूरा नहीं कर पाता था क्योंकि वह दूध बेचकर बहुत कम पैसे ही कमा पाता था लेकिन उसकी पत्नी उसे हमेशा ताने मारती रहती थी और उससे हमेशा महंगी वस्तुओं की मांग करती रहती थी एक दिन उसकी पत्नी उससे बोली;


" अजी सुनो इस 10 लीटर दूध में 4 लीटर पानी मिला दो जिससे हम अधिक मुनाफा कमा सके और हम जल्द ही अमीर बन जाए फिर मैं महंगे कपड़े व गहने खरीद सकूं”


लालाराम - नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं करूंगा..!


पत्नी - छोड़ो तुम रहने ही दो तुम कभी अमीर इंसान नहीं बन सकते और ना ही मेरी ख्वाहिशों को पूरा कर सकते हो।


रोज-रोज अपनी पत्नी के ताने सुन सुनकर लालाराम परेशान हो चुका था तभी वह 1 दिन दूध बेचने जा रहा था वहां रास्ते में एक नदी थी लालाराम उस नदी किनारे बैठ गया और आराम करने लगा और सोचने लगा कि वह अपनी पत्नी की ख्वाहिशें कैसे पूरी कर पाएगा वह बहुत उदास था क्योंकि उसकी बीवी उसे रोज-रोज ताने मारती थी तभी उसने परेशान होकर थोड़ा सोचा आज दूध में थोड़ा पानी मिला लेता हूं उससे मुझे जो मुनाफा होगा उससे में कुछ महंगे कपड़े व वस्तुएं घर ले जाऊंगा।


फिर लालाराम ने दूध में आधा पानी मिलाया और अपने ग्राहकों को बेच कर बहुत पैसा कमाया लालाराम बहुत खुश था

“आज तो बहुत पैसे कमा लिए अब घर चलता हूं”!


वापस लौटते समय लालाराम ने अपनी पत्नी के लिए कुछ मिठाईयां व कपड़े खरीदे और घर की तरफ चल दिया लालाराम जब घर पहुंचा तो उसने सारा सामान अपनी पत्नी को दिया उसकी पत्नी सारा सामान देखकर बहुत खुश हो गई परंतु उसका लालच अभी खत्म नहीं हुआ वो और ज्यादा महंगे कपड़ों की मांग करने लगी लालाराम फिर दुविधा में पड़ गया और वह बहुत उदास हो गया था और सोचने लगा कि अब मैं ऐसा क्या काम करूं जिससे मेरी बीवी खुश हो जाए फिर उसने सोचा कल दूध में और ज्यादा पानी मिला दूंगा जिससे मुझे और ज्यादा मुनाफा होगा।


फिर एक दिन वह पास के गांव में दूध बेचने जा रहा था


“आज दूध में कुछ पानी मिला लेता हूं इससे जो मुझे मुनाफा होगा उससे कुछ महंगे कपड़े वह महंगी वस्तुएं घर ले जाऊंगा”


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लालाराम ने दूध में आधा पानी मिलाया और अपने ग्राहकों को दूध बेचकर बहुत मुनाफा कमाया लालाराम बहुत खुश था।

“हां आज बहुत पैसे कमा लिए अब घर चलता हूं”


वापस लौटते वक्त वह नदी के किनारे एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा और फिर उसकी नींद लग गई तभी वहां कुछ बंदर आ गए और उन बंदरों ने लालाराम की पैसों से भरी दोनों पोटलियां उठा ली और झट से पेड़ पर चढ़ गए तभी लालाराम की नींद खुली और वह परेशान हो गया बंदर उसके पैसों से भरी पोटलियां उठाकर खेल रहे थे।


“हाय... हाय... में तो लुट गया.. बर्बाद हो गया.. बंदर तो मेरी दोनों पोटलियां ले गए हाय अब मैं क्या करूं ऐ बंदरों मेरी दोनों थैलियां लौटा दो मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है”


बंदर उसे देख कर जोर जोर से हंसने लगे। तभी लाला राम को एक बात याद आई उसके दादाजी ने उसे बताया था कि बंदर नकलची होते हैं तुम  जैसा करोगे वह भी वैसा ही करेंगे और तभी वह अपने दोनों हाथ ऊपर उठा कर नाचने लगा तो बंदर भी वैसा करने लगे।


ऐसा करते देख लालाराम ने सोचा अरे यह तो मूर्ख बंदर है मैं जैसा कर रहा हूं वह भी वैसा ही कर रहे हैं इसके बाद वह जोर-जोर से कूदने लगा उसको देख बंदर भी जोर-जोर से कूदने लगे फिर दूध वाले को एक आईडिया आया उसने सोचा क्यों ना मैं अपने पास रखे गमछे को नीचे फेंक दूं क्या पता यह मूर्ख बंदर भी ऐसा ही करें यह सोच लालाराम ने अपना गमछा नीचे फेंक दिया और सोचने लगा शायद बंदर भी उसे देख उसकी दोनों पैसों से भरी पोटलिया नीचे फेंक देंगे।


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उसको ऐसा करते देख बंदरों ने भी ऐसा ही किया बंदरों ने उसकी दोनों पोटलिया नीचे जमीन पर फेंक दी लेकिन उसमें से एक पोटली जमीन पर आकर गिरी ओर दूसरी पोटली नदी में जाकर गिरी वह पानी में बह गई।


“हाय.. हाय.. हाय.. यह क्या किया मूर्ख बंदर मेरे पैसे पानी में क्यों फेंक दिया हे भगवान.. मेरे पैसों को बचाओ कोई तो मेरे पैसे बचाओ मैं तो लुट गया बर्बाद हो गया”


तभी वहां भगवान प्रकट होते हैं और लालाराम से कहते हैं "हे मनुष्य व्यर्थ में विलाप क्यों कर रहे हो तुमने जो पैसा अपनी मेहनत से कमाया था वह अब भी तुम्हारे पास है छल कपट से कमाए हुए पैसे का अंजाम यही होता है वह पैसा तुम्हारे पास अधिक समय तक नहीं रहता है"


“हे भगवान मुझे माफ कर दो मैं दूध में पानी नहीं मिलाना चाहता था वह तो मेरी बीवी ने मुझे ज्यादा पैसे कमाने के लिए मजबूर किया तभी मैंने यह अपराध किया ”


भगवान - जितना तुम ईमानदारी से कमाते हो उन्ही पैसों में तुम्हारी पत्नी को खुश रहना होगा नहीं तो एक ना एक दिन तुम्हारा विनाश तय है!


“मुझसे भूल हो गई भगवान मुझे क्षमा कर दीजिए मैं आगे से कोई भी ऐसा काम नहीं करूंगा”


तभी भगवान ने प्रसन्न होकर लालाराम से कहा "मैं तुमसे प्रसन्न हूं तुम मुझसे वरदान में कोई भी नहीं की वस्तु मांग सकते हो मांगो तुम्हें क्या चाहिए।


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लालाराम - नहीं भगवान.. नहीं भगवान.. मुझे कुछ नहीं चाहिए मैं और ज्यादा मेहनत करके पैसे कमा लूंगा और उन्ही पैसों से ही अपनी पत्नी की ख्वाहिशें पूरी करूंगा इससे मेरी पत्नी को नहीं मुझ पर गर्व होगा और मुझे विश्वास है कि वह मुझ पर भरोसा जरूर करेगी।


इसके बाद लालाराम अपने घर पहुंचता है उसके घर पहुंचते ही उसकी बीवी उसके पास बहुत उत्सुकता से आती है यह सोच कर कि उसका पति उसके लिए आज बहुत सारे उपहार लाया होगा लेकिन लालाराम को खाली हाथ देखकर वह बहुत गुस्सा हो जाती है पर लालाराम बहुत शांत रहता है और पूरे दिन की घटना के बारे में उसको बताता है यह सुनकर उसकी पत्नी को उसके किए का पछतावा होता है उसकी पत्नी अपने  बुरे बर्ताव के लिए लालाराम से माफी मांगती है और आगे से कभी महंगी वस्तुएं की इच्छा ना करने का वचन देती है।


अगले दिन फिर लालाराम दूध बेचने जाता है और जिन लोगों के साथ उसने बेईमानी की थी उनसे क्षमा मांगता है और उन्हें उनके हिस्से का दूध देता है जो कि उसने बेईमानी करके बचाया था फिर वह उन बंदरों के पास भी जाता है और उन्हें धन्यवाद कहता है क्योंकि उन बंदरों ने उसे सही रास्ता दिखाया था अगर बंदर उसकी पैसों से भरी पोटली पानी में ना फेंकते तो उसे अपनी भूल का एहसास कभी नहीं होता।


कहानी से मिली सीख


आप बेईमानी से कितना भी पैसा कमा लें वह पैसा ज्यादा दिन आपके पास नहीं रह पाता, बेईमानी से कमाया गया पैसा कहीं ना कहीं आपके नुकसान में ही निकल जाता है, ओर उन पैसों से आप कभी खुश नही रह सकते आपके जीवन मे कोई ना कोई समस्या बनी ही रहेगी, इसलिए हमेशा ईमानदार रहें।

इमानदारी अमूल्य धन है जिसके पास इमानदारी है वही दुनिया का सबसे अमीर इंसान है।


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