श्रीनिवास रामानुजन का जीवन परिचय हिंदी में | Srinivasa Ramanujan biography in hindi

श्रीनिवास रामानुजन का जीवन परिचय | Srinivasa ramanujan biography in hindi, work, education, movie


श्रीनिवास रामानुजन का जीवन परिचय | Srinivasa ramanujan biography in hindi, work, education, movie

बॉयोग्राफी ऑफ रामानुजन


क्या आप जानते हैं कि श्रीनिवास रामानुजन कौन थे? अब आप कहेंगे कि हां भाई बहुत बड़े गणितज्ञ थे लेकिन कितने बड़े और क्यों अधिकतर लोग उन्हें जीनियस कहते हैं और क्यों पूरी दुनिया में उन्हें न्यूटन से कंपेयर किया जाता है यही आज हम यही जानेंगे!

कौन थे श्रीनिवास रामानुजन?


श्रीनिवास रामानुजन गणित का 3 घंटे का पेपर 30 मिनट में कर देते थे उनके स्कूल और कॉलेज में उन्हें मैथ्स का जीनियस कहा जाता था यहां तक कि उनके टीचर भी उन्हें जीनियस कहते थे! श्रीनिवास रामानुजन भारत के एक महान गणितज्ञ थे उनके जन्मदिन के मौके पर देश भर में राष्ट्रीय गणित दिवस या नेशनल मैथमेटिक्स डे मनाया जाता है, गणित एक ऐसा विषय है जो ज्यादातर विद्यार्थीयों को बहुत कठिन लगता है लेकिन श्रीनिवास रामानुजन का यही सबसे पसंदीदा विषय था उनका पूरा नाम श्रीनिवास अयंगर रामानुजन था चलिए जानते हैं उनके बारे में।

रामानुजन के बारे में जानकारी


नाम(Name) - श्रीनिवास रामानुजन

पत्नी (Wife Name) - जानकी

जन्म तारीख (Date of Birth) - 22 दिसंबर 1887

जन्म स्थान (Birth Place) - कोयंबतूर शहर

पेशा (Profession) - गणितज्ञ

धर्मं(Religion) - हिन्दू

मृत्यु (Death) - 26 अप्रैल 1920

मृत्यु का कारण(Cause of Death) - क्षय रोग

श्रीनिवासन रामानुजन का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा


श्रीनिवास रामानुजन 22 दिसंबर 1887 को मद्रास में पैदा हुए थे उनके पिता साड़ी की दुकान में क्लर्क का काम करते थे और उनकी मां एक हाउसवाइफ थीं। बचपन में रामानुजन बहुत ही सेंसिटिव थे बचपन में उन्हें मंदिर के प्रसाद के अलावा और कुछ खाना अच्छा नहीं लगता था अगर उन्हें अपने पसंद का खाना नहीं मिलता था तो मिट्टी में लेट जाते थे और तब तक नहीं उठते थे जब तक उनकी बात ना मानी जाए बचपन से ही रामानुजन बहुत जिज्ञासु थे वह हमेशा पूछा करते थे कि दुनिया में पहला इंसान कौन था, यहां से बादल कितनी दूर है। बचपन में जब एक बार क्लास में उनकी टीचर ने कहा जब भी आप किसी नंबर को उसी नंबर से डिवाइड करते हैं तो हमेशा एक आता है उदाहरण के लिए अगर 1000 फल को 1000 लोगों में बांट दिया जाए तो हर एक लोगों पर सिर्फ एक ही फल आएगा तभी रामानुजन एकदम से बोल पड़े कि यह जीरो के केस में एकदम सही नहीं होगा क्योंकि हम जीरो को जीरो से डिवाइड करते हैं तो आंसर वही नहीं होता, क्योंकि किसी को एक फल भी फल नहीं मिलेगा।

रामानुजन की फैमिली के पास ज्यादा पैसे नहीं थे इसलिए उन्हें किराएदार रखने पड़े वह किराएदार 2 स्टूडेंट्स थे जो कि पास के एक लोकल गवर्नमेंट कॉलेज में पढ़ते थे इन दोनों ने देखा कि रामानुजन मैथ्स में बहुत इंटरेस्टेड हैं इसलिए वह फ्री टाइम मैं रामानुजन को को मैथ्स पढ़ाया करते थे रामानुजन बहुत कम समय में ही उन दोनों स्टूडेंट से मैथ्स में काफी अच्छे हो गए, रामानुजन हमेशा उन दोनों को लाइब्रेरी से मैथ्स की बुक लाने को कहते थे स्कूल में सब जानते थे कि रामानुजन एक जीनियस है। और उनके एक हेड मास्टर ने कहा था कि यह लड़का मैथ्स में जीनियस है।

स्कूल में तो रामानुजन बाकी सब्जेक्ट्स भी पढ़ लेते थे इसलिए उन्हें कॉलेज के लिए फुल स्कॉलरशिप मिली, लेकिन कॉलेज तक पहुंचते-पहुंचते उनका मैथ्स में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट हो गया था और वह बाकी सब्जेक्ट नहीं पढ़ते थे और मैथ्स के अलावा बाकी सारे सब्जेक्ट में फेल हो जाते थे। कॉलेज में भी सब जानते थे रामानुजन मैथ्स में जीनियस है क्योंकि वह 3 घंटे के पेपर को 30 मिनट में ही सॉल्व कर देते थे, जिन प्रश्नों को प्रोफेसर 12 से 15 स्टेप्स में करते थे, उन प्रश्नों को रामानुजन 3 स्टेप्स मैं ही कर देते थे लेकिन इन सबके बावजूद रामानुजन की स्कॉलरशिप कैंसिल कर दी गई और उन्हें कॉलेज छोड़ना पड़ा क्योंकि वह बाकी सब्जेक्ट में पास ही नहीं हो पाते थे ट्यूशन भी नहीं लेते थे क्योंकि बुक्स में सवालों को सॉल्व करने का तरीका उन्हें पसंद नहीं था। यह सब देखकर रामानुजन की मां बहुत परेशान हो गई और उन्होंने सोचा शायद शादी के बाद रामानुजन अपनी रिस्पांसिबिलिटी को समझेंगे इसलिए उनकी शादी करवा दी जिस लड़की से उनकी शादी करवाई थी वह उस वक्त सिर्फ 10 साल की थी और छोटी एज में शादी करना उस वक्त कोई बड़ी बात नहीं थी।

श्रीनिवास रामानुजन का कॅरियर


शादी के बाद रामानुजन को लगा कि अब उन्हें किसी तरीके से पैसे कमाने पड़ेंगे और इसीलिए वह जॉब के लिए अप्लाई करने लगे और अपनी मैथ्स की नोटबुक लेकर वह सब को दिखाते थे लेकिन किसी ने उन्हें जॉब नहीं दी लेकिन फाइनली उन्हें मद्रास पोर्ट ऑफ ट्रस्ट में जोब मिल गई और वहां सर फ्रांसिस और नारायण अय्यर के ऑफिस में अकाउंटिंग क्लर्क की जॉब करने लगे जिसके लिए उन्हें ₹30 हर महीने मिलने लगे, सर फ्रांसिस और नारायण अय्यर को पता था कि यह लड़का मैथ्स में बहुत अच्छा है इसलिए वह रामानुजन की मदद करने लगे सर फ्रांसिस ने रामानुजन को एंकरेज किया कि वह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को लेटर लिखें और अपना काम दिखाएं।

उसके बाद रामानुजन ने तीन प्रोफेसर को लेटर भेजा दो प्रोफेसर ने उनके लेटर को रिजेक्ट कर दिया जबकि एक प्रोफेसर को उनका काम बहुत पसंद आया और वह लेटर देखकर ही जान गए थे यह इंसान बहुत जीनियस है और उनका नाम था G. H. Hardy. यह लेटर बहुत इंटरेस्टिंग था इसलिए बहुत यूनिवर्सिटी में मैथमेटिशियन को यह लेटर दिखाया जाता है इस लेटर में कुछ इस तरह से लिखा हुआ था

“डिअर सर मैं एक एकाउंटिंग क्लर्क हूँ मद्रास इंडिया में, और मेरी 1 साल की सैलरी 20 पाउंड्स है मैं 23 साल का हूं और मेरे पास कोई यूनिवर्सिटी डिग्री नहीं है और मेरे पास सिर्फ स्कूल जितनी एजुकेशन है, मेरे पास जितना भी फ्री टाइम होता है उसे मैं मैथमेटिक्स में लगा देता हूं मैंने डायवर्जन थ्योरी पर भी काम किया है और लोकल मैथमेटिशियंस उनके रिजल्ट को “आउटस्टैंडिंग” बोलते हैं मैं इस लेटर के साथ आपको कुछ थ्योरम्स भेज रहा हूं अगर इन थ्योरमस में आपको कुछ अच्छा लगता है तो मैं चाहता हूं इनको पब्लिश किया जाए"

योर्स ट्रूली
एस रामानुजन

उस वक्त हार्डि को ऐसे बहुत से लेटर्स मिलते थे जिसमें लोग क्लेम करते थे, क्योंकी उन्होंने बहुत बड़ी-बड़ी डिस्कवरी की है, लेकिन हार्डी कहते हैं कि मैं यह पहली नजर में ही जान गया था कि यह लेटर उन कैटेगरी में में नहीं है रामानुजन ने इस लेटर के साथ करीबन 50 थ्योरम भेजी थी और उनमें से एक बहुत ही अच्छी थ्योरम थी, इस लेटर के बाद हार्डी ने रामानुजन को लेटर लिखा और कहा “डिअर सर मैं आपके काम में बहुत इंटरेस्टेड हूं आप जितनी जल्दी हो सके इनका प्रूफ मुझे सेंड कीजिए” हार्डी के लेटर के बाद इंडिया में ब्रिटिश गवर्नमेंट रामानुजन को सीरियसली लेने लगे और उन्हें यूनिवर्सिटी डिग्री होने के बावजूद प्रेसीडेंसी कॉलेज में रिसर्च स्कॉलरशिप मिल गई जहां उन्हें ₹75 पर मंथ मिलते थे हार्डी ने रामानुजन को बहुत कन्वेंस किया कि वह कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में उनके साथ काम करने के लिए आए लेकिन रामानुजन ने मना कर दिया कि वह अगर ओवेर्सिस गए तो कोई भी उनके बच्चों के साथ शादी नहीं करेगा लेकिन अंत में रामानुजन मान गए जब उनके सपने में उनकी देवी नामागिरी ने दर्शन दिए और कैंब्रिज आने के लिए कहा, रामानुजन कैम्ब्रिज गए और हार्डी से मिले और उन्हें अपने पिछले 10 सालों में लिखी हुई 3000 थ्योरम्स दिखाइ हार्डी ने रामानुजन से कहा अगर वह अपने काम को पब्लिश करना चाहते हैं तो उन्हें प्रूफ देना पड़ेंगे, क्योंकि रामानुजन डायरेक्ट आंसर लिखते थे और प्रूफ नहीं देते थे लेकिन नॉर्मल पब्लिक को समझाने के लिए हर स्टेप्स किस बेसिस पर आया यह बताना जरूरी था।

इसलिए रामानुजन ने कैंब्रिज में क्लासेस लेना स्टार्ट कर दिया 1915 तक रामानुजन के 9 पेपर पब्लिश हो चुके थे जिनमें मॉड्यूलर इक्वेशंस, और एप्रोक्सीमेशन टू पाई, एक फेमस पेपर थे रामानुजन हमेशा सबसे अलग रहते थे अब क्योंकि इंग्लिश लोग नॉनवेज खाते थे, इसीलिए रामानुजन अपने कमरे में राइस सांभर और फ्रूट्स खाते थे जहां पर कैंब्रिज में बाकी इंडियंस बाहर घूमते थे वही रामानुजन बहुत ही छोटे ग्रुप्स में या फिर अकेले रहना पसंद करते थे।

और इसी वक्त प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था और उन्हें अपनी पत्नी और मां की बहुत याद आ रही थी रामानुजन चाहते थे कि उनकी पत्नी उनके साथ कैंब्रिज आ जाए लेकिन रामानुजन की मां ऐसा नहीं चाहती थी इसलिए वह रामानुजन के लेटर्स उनकी पत्नी को नहीं दिखाती थी, और उनकी पत्नी के लेटर्स को रामानुजन तक नहीं पहुंचने देती थी रामानुजन बहुत दुखी हो गए थे क्योंकि उन्हें अपने लेटर्स का कोई जवाब नहीं मिल रहा था वह बहुत बीमार भी होने लगे चेकअप के बाद उन्हें पता चला कि उन्हें ट्यूबरक्लोसिस की बीमारी है वह बहुत दुखी हो गए और इसी दुख के कारण एक बार तो वह ट्रेन के आगे कूद गए थे, लेकिन यह अच्छा हुआ कि गार्ड ने ट्रेन रुकवा दी ओर वह बच गए लेकिन पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। हार्डी वहां पर पहुंचे और उन्होंने झूठ कह दिया कि रामानुजन रॉयल सोसाइटी के फेलो है इसलिए उन्हें अरेस्ट ना किया जाए लेकिन जब पुलिस ने कंफर्म किया तो उन्हें पता चला कि रामानुजन एक फेमस मैथमेटिशियन है और इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया लेकिन यह झूठ बहुत जल्दी सच हो गया और रामानुजन को एक्चुअल में रॉयल सोसाइटी का फेलो बना दिया गया और रामानुजन S. Ramanujan से F.R.S Ramanujan बने

जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दूं F.R.S बहुत ही सिग्निफिकेंट ओनर है जो की बहुत ही फेमस साइंटिस्ट को मिला है जैसे कि आइज़क न्यूटन, माइकल फैराडे, और अल्बर्ट आइंस्टाइन इंडियन मैथमेटिकल सोसायटी में रामानुजन की बहुत तारीफ हुई और जनरल की फर्स्ट पेज में उनका नाम पब्लिश किया गया रामानुजन को लगा इंडिया जाकर शायद उनकी तबीयत ठीक हो जाएगी इसलिए वह इंडिया वापस आ गए लेकिन इंडिया आकर उनकी तबीयत और खराब हो गई उन्हें बहुत पेन होता था लेकिन फिर भी वह मैथ्स की प्रॉब्लम सॉल्व करते थे और दुर्भाग्य से 1 साल के बाद उनकी डेथ हो गई और वह बहुत छोटी उम्र में 32 साल में दुनिया छोड़ कर चले गए।

हार्डी को जब इस बात का पता चला तो वह बहुत ही दुखी हुए हार्डी कहते हैं कि मैं बहुत लकी हूं की रामानुजन ने मुझे लेटर लिखा और सबसे पहले वह मुझे मिले रामानुजन से मैंने बहुत कुछ सीखा है। मरने से 3 महीने पहले रामानुजन ने हार्डी को एक लेटर लिखा था उन्होंने अपनी हेल्थ के बारे में इस लेटर में कुछ नहीं बताया था और बस यही लिखा था कि मैंने रिसेंटली बहुत ही इंटरेस्टिंग फंक्शन डिस्कवर किए हैं जिन्हें मैं मॉक थीटा फंक्शन कहता हूं यह मैं आपको सेंड कर रहा हूं आई होप आपको यह पसंद आएगा।


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श्रीनिवास रामानुजन की ज़िंदगी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य


• सन 1889 में चेचक नाम की बीमारी फैल गई थी इस बीमारी के चलते रामानुजन के सभी पांचों भाई बहन मारे गए थे उस समय इस बीमारी से उनके जिले में बहुत लोग मरे थे लेकिन रामानुजन इस बीमारी से फिर सेे ठीक हो गए थे।

• रामानुजन पैदा होने के 3 साल तक बोल नहीं पाते थे उनकेे घरवाले सोचते थे कहीं यह गूंगा तो नहीं है।

• रामानुजन घर खर्च चलाने के लिए बचपन में ट्यूशन पढ़ाया करते थे इसके लिए उन्हें महीने के ₹5 मिलते थे रामानुजन जब सातवीं कक्षा में थे तब वह B.A. के लड़कों को ट्यूशन पढ़ाते थे।

• रामानुजन ने कॉलेज के स्तर का मैथ 11 साल की उम्र में ही याद कर लिया था और 13 साल की उम्र में उन्होंने ट्रिग्नोमेट्री को रट दिया था और खुद की थ्योरम बनाने लगे थे 17 साल की उम्र में उन्होंने यूलर कांस्टेंट की वैल्यू खोज दी थी।

• श्रीनिवास रामानुजन को 31 साल की उम्र में 1918 में रॉयल सोसाइटी का सबसे कम उम्र का साथी चुना गया और 13 अक्टूबर 1918 को रामानुजन को ट्रिनिटी कॉलेज का साथी चुना गया ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय थे।

• भारतीय राज्य तमिलनाडु में, रामानुजन के जन्मदिवस को IT Day के रूप में और पूरा देश नेशनल मैथमेटिक्स डे के रूप में मनाता है।

• रामानुजन ने अपनी 32 साल की पूरी जिंदगी में 3884 इक्वेशन बनाई इनमें से बहुत सी तो आज भी अनसुलझे हैं, मैथ में 1729 को रामानुजन संख्या के नाम से जाना जाता है


• श्रीनिवास रामानुजन को “ man who knew infinity कहा जाता है क्योंकि इनके प्रमुख योगदान में से 60% से ज्यादा infinite series के सूत्र थे।

• श्रीनिवास रामानुजन के जीवन पर आधारित फिल्म भी बनी है जिसका नाम है “The Man Who Knew Infinity ” यह फिल्म यूनाइटेड किंगडम में रिलीज हुई थी।

तो दोस्तों इस पोस्ट में हमने श्रीनिवास रामानुजन की जिंदगी के बारे में जाना, लेकिन क्या आपने सोचा कि अगर रामानुजन 32 साल की उम्र में नहीं मरते मतलब अगर वह 60 से 70 साल की उम्र तक भी जीते तो वह बहुत सी डिस्कवरी कर सकते थे, और दूसरी बात यह कि जब तक ब्रिटिशर्स ने उनके टैलेंट को नहीं पहचाना तब तक उनकी इंडिया में कदर ही नहीं हुई और अगर वह हार्डी को लेटर नहीं लिखते तो शायद हमें उनके बारे में पता ही नहीं होता।

श्रीनिवासन रामानुजन से संबंधित कुछ सवाल व जवाब

• रामानुजन का IQ लेवल कितना था?

➡ रामानुजन के जीवित रहते उनके IQ लेवल की कभी जाँच नही की गई, लेकिन गणितज्ञों ओर साइंटिस्टों के मुताबिक उनका IQ लेवल 120 से 150 के बीच रहा होगा।

• रामानुजन मठ पार्क कहाँ है?

➡2017 में, आंध्र प्रदेश के चित्तूर में कुप्पम में रामानुजन मठ पार्क की शुरुआत हुई।

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