कोरोना वायरस क्या है? कैसे सुरक्षित रह सकते है - Corona virus tips in hindi

दोस्तों कोरोनवायरस के बारे में हम DR. Manisha mendiratta, MBBS MD (pulmonary medicine senior respiratory physician) से जानेंगे कि कैसे हम सुरक्षित रह सकते हैं

कोरोनावायरस क्या है - what is coronavirus


कोरोनावीरस वायरस का एक बड़ा परिवार है जो जानवरों या मनुष्यों में बीमारी का कारण हो सकता है। मनुष्यों में, कई कोरोनवीरस को सामान्य सर्दी से लेकर अधिक गंभीर बीमारियों जैसे मध्य पूर्व श्वसन श्वसन सिंड्रोम (MERS) और गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (SARS) के कारण श्वसन संक्रमण का कारण माना जाता है। सबसे हाल ही में खोजे गए कोरोनावायरस का कारण कोरोनोवायरस रोग COVID-19 है।

COVID-19 क्या है - What is covid-19


COVID-19 संक्रामक रोग है जो हाल ही में खोजे गए कोरोनावायरस के कारण होता है। यह नया वायरस और बीमारी दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में फैलने से पहले अज्ञात था। COVID-19 अब वैश्विक स्तर पर कई देशों को प्रभावित करने वाली महामारी है।

कोरोना वायरस के लक्षण क्या है- What are the symptoms of corona virus


COVID-19 अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है। अधिकांश संक्रमित लोग हल्के से मध्यम बीमारी का विकास करेंगे और अस्पताल में भर्ती हुए बिना ठीक हो जाएंगे।

सबसे आम लक्षण:

बुखार
सूखी खाँसी
थकान

कम सामान्य लक्षण:

दर्द एवं पीड़ा
गले में खराश
दस्त
आँख आना
सरदर्द
स्वाद या गंध का नुकसान
त्वचा पर एक दाने, या उंगलियों या पैर की उंगलियों के विघटन

गंभीर लक्षण:

सांस लेने में कठिनाई या सांस की तकलीफ
सीने में दर्द या दबाव
भाषण या आंदोलन का नुकसान
यदि आपके पास गंभीर लक्षण हैं, तो तत्काल चिकित्सा की तलाश करें। हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य सुविधा पर जाने से पहले फोन करें।
हल्के लक्षणों वाले लोग जो अन्यथा स्वस्थ हैं उन्हें घर पर अपने लक्षणों का प्रबंधन करना चाहिए।
औसतन ५-६ दिन लगते हैं जब कोई लक्षण दिखाने के लिए वायरस से संक्रमित होता है, हालांकि इसमें १४ दिन तक लग सकते हैं।

कोरोना वायरस का इलाज घर पर कैसे किया जा सकता है और खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है?

कोरोना वायरस क्या है? कैसे सुरक्षित रह सकते है - Corona virus tips in hindi


कोरोना वायरस टिप्स हिंदी।

दोस्तों आज हम बात करेंगे कोरोनावायरस के बारे में यह तो हमने एक्सेप्ट कर लिया है कि कोरोनावायरस कहीं जाने वाला नहीं है तो आज हम उन सवालों के बारे में बात करेंगे जो रोज मरीज और उनके अटेंडेंट पूछते हैं कोरोनावायरस के बारे में।

सबसे पहले कि आप घर पर हैं और आपको लग रहा है कि सांस लेने में तकलीफ हो रही है, तो इस पर अलग-अलग थ्योरी है कि आप 10 सेकंड सांस रोककर देखते हैं कि आपको लगता है कि तकलीफ नहीं हो रही है या आप ब्रीडिंग एक्सरसाइज करते हैं जो कि वैल्युएट कर सकती हैं बिल्कुल आप यह सब कर सकते हैं लेकिन यह अनुशंसित नहीं है एक जो अनुशंसित का पाठ है वह यह है कि 6 मिनट का वॉक टेस्ट होता है इस वॉक टेस्ट में मरीज को 6 मिनट के पेस पर चलने के लिए देखा जाता है और 6 मिनट में चलने के बाद उनके ऑक्सीजन लेवल को चेक करते रहते हैं, अगर 6 मिनट के बाद ऑक्सीजन का डिप छह से आठ परसेंट से ज्यादा हो तो इसमें फेफड़ों का संक्रमण शुरू हो सकता है।

pulse oximeter moniter यह एक सिंपल डिवाइस है इसे अपनी उंगली पर लगाते हैं यह डिवाइस आपके ऑक्सीजन लेवल को मॉनिटर करता है तो अगर आपके ऑक्सीजन लेवल जो नॉर्मल 95 से 97% होते हैं और अगर यह 95% से नीचे आते हैं जैसे 94, 93 या 92% तो आपको सलाह लेनी चाहिए, चेकअप के लिए जाना चाहिए तो इससे पहले कि आपका नुकसान शुरू हो बॉडी में निमोनिया बढ़ जाए इससे पहले आपको डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

कोरोनावायरस में एक टर्म होती है happy hypoxia इसका मतलब यह होता है कि बॉडी में ऑक्सीजन का लेवल कम होते जाता है जिसको hypoxia कहते हैं लेकिन आपकी सांस नहीं फूलती है, लेकिन जब आपको सांस फूलने लगती है तब वह आपको नुकसानदायक होता है अगर इनिशियल स्टेज पर ही आप मोड्रेड या सिवियर कैटेगरी में आते हैं तब आपको हॉस्पिटलाइज्ड किया जाता है।

कोरोना वायरस की दवाइयां

हॉस्पिटल में आपको ऑक्सीजन लेबल्स के लिए कई तरह की मेडिसिन दी जाती है हमारा शरीर कोरोनावायरस से बहुत ज्यादा फाइट करता है तो इसलिए हमारी बॉडी में बहुत इन्फ्लेमेशन होता है तो इस इन्फ्लेमेशन को रोकने के लिए कुछ anti-inflammatory दवाई जैसे tocilizumab उपलब्ध है, कुछ एंटीवायरल दवाइयां जैसे Remdesevir, fabiflu भी उपलब्ध है
अगर बीमारी बढ़ती है तो स्टेरॉयड और ब्लड थिनर्स को भी जोड़ा जाता है तो यह डिपेंड करता है कि आपकी तीव्रता कितनी है, यह देखा गया है कि कोरोनावायरस हाईपरकोगुलेटिव स्टेज है इसका मतलब यह है कि इसमें खून गाढ़ा हो जाता है और कहीं-कहीं जम जाता है जिसके वजह से फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी होै जाती है तो इसीलिए खून को पतला करने की दवाई दी जाती है, इसीलिए जो मरीज 60 साल के ऊपर के हैं और उनमें comorbidities कंडीशन है जैसे डायबिटीज हाइपरटेंशन या किडनी की कोई बीमारी हो तो उन्हें हमें हॉस्पिटलाइज करना पहले ही स्टेज पर शुरू कर देना चाहिए।

तो अगर आप ने टेस्ट करवाया और आपका टेस्ट पॉजिटिव आता है तो हमें क्या करना है क्या हमें फिर से उस चीज को लेकर पैनिक करना है?

अब उसमें कुछ demacrations है कुछ ग्रेडिंग हुई है की क्या आप mild cases में आते हैं माइल्ड केस मतलब की अगर आपको हल्का गले में खराश है या फिर शरीर एक हो रहा है।

moderate cases मतलब अगर आप को निमोनिया बन रहा है या आपके ऑक्सीजन लेबल्स कम हो रहे हैं।

severe cases का मतलब होता है अगर आपको फेफड़ों में दोनों तरफ निमोनिया बन रहा हैै आपके ऑक्सीजन लेबल्स फेल हो रहे हैं और सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही है
तो सरकारी गाइडलाइन के हिसाब से जिनमें माइल्ड केसेस हैं जिनको हल्की गले में खराश या फिर शरीर एक हो रहा हो तब उनको डॉक्टर होम क्वॉरेंटाइन के लिए बोल सकते हैं।

अब यह होम क्वॉरेंटाइन क्या है? और इसका उद्देश्य क्या है?

होम क्वारंटाइन का एक तो उद्देश्य है कि आप घर में ही रहे एक कमरे में ही रहे क्योंकि आज के समय में बहुत ज्यादा मरीज है इसीलिए तो जो मरीज आप से भी ज्यादा गंभीर हैं उन गंभीर मरीजों को अस्पताल में एक अच्छा इलाज मिल सके इसीलिए आप घर पर क्वारन्टीन में ही रहें
तो आप घर पर ही रहे क्योंकि आप इनफेक्शंस हो और अपनी फैमिली को भी इनफेक्ट कर सकते हो इसीलिए आपको घर में अपने आप को आइसोलेट करके रखना है घर के बाकी मेंबर से आइसोलेशन में रहना है, एक रूम जिसमें अटैच टॉयलेट हो और उस रूम में वह अपनी टेक केयर कर सके उस मरीज को वहीं पर लिमिटेड रहना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसको कभी कोई प्रॉब्लम नहीं हो सकती इसीलिए क्वारन्टीन की भी कुछ गाइडलाइन हैं

जिसमें डॉक्टर आपको एक प्रिफॉर्म मेडिकेशन आपको एडवाइज्ड करते हैं दूसरी बात यह होती है कि आपको अपने वाइटल को मॉनिटर करना होता है वाइटल मतलब आपको सुबह-शाम अपना टेंपरेचर चेक करना है अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करना है जो कि एक पल्स ऑक्सीमीटर से होते हैं

क्या मैं एक कोरोनावायरस मरीज के कांटेक्ट में आया हूं तो मुझे कोरोनावायरस हो सकता है?

तो उसमें हम को क्लोज कांटेक्ट को डीफरेंसीएट करना है जैसे आपको कोई क्रॉस करके गया है तो आपको कोरोना इनफेक्शन नहीं होगा, तो क्लोज कांटेक्ट होते हैं कि जो इंसान बिना मास्क पहने एक पॉजिटिव इंसान के पास 15 मिनट से ज्यादा रहता है और उन दोनों के बीच का फासला 3 फीट से कम है तो 3 फीट और 15 मिनट से ज्यादा हो तभी हम उस मरीज की क्लोज कांटेक्ट में आते हैं और अगर ऐसा नहीं है तो हम उसे क्लोज कांटेक्ट नहीं बोल सकते, तो अगर आप क्लोज़ कांटेक्ट में आ गए हैं अगर आपको पता नहीं है और उसके बाद आपको पता चलता है कि 2 दिन के बाद वह व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया है तो आपको क्या करना है आपको कितना पैनिक करना है कौन से टेस्ट कराने हैं कराने हैं कि नहीं कराने हैं?

 तो इसके लिए आप डॉक्टर से मिलेंगे यह जो टेस्ट है कोविड-19 यह सिर्फ डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन से ही होता है तो जैसे आप आज संक्रमित हुए हैं तो उसके जांच को आने में 5 से 10 दिन का वक्त तो लगता, मान लो किसी के कांटेक्ट में आने के 5 दिन से पहले ही आपको लक्षण दिखना शुरू हो गए हैं तो भी आप टेस्ट करवा सकते हैं

एक सवाल जो कि बहुत कॉमन है यह है कि जो मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होते हैं वह चाहते हैं कि हमारा टेस्ट डिस्चार्ज होते टाइम भी एक बार और किया जाए।

इसका दो उद्देश्य है एक तो यह देखने के लिए कि क्या एक्चुअल में वह नेगेटिव हो गए हैं और दूसरा यह कि अगर वह नेगेटिव हो गए हैं तो अपनी फैमिली मेंबर के साथ रह सकते हैं या फिर अपने क्वारन्टीन टाइम को ब्रेक कर सकते हैं तो गवर्नमेंट की गाइडलाइन के हिसाब से अगर आप माइल्ड या मॉडरेट केस में आते हैं माइल्ड केस मतलब आपको आईसीयू की जरूरत नहीं पड़ी है तो ऐसे मरीज को डिस्चार्ज के समय टेस्ट नहीं करते हैं, अगर आपको 10 दिन हुए हैं आपके लक्षण शुरू हुए को और पिछले 3 दिन से आपको बुखार नहीं आया है और आप बिल्कुल श्योर हैं कि 3 दिन से आपको बुखार नहीं आया है और आपको 10 दिन लक्षण के हो चुके हैं तब आपको कोई भी टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है हम अपने क्वारन्टीन के समय को ब्रेक कर सकते हैं और नॉर्मल ही अपनी सोशल रिस्पांसिबिलिटी केरी ऑन कर सकते हैं।

क्योंकि यह देखा है कि नॉर्मल क्या है कि 14 दिन के बाद हमने फिर से रिपीट टेस्ट करवाया तो रिपीट टेस्ट भी पॉजिटिव आ जाता है फिर एक दिमाग में फिर यह आना कि क्या मैं फिर से पॉजिटिव हूं मैं अभी भी इन्फेक्ट हूं और मैं औरों को भी इंफेक्शन दे सकता हूं क्या यह बीमारी मेरे अंदर अभी भी चल रही है तो यह सब सवाल मन में रहते हैं तो हमें यह समझना है कि जब हम 14 दिन के बाद भी टेस्ट करवाते हैं तो बहुत से लोग का पॉजिटिव आता है तो इसका मतलब यह नहीं कि हम अभी भी संक्रमित हैं, वह जो टेस्ट में आता है वह वायरस मरा हुआ होता है, क्योंकि वह वायरस हमारे अंदर जिंदा नहीं है तो वह हमारे बॉडी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है इसका मतलब यह कि हम अब और लोगों का इन्फेक्शन नहीं दे सकते हैं इसीलिए रिपीट टेस्टिंग की एडवाइज नहीं दी जाती है अगर आप बिल्कुल हेल्दी फील कर रहे हैं और आपको पिछले 3 दिन में कोई तकलीफ नहीं हुई है तो आप बिल्कुल स्वस्थ हैं।

मुझे एक बार इंफेक्शन हो गया मैं ठीक हो गया क्या मुझे दोबारा इंफेक्शन हो सकता है।

अभी लास्ट 4 महीने से जो देखा गया है कुछ केस में ऐसे मरीजों को देखा गया है कि उनका टेस्ट 8 हफ्तों के बाद भी पॉजिटिव आया तो यह शुरू हुआ कि इनको दोबारा से इंफेक्शन हुआ है लेकिन लेकिन जब उसको टेस्ट किया तो पता चला कि वह री-इंफेक्शन नहीं है वह पहले वाले वायरस ही रह रहे हैं अगर आपको एक बार इंफेक्शन हो चुका है आपकी बॉडी में एंटीबॉडी डेवलप हो चुकी है और वह बीमारी और वायरस से लड़ सकती है तो आप को री इंफेक्शन होने के चांसेस नहीं है भले ही आप टेस्ट में पॉजिटिव आ सकते हैं तो RT-PCR के बेसिस पर हम यह तय नहीं करेंगे की इन्फेक्शन रह रहा है कि नहीं तो अगर आप हेल्दी फील कर रहे हैं आपको 28 दिन हो चुके हैं बिना किसी तकलीफ के तो आप स्वस्थ हैं।

यह जो सारी लड़ाई है कोरोनावायरस से वह इम्यूनिटी की है यह देखा गया है कि जिन लोगों की इम्यूनिटी कम है चाहे वह किसी भी वजह से हो जैसे डायबिटीज की वजह से या हाइपरटेंशन की वजह से या फिर स्मोकिंग की वजह से उन लोगों में इस बीमारी के बढ़ने के चांसेस ज्यादा है उन लोगों की तुलना में जो लोग नॉर्मल हैं।

NOTE : this information is educational purpose only the content is no way substitute for medical advice always consult a medical professional for more information.

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