श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध अनमोल वचन, उपदेश | Bhagavad gita Lord krishna quotes in hindi

श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध अनमोल वचन, विचार, उपदेश |Bhagavad gita Lord krishna quotes in hindi


Bhagavad gita Lord krishna quotes in hindi - श्रीमद्भागवतगीता हिन्दू धर्म का एक ऐसा ग्रंथ है जो लोगों को जीवन जीने का सही रास्ता बताता है। मन से हारे लोगों को सही दिशा देता है भगवान श्री कृष्ण द्वारा इस ग्रन्थ में हजारों वर्ष पहले कही गई बातें ओर गीता के उपदेश आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं तो चलिए पढ़ते हैं Bhagavad gita lord krishna quotes in hindi

श्रीमद्भगवद्गीता श्रीकृष्ण के अनमोल वचन | Bhagavad gita quotes in hindi


श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध अनमोल वचन, विचार, उपदेश |Bhagavad gita Lord krishna quotes in hindi


भागवद गीता के अनमोल विचार, उपदेश | Bhagavad gita quotes in hindi


●•● प्रबुद्ध व्यक्ति सिवाय ईश्वर के किसी और पर निर्भर नहीं करता।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● मेरी कृपा से कोई  सभी कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए भी बस मेरी शरण में आकर  अनंत अविनाशी निवास को प्राप्त करता है।

 - Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में  है ना ही कहीं और।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

क्रोध से  भ्रम  पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है, जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है; और लगातार तुम्हे बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में  देखता है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

 ●•● अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता


●•● हे अर्जुन, केवल भाग्यशाली योद्धा ही ऐसा युद्ध लड़ने का अवसर पाते हैं जो स्वर्ग के द्वार के सामान है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

भगवान प्रत्येक वस्तु में है और सबके ऊपर भी।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● बुद्धिमान व्यक्ति कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● आपके सार्वलौकिक रूप का मुझे न प्रारंभ न मध्य न अंत दिखाई दे रहा है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

जो कार्य में निष्क्रियता और निष्क्रियता में कार्य देखता है वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

भगवद गीता फेमस कोट्स इन हिंदी Lord krishna quotes in hindi


●•● मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ. मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ, सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम हूँ।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नहीं हैं, और फिर भी ज्ञान की बाते करते हो.बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● कभी ऐसा समय नहीं था जब मैं, तुम,या ये राजा-महाराजा अस्तित्व में नहीं थे, ना ही भविष्य में कभी ऐसा होगा कि हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाये।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● हे अर्जुन ! हम दोनों ने कई जन्म लिए हैं. मुझे याद हैं, लेकिन तुम्हे नहीं।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● वह जो वास्तविकता में मेरे उत्कृष्ट जन्म और गतिविधियों को समझता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनः जन्म नहीं लेता और मेरे धाम को प्राप्त होता है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

अपने परम भक्तों, जो हमेशा मेरा स्मरण या एक-चित्त मन से मेरा पूजन करते हैं, मैं व्यक्तिगत रूप से  उनके कल्याण का उत्तरदायित्व  लेता हूँ।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● कर्म योग वास्तव में एक परम रहस्य है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● कर्म उसे नहीं बांधता जिसने काम का त्याग कर दिया है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए बिना आसक्ति के काम करना चाहिए।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● जो  व्यक्ति  आध्यात्मिक  जागरूकता  के  शिखर  तक  पहुँच  चुके  हैं  , उनका  मार्ग  है  निःस्वार्थ  कर्म  . जो  भगवान्  के  साथ  संयोजित हो  चुके  हैं  उनका  मार्ग  है  स्थिरता  और  शांति।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● यद्द्यापी  मैं  इस  तंत्र  का  रचयिता  हूँ, लेकिन  सभी  को  यह  ज्ञात  होना  चाहिए  कि  मैं  कुछ  नहीं  करता  और  मैं  अनंत  हूँ।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● जब  वे  अपने  कार्य  में  आनंद  खोज  लेते  हैं तब वे पूर्णता  प्राप्त   करते  हैं।

Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

वह  जो  सभी  इच्छाएं  त्याग  देता  है  और  “मैं ”  और  “मेरा ” की  लालसा  और भावना  से  मुक्त  हो  जाता  है  उसे  शांती  प्राप्त  होती  है।


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Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● मेरे  लिए  ना  कोई  घृणित   है  ना  प्रिय.किन्तु  जो  व्यक्ति  भक्ति  के  साथ  मेरी  पूजा  करते  हैं  , वो  मेरे  साथ  हैं  और  मैं  भी  उनके  साथ  हूँ।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

गीता के अनमोल वचन इन हिंदी | Bhagavad gita quotes in hindi


●•● जो  इस  लोक  में  अपने  काम  की  सफलता  की  कामना  रखते  हैं वे देवताओं  का  पूजन   करें।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

मैं  ऊष्मा  देता  हूँ, मैं  वर्षा करता हूँ  और  रोकता  भी हूँ, मैं  अमरत्व   भी  हूँ  और  मृत्यु  भी।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● बुरे  कर्म  करने  वाले, सबसे  नीच व्यक्ति जो  राक्षसी  प्रवित्तियों  से  जुड़े  हुए  हैं, और  जिनकी  बुद्धि  माया  ने  हर  ली  है  वो  मेरी  पूजा  या  मुझे  पाने  का  प्रयास  नहीं  करते।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

जो  कोई  भी  जिस  किसी  भी  देवता  की  पूजा  विश्वास  के  साथ  करने  की  इच्छा  रखता  है, मैं  उसका  विश्वास  उसी  देवता  में  दृढ  कर  देता  हूँ।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● हे  अर्जुन !, मैं  भूत, वर्तमान  और  भविष्य  के  सभी  प्राणियों  को  जानता  हूँ, किन्तु  वास्तविकता  में  कोई  मुझे  नहीं  जानता।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● स्वर्ग  प्राप्त  करने  और  वहां  कई  वर्षों  तक  वास  करने  के  पश्चात  एक  असफल  योगी  का  पुन:   एक  पवित्र  और  समृद्ध  कुटुंब  में  जन्म  होता  है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

केवल मन  ही  किसी  का  मित्र  और  शत्रु  होता  है।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● मैं  सभी  प्राणियों  के  ह्रदय  में  विद्यमान  हूँ।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● ऐसा  कुछ  भी  नहीं  , चेतन  या  अचेतन  , जो  मेरे  बिना  अस्तित्व  में  रह  सकता  हो।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

 
वह  जो  मृत्यु  के  समय  मुझे  स्मरण  करते  हुए  अपना  शरीर  त्यागता  है, वह  मेरे  धाम   को प्राप्त  होता  है। इसमें  कोई  शंशय  नहीं है।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● वह  जो  इस  ज्ञान  में  विश्वास  नहीं  रखते, मुझे  प्राप्त  किये  बिना   जन्म  और  मृत्यु  के  चक्र  का  अनुगमन  करते  हैं।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे. सम्मानित व्यक्ति के लिए, अपमान मृत्यु से भी बदतर है।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

गीता के अनमोल विचार हिंदी | Bhagavad gita quotes in hindi


●•● प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी समान हैं।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● निर्माण केवल पहले से मौजूद चीजों का प्रक्षेपण है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता


Lord Krishna Quotes in Hindi


व्यक्ति जो चाहे बन सकता है यदी वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु  पर लगातार चिंतन करे।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था ना कभी होगा.जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

• ज्ञानी व्यक्ति को  कर्म के प्रतिफल की अपेक्षा कर रहे  अज्ञानी व्यक्ति के दीमाग को अस्थिर नहीं करना चाहिए।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● हर व्यक्ति का विश्वास उसकी प्रकृति के अनुसार होता है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है जितना कि मृत होने वाले के लिए जन्म लेना. इसलिए जो अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● सभी अच्छे काम छोड़ कर बस भगवान में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाओ. मैं तुम्हे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा. शोक मत करो।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि अपना काम करें, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

●•● मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते हैं और जो मुझसे प्रेम करते हैं।

- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

मैं सभी प्राणियों को सामान रूप से देखता हूँ; ना कोई मुझे कम प्रिय है ना अधिक. लेकिन जो मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते हैं वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में आता हूँ।


- Srimadbhagwadgita  श्रीमद्भगवद्गीता

कृष्ण भगवान के गीता के धार्मिक उपदेश, सार इन हिंदी


युद्ध भूमि में अर्जुन श्रीकष्ण से कहते हैं

● यह बड़े की शोक की बात है कि हम लोग बड़ा भारी पाप करने का निश्चय कर बैठते हैं तथा राज्य और सुख के लोभ से अपने स्वजनों का नाश करने को तैयार हैं।



तब श्रीकृष्ण कहते हैं...

● हे अर्जुन विषम परिस्थितियों में कायरता प्राप्त करना श्रेष्ठ मनुष्यों के आचरण के विपरीत है। न तो स्वर्ग की प्राप्ति है और न ही इससे कीर्ति प्राप्त होगी।

● हे अर्जुन तुम ज्ञानियों की तरह बात करते हो, लेकिन जिनके लिए शोक नहीं करना चाहिए, उनके लिए शोक करते हो। मृत या जीवित, ज्ञानी किसी के लिए शोक नहीं करते।

● जैसे इसी जन्म में जीवात्मा बाल, युवा और वृद्ध शरीर को प्राप्त करती है। वैसे ही जीवात्मा मरने के बाद नया शरीर प्राप्त करती है।इसलिए वीर पुरूष को मृत्यु ने नहीं घबराना चाहिए।

● न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से मिलकर बना है और इसी में मिल जाएगा। परन्तु आत्मा स्थिर है। फिर तुम क्या हो?

● आत्मा अजर अमर है। जो लोग इस आत्मा को मारने वाला यह मरने वाला मानते हैं वे दोनों की नासमझ हैं। आत्मा न किसी को मारती है और न ही किस के द्वारा मारी जा सकती है।

● आत्मा न कभी जन्म लेती है और न मरती है। शरीर का नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता। 

● तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो। यही सबसे उत्तम सहारा है, जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त रहता है।

● जैसे मनुष्य अपने पुराने वस्त्रों को उतारकर दूसरे नए वस्त्रों धारण करता है, वैसे ही जीव मृत्यु के बाद अपने पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर प्राप्त करता है।

● शस्त्र इस आत्मा को काट नहीं सकते, अग्नि इसको जला नहीं सकती। जल इसको गीला नहीं कर सकता। वायु इसे सूखा नहीं कर सकती।


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