चौथी पास, लेकिन 6000 करोड़ रुपये की कंपनी बनाई | savjibhai dholakia motivational success story in hindi

सावजी भाई के सफल जीवन की बेहतरीन प्रेरणादयाक कहानी


12 साल की उम्र में सावजीें भाई ने सूरत पहुंचकर हीरा घिसने का काम शुरू किया था और इसी वजह से वह हीरा घिस्सू भी कहलाये उस समय उन्हें तनख्वाह में ₹180 रुपए ही मिलते थे लेकिन आज उनकी कंपनी 6000 करोड़ से भी ज्यादा की है। तो चलिए पढते है सावजी भाई ढोलकिया के सफल जीवन की बेहतरीन प्रेरणादयाक कहानी।

सफल जीवन की बेहतरीन प्रेरणादयाक कहानी 

savjibhai dholakia
savjibhai dholakia




जन्म -: 12 अप्रैल 1962

शिक्षा -: चौथी पास

संस्थापक -: हरिकृष्ण ग्रुप

सफलता की बेहतरीन सच्ची कहानी



इतनी बड़ी कंपनी होने के बावजूद भी उन्होंने अपने बेटे द्रव्या को जिंदगी का सबक सिखाने के लिए 1 महीने के लिए केरल भेज दिया वह भी केवल ₹7000 देकर यही से शुुरू होती है सफल जीवन की बेहतरीन प्रेरणादयाक कहानी।


 द्रव्या ने अमेरिका से मैनेजमेंट किया था लेकिन सावजी भाई चाहते थे उनका बेटा असल जिंदगी में मैनेजमेंट करना सीखे। इसमें भी पिता ने तीन शर्ते रखी- पहली, 1 हफ्ते से ज्यादा कहीं काम नहीं करना है मतलब अलग-अलग जगह का अनुभव लेना है। दूसरी, ₹7000 सिर्फ आपात स्थिति में ही खर्च करना है यानी रोजमर्रा के काम के लिए उसे पैसे वहीं से कमाए हुए खर्च करना है। तीसरी, उसे कहीं भी अपने पिता का नाम या रसूख का इस्तेमाल नहीं करना है।

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द्रव्या ने वहां फूड आउटलेट वह जूतों की दुकान तक में काम किया सावजी भाई ने 12 साल पहले अपने बेटों के भाइयों को भी इसी तरह दूसरे शहर में काम करने के लिए भेज दिया था।



सावजी कहते हैं, 'बच्चों को हम सुबह जल्दी उठने, कम पैसा खर्च करने और लोगों से अच्छा व्यवहार करने की सीख देते हैं। लेकिन जब बच्चों के हाथ में पैसा होता है और उन्होंने किसी तरह की कोई आर्थिक परेशानी नहीं देखी होती तो ऐसे में हमे असल जिंदगी के संघर्षों के लिए इस तरह रास्ते निकालने पड़ते हैं। अगर जिंदगी में इस तरह के पाठ सीखने को मिल जाए तो इंसान हर तरह की परिस्थितियों से निकल सकता है।

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सावजी भाई के पिता छोटे से किसान थे घर में पैसों की तंगी के चलते 12 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी और चाचा के साथ सूरत आ गए उन्होंने 10 साल तक हीरा घिसने का काम किया इसके बाद अपने भाइयों और कुछ दोस्तों की मदद से इस कंपनी की नींव रखी। शुरू में कुछ खास मुनाफा नहीं हुआ लेकिन जब मुंबई में मार्केटिंग के लिए दफ्तर खोला तो बिजनेस बढ़ता गया। आज उनके “ब्रांड कृष्णा डायमंड ज्वेलरी” के देशभर में 6500 से भी अधिक आउटलेट हैं। बचपन में मां कहती थी कि तुम चाचा जैसा बनकर दिखाओ। आज उनके चाचा उनके गुरु भी हैं और हीरे के व्यापार में उनके प्रतिस्पर्धी भी।

प्रेरणादायक शिक्षादायक कहानी


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सावजी भाई के अनुसार जिंदगी में सफलता और काम में फायदा अनुभव और ज्ञान का अप्लाई करने से मिलता है। चाहे थोड़ा पढ़ा लिखा और सीखा हो उसे ज्यादा से ज्यादा अप्लाई करना चाहिए 15 साल की उम्र में उन्होंने बेटे को पढ़ने बेंगलुरु भेजा। 2 साल बाद बेटा वापस आया तो उन्हें, उसके व्यवहार में कुछ अंतर दिखा डाटा उन्हें गले लगाने में कुछ असहज सा था। सावजी भाई ने उस वक्त उसे कुछ नहीं कहा। इस व्यवहार के लिए बेटे को सीख देने के लिए उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों और उनके माता-पिता के साथ मिलकर एक कार्यक्रम करवाया। इसमें जब सब ने अपने मां-बाप को गले लगाया तब उनके बेटे को एहसास हुआ।


सावजी भाई की कुछ खास बातें





• सावजी भाई पहली बार 2014 में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अपने कर्मचारियों को 200 फ्लैट, 491 कारें, और 525 डायमंड ज्वेलरी के सेट्स उपहार में दिए थे।

• 2015 -16 में भी हजारों कर्मचारियों को दीपावली पर उपहार में कार फ्लैट्स दिए अपने भतीजे की सादगी से शादी के लिए भी चर्चा में रहे।

• इंसानों के अच्छे पारखी सावजी भाई खुद सालों तक हीरा घिस्सू (हीरा घिसने वाला) कहलाये। लेकिन जब खुद की कंपनी खोली तो हीरा तराशने वालों को सम्मानित 'डायमंड इंजीनियर' नाम दिया।

• उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिए भी शर्त रखी है कि फैक्ट्री में कोई भी पान गुटखा मसाला नहीं खाएगा। दो पहिया वाहन से आने वाले कर्मचारियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है।
इस तरह यह उनके सफल जीवन की बेहतरीन प्रेरणादयाक कहानी है।

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